सस्पेंड TMC विधायक ने मुर्शिदाबाद में रखी बाबरी मस्जिद की नींव, तनाव
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में शनिवार को राजनीतिक और सामाजिक माहौल उस वक्त गरमा गया जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने एक नई मस्जिद की आधारशिला रखी। कबीर ने इसे ‘बाबरी मस्जिद-स्टाइल’ की मस्जिद बताया और दावा किया कि बाबरी मस्जिद की नींव रखने का यह कार्य पूरी तरह से संवैधानिक है। यह समारोह कड़ी सुरक्षा के बीच 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने की बरसी के ठीक एक दिन बाद, 7 दिसंबर को आयोजित किया गया। इस घटना ने राज्य में राजनीतिक भूचाल ला दिया है और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने ममता बनर्जी सरकार पर तीखे हमले बोले हैं।
रेजिनागर में आयोजित इस कार्यक्रम में हजारों लोग इकट्ठा हुए। कबीर ने दावा किया कि इस मस्जिद का निर्माण 300 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा, जिसमें एक अस्पताल, गेस्टहाउस और मीटिंग हॉल भी शामिल होंगे। उन्होंने मंच से ऐलान किया, “बाबरी मस्जिद बनेगी, बनेगी, बनेगी।” इस दौरान ‘नारा-ए-तकबीर’ और ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे गूंजते रहे।
“मैं कुछ भी गैर-कानूनी नहीं कर रहा हूँ”: हुमायूं कबीर
लोगों को संबोधित करते हुए हुमायूं कबीर ने कहा कि वह अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं कुछ भी गैर-कानूनी नहीं कर रहा हूँ। जैसे कोई भी मंदिर या चर्च बना सकता है, वैसे ही मैं एक मस्जिद बनाऊंगा। संविधान हमें इसकी इजाजत देता है।” कबीर ने यह भी सवाल उठाया कि बंगाल में मुसलमान ‘बाबरी मस्जिद’ नाम वापस क्यों नहीं ले सकते। उन्होंने कहा, “बंगाल में चार करोड़ मुसलमान हैं। क्या उन्हें बाबरी मस्जिद की नींव रखने और उसे बनाने का हक नहीं है?”
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कबीर ने अपने विरोधियों को चुनौती देते हुए कहा, “मेरे खिलाफ पांच केस फाइल किए गए हैं, लेकिन जिसके साथ अल्लाह है, उसे कोई नहीं रोक सकता। मुझे धमकियां दी गई हैं, यहां तक कि एक पूर्व मुख्यमंत्री ने भी धमकी दी है। अगर किसी में हिम्मत है, तो वह मुर्शिदाबाद आकर दिखाए।”
300 करोड़ का बजट और भव्य आयोजन
इस शिलान्यास समारोह के लिए व्यापक तैयारियां की गई थीं। एक करीबी सहयोगी के मुताबिक, इस कार्यक्रम का कुल बजट करीब 70 लाख रुपये था, जिसमें से 30 लाख रुपये सिर्फ खाने पर खर्च हुए। करीब 60,000 लोगों के लिए शाही बिरयानी बनाने के लिए सात कैटरिंग एजेंसियों को काम पर लगाया गया था। कार्यक्रम स्थल पर 150 फीट लंबा और 80 फीट चौड़ा मंच बनाया गया था।
कबीर ने दावा किया कि सऊदी अरब के दो मौलवियों समेत हजारों लोग इस समारोह में शामिल हुए। समर्थक सिर पर ईंटें लेकर कार्यक्रम स्थल की ओर बढ़ते देखे गए, जो एक प्रतीकात्मक इशारा था। यह सब नेशनल हाईवे-12 के पास हुआ, जिसे चालू रखने के लिए करीब 3,000 वॉलिंटियर्स तैनात किए गए थे।
बीजेपी का ममता बनर्जी पर बड़ा हमला: ‘आग से खेलना’
इस घटना पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने जानबूझकर हुमायूं कबीर को बाबरी मस्जिद की नींव रखने की अनुमति दी ताकि मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण किया जा सके। बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आग से खेल रही हैं। वह राजनीतिक फायदे के लिए मुस्लिम भावनाओं को भड़काने के लिए निलंबित टीएमसी विधायक का इस्तेमाल कर रही हैं।”
