केरल हाईकोर्ट की रोक: रेप आरोपी पूर्व केरल कांग्रेस विधायक राहुल को राहत
केरल के पलक्कड़ से विधायक और रेप के आरोपों में घिरे राहुल ममकूटाथिल को शनिवार को बड़ी राहत मिली है। केरल हाईकोर्ट की रोक के बाद अब पुलिस उन्हें 15 दिसंबर तक गिरफ्तार नहीं कर सकेगी। जस्टिस के. बाबू की एकल पीठ ने आदेश जारी करते हुए कहा कि अग्रिम जमानत याचिका पर आखिरी फैसला लेने से पहले विस्तृत दलीलें सुनी जाएंगी और केस डायरी की जांच की जाएगी। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस उनके खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न के दूसरे मामले में कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। यह फैसला तब आया जब तिरुवनंतपुरम प्रिंसिपल सेशंस कोर्ट ने 4 दिसंबर को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद ममकूटाथिल ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
राहुल ममकूटाथिल पर रेप और जबरन गर्भपात (Abortion) कराने के गंभीर आरोप हैं। उनके खिलाफ दो अलग-अलग मामले दर्ज हैं। पहला मामला पिछले हफ्ते दर्ज हुआ था, जिसमें रेप और जबरन अबॉर्शन के आरोप हैं। दूसरा मामला बुधवार को बेंगलुरु की एक महिला द्वारा दर्ज कराया गया है, जिसमें 2023 में हुए कथित यौन शोषण का आरोप है।
कांग्रेस ने किया निष्कासित, विधायक फरार
इन गंभीर आरोपों के बाद कांग्रेस पार्टी ने राहुल ममकूटाथिल को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। सेशंस कोर्ट से उनकी अग्रिम जमानत अर्जी खारिज होने के बाद 4 दिसंबर को उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया था। इससे पहले अगस्त में, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों के बाद उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया गया था और उन्होंने केरल यूथ कांग्रेस चीफ के पद से इस्तीफा दे दिया था।
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कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सनी जोसेफ ने कहा, “बेहतर होगा कि वह विधायक पद छोड़ दें। कांग्रेस ने कभी उनका बचाव नहीं किया। पार्टी में उनका बने रहना नैतिक रूप से अस्थिर हो गया है।” ममकूटाथिल अपने खिलाफ पहला मामला दर्ज होने के बाद से ही फरार चल रहे हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है।
विधायक की दलील: ‘रिश्ता सहमति से था, ब्लैकमेलिंग हो रही है’
अपनी याचिका में राहुल ममकूटाथिल ने खुद को बेगुनाह बताया है और जांच में सहयोग करने की इच्छा जताई है। उनका कहना है कि शिकायतकर्ता महिला के साथ उनके करीबी रिश्ते थे, जो सहमति से बने थे। उन्होंने दावा किया कि महिला शादीशुदा थी और अपने पति से अलग रह रही थी। रिश्ता बिगड़ने के बाद ही यह शिकायत दर्ज कराई गई है।
विधायक ने आरोप लगाया कि यह मामला राजनीति से प्रेरित है और उनकी छवि खराब करने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि उनके पास अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए वॉट्सऐप चैट और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया कि उन्हें बिना गिरफ्तारी के डर के जांच अधिकारी के सामने पेश होने दिया जाए।
केरल पुलिस की जांच और गंभीर धाराएं
पुलिस ने राहुल ममकूटाथिल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC), इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट और मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट (MTP Act) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। उन पर गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी देने और बिना प्रिस्क्रिप्शन के गर्भपात की दवाएं देने का आरोप है।