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मालवीय ने कहा कि यह परियोजना कोई धार्मिक प्रयास नहीं बल्कि एक राजनीतिक स्टंट है। उन्होंने चेतावनी दी कि इलाके में कोई भी गड़बड़ी एनएच-12 को ब्लॉक कर सकती है, जो उत्तर बंगाल को शेष राज्य से जोड़ता है। इसका राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। बीजेपी ने कबीर के निलंबन की टाइमिंग पर भी सवाल उठाए और कहा कि उन्हें पहले ही सस्पेंड कर देना चाहिए था जब उन्होंने हिंदुओं को धमकाने वाले बयान दिए थे।
टीएमसी ने किया पल्ला झाड़ा: ‘बीजेपी के इशारे पर हो रहा काम’
सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने कबीर के इस कार्यक्रम से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया है। पार्टी ने कबीर को इस हफ्ते की शुरुआत में ही सस्पेंड कर दिया था। टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता ने पीटीआई से कहा, “हुमायूं कबीर बीजेपी के पेरोल पर हैं और हिंसा भड़काने के लिए उनके एजेंट के तौर पर काम कर रहे हैं। मुर्शिदाबाद के लोग शांति पसंद हैं और उनके उकसावे का समर्थन नहीं करते।”
टीएमसी ने इस दिन को सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए ‘संहति दिवस’ (एकता दिवस) के रूप में मनाया। पार्टी ने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कबीर अब पार्टी का हिस्सा नहीं हैं और उनकी हरकतें उनकी निजी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं का परिणाम हैं।
कड़ी सुरक्षा और हाई कोर्ट का दखल
मुर्शिदाबाद जिले में सांप्रदायिक संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। रेजिनागर और बेलडांगा में पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और केंद्रीय बलों की बड़ी टुकड़ियां तैनात की गई थीं। पूरा इलाका छावनी में तब्दील हो गया था।
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यह मामला कलकत्ता हाई कोर्ट भी पहुंचा था। कोर्ट ने कार्यक्रम को रोकने से इनकार कर दिया था, लेकिन राज्य सरकार को कानून-व्यवस्था बनाए रखने का सख्त निर्देश दिया था। कबीर ने दावा किया कि पुलिस और जिला प्रशासन ने उन्हें पूरा सहयोग दिया। उन्होंने कहा, “सब ठीक है… मुझे प्रशासन से पूरा सहयोग मिल रहा है। मैं उनका शुक्रिया अदा करता हूं।”
मुर्शिदाबाद का संवेदनशील इतिहास
मुर्शिदाबाद जिला, जहां 67% आबादी मुस्लिम है, सांप्रदायिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है। इसी साल अप्रैल में राम नवमी के दौरान यहां झड़पें हुई थीं और वक्फ बिल के विरोध प्रदर्शनों में भी हिंसा देखी गई थी। ऐसे में कबीर द्वारा बाबरी मस्जिद की नींव रखने का फैसला एक बार फिर तनाव को बढ़ा सकता है।
बीजेपी नेता दिलीप घोष ने कहा कि टीएमसी 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले कबीर को “फ्रीलांसर” के तौर पर इस्तेमाल करके सांप्रदायिक तनाव भड़का रही है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर बन चुका है, इसलिए अब बाबरी मस्जिद को भूलने का समय आ गया है।
कबीर का राजनीतिक सफर और भविष्य की योजनाएं
हुमायूं कबीर का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वह पहले कांग्रेस और बीजेपी में भी रह चुके हैं। हाल ही में उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा देने और अपनी खुद की राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा की थी। यह मस्जिद प्रोजेक्ट उनकी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत मानी जा रही है।
कबीर ने साफ कर दिया है कि वह पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा, “यह मुसलमानों का वादा है: बाबरी मस्जिद बनेगी, बनेगी, बनेगी।” अब देखना यह होगा कि इस घटना का पश्चिम बंगाल की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने पर क्या असर पड़ता है। क्या यह वास्तव में धार्मिक स्वतंत्रता का मामला है या फिर चुनावी फायदे के लिए खेला गया एक खतरनाक दांव?
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