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पुलिस जांच कर रही है कि क्या ममकूटाथिल ने एक परिचित के जरिए महिला को अबॉर्शन की गोलियां पहुंचाईं और वीडियो कॉल पर उन्हें खाने के लिए मजबूर किया। इस मामले में एक बिजनेसमैन जॉबी थॉमस को दूसरा आरोपी बनाया गया है। केरल हाईकोर्ट की रोक सिर्फ पहले मामले में गिरफ्तारी पर लगी है, जबकि दूसरे मामले में पुलिस कार्रवाई जारी रख सकती है।
सीएम पिनाराई विजयन की प्रतिक्रिया: ‘यह एक नेचुरल ज्यूडिशियल कदम है’
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केरल हाईकोर्ट की रोक एक ‘नेचुरल’ और स्टैंडर्ड ज्यूडिशियल प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने उन आरोपों को खारिज कर दिया कि सरकार जानबूझकर कार्रवाई में देरी कर रही है। सीएम ने कहा, “पुलिस ने कांग्रेस विधायक को गिरफ्तार करने से कभी बचने की कोशिश नहीं की। जब कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका पेंडिंग हो, तो गिरफ्तारी पर रोक लगाना एक सामान्य न्यायिक कदम है।”
विजयन ने कांग्रेस पर ममकूटाथिल को पुलिस से बचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि “क्रिमिनल कैरेक्टर” वाले इस आदमी को कांग्रेस ने पॉलिटिकल सपोर्ट और सेफ्टी नेट दिया है, जिसकी वजह से वह पुलिस की पकड़ से दूर है।
दूसरे केस में भी मांगी अग्रिम जमानत
हाई कोर्ट से राहत मिलने के मुश्किल से एक घंटे बाद ही ममकूटाथिल ने अपने खिलाफ दर्ज दूसरे यौन उत्पीड़न के मामले में तिरुवनंतपुरम सेशंस कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी लगा दी। उनके वकील ने कोर्ट से अनुरोध किया कि हाई कोर्ट के आदेश को देखते हुए पुलिस को दूसरे मामले में भी गिरफ्तारी न करने का निर्देश दिया जाए। दूसरा मामला बेंगलुरु की एक महिला ने दर्ज कराया है, जिसने आरोप लगाया है कि 2023 में उसका यौन शोषण किया गया था।
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स्थानीय निकाय चुनाव और राजनीतिक बयानबाजी
यह मामला ऐसे समय में आया है जब केरल में स्थानीय निकाय चुनाव होने वाले हैं। मुख्यमंत्री विजयन ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान इस मुद्दे पर बात की और अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने त्रिशूर कॉर्पोरेशन के ट्रांसफॉर्मेशन, वेस्ट मैनेजमेंट और हाउसिंग स्कीम का जिक्र किया। साथ ही, उन्होंने जमात-ए-इस्लामी के साथ सीपीएम के कथित संबंधों के आरोपों का भी खंडन किया।
विजयन ने कहा, “हमने कभी उनसे सपोर्ट नहीं मांगा। ऐसे आरोप लगाने वाले नेता गैर-जिम्मेदाराना बयान दे रहे हैं।” इस बीच, केरल हाईकोर्ट की रोक ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है और विपक्ष को सरकार पर हमला करने का मौका दे दिया है।
15 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई
केरल हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर तय की है। तब तक के लिए ममकूटाथिल की गिरफ्तारी पर रोक रहेगी। जस्टिस के. बाबू ने कहा कि कोर्ट केस डायरी और अन्य दस्तावेजों की जांच के बाद ही अंतिम फैसला सुनाएगा। तब तक यह देखना दिलचस्प होगा कि पुलिस दूसरे मामले में क्या कदम उठाती है और क्या फरार विधायक जांच में शामिल होते हैं या नहीं।
इस पूरे प्रकरण ने केरल की राजनीति में नैतिकता और महिला सुरक्षा के मुद्दे को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। एक तरफ जहां कांग्रेस अपनी छवि बचाने के लिए डैमेज कंट्रोल में जुटी है, वहीं सत्तारूढ़ एलडीएफ इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश कर रही है। अब सबकी निगाहें 15 दिसंबर की सुनवाई पर टिकी हैं।
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