संसद 2025 मानसून सत्र और प्रमुख मुद्दों पर बहस की तैयारी
संसद 2025 मानसून सत्र से पहले, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जोर दिया कि सरकार और विपक्ष दोनों को समन्वय करना होगा। यह समन्वय संसद के सुचारु कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र ऑपरेशन सिंदूर जैसे प्रमुख राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन यह सदन के “नियमों और परंपराओं” के अनुसार ही होगी।
- विभिन्न राजनीतिक दलों ने संसद में कई मुद्दों पर चर्चा में रुचि दिखाई।
- रिजिजू ने कहा कि सरकार खुले दिल से हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार है।
- सत्र के सुचारु संचालन के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच समन्वय जरूरी है।
रिजिजू ने यह भी दोहराया कि यदि विपक्ष ऑपरेशन सिंदूर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों का मुद्दा उठाता है, तो केंद्र इस पर “उचित प्रतिक्रिया” देगा।
ऑपरेशन सिंदूर के अनुभव और साझाकरण
ऑपरेशन सिंदूर के बाद विभिन्न देशों में गए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत प्रभावी रहा। रिजिजू ने कहा कि उन सभी मूल्यवान अनुभवों को राष्ट्र के साथ साझा किया जाना चाहिए, जो एक स्वागत योग्य सुझाव है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि सर्वदलीय बैठक रचनात्मक रही, जिसने वैचारिक मतभेदों के बावजूद सभी राजनीतिक दलों की साझा जिम्मेदारी पर जोर दिया।
- विभिन्न दलों के साथ सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों का आदान-प्रदान सफल रहा।
- इन अनुभवों को राष्ट्र के साथ साझा करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
- सरकार ने विपक्ष की बातों पर ध्यान दिया और सहयोग का आग्रह किया।
रिजिजू ने जोर दिया कि संसद को सुचारु रूप से चलाना सभी की जिम्मेदारी है।
न्यायमूर्ति वर्मा महाभियोग: एक संयुक्त पहल
रिजिजू ने जानकारी दी कि न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रक्रिया शुरू करने पर आम सहमति बन गई है। उन्होंने पुष्टि की कि उन्हें हटाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वाले सांसदों की संख्या पहले ही 100 को पार कर चुकी है। रिजिजू ने कहा कि यह प्रक्रिया सभी दलों द्वारा सामूहिक रूप से की जाएगी, यह केवल सरकार का कदम नहीं है।
- न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रक्रिया पर सहमति बनी है।
- प्रस्ताव पर 100 से अधिक सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं।
- यह प्रक्रिया सभी दलों की संयुक्त पहल होगी।
यह मानसून सत्र ऐसे समय में आ रहा है जब संसद का सत्र सोमवार से शुरू होने वाला है
विपक्ष के मुद्दे और सरकार का विधायी एजेंडा
विपक्ष पहलगाम आतंकी हमले, ऑपरेशन सिंदूर और विदेश नीति में “भटकाव” पर चर्चा की मांग कर रहा है। उन्होंने जोर दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इन बहसों का व्यक्तिगत रूप से जवाब देना चाहिए। कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर प्रधानमंत्री के बयान की मांग की।
- विपक्ष ने पहलगाम आतंकी हमले और विदेश नीति पर चर्चा मांगी है।
- बिहार में मतदाता सूची संशोधन भी विपक्ष का एक प्रमुख मुद्दा है।
- आप ने बिहार में मतदाता सूची के कथित “चुनावी घोटाले” को उठाया।
सरकार अपने विधायी एजेंडे को भी आगे बढ़ाने की योजना बना रही है
महत्वपूर्ण विधेयक और लंबित प्रस्ताव
संसद 2025 मानसून सत्र के दौरान सरकार के एजेंडे में कुछ नए विधेयक शामिल हैं। इनमें मणिपुर माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक 2025 और कराधान कानून (संशोधन) विधेयक 2025 प्रमुख हैं। इसके अलावा, जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक 2025 और भारतीय प्रबंधन संस्थान (संशोधन) विधेयक 2025 भी सूचीबद्ध हैं।
- मणिपुर जीएसटी (संशोधन) विधेयक 2025 पेश किया जाएगा।
- कराधान कानून (संशोधन) विधेयक 2025 पर चर्चा होगी।
- जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक 2025 भी शामिल है।
भू-विरासत स्थल और भू-अवशेष (संरक्षण और रखरखाव) विधेयक 2025 भी प्रस्तावित है।
अन्य विधायी प्राथमिकताएँ और अपेक्षित बहसें
सरकार खान और खान (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक 2025 को भी आगे बढ़ाएगी। राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक 2025 और राष्ट्रीय डोपिंग रोधी (संशोधन) विधेयक 2025 भी सदन में लाए जाएंगे। छोटे राजनीतिक दलों ने भी शिकायत की कि उन्हें बोलने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता है, जिस पर रिजिजू ने ध्यान देने का आश्वासन दिया।
- खान और खान (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक 2025 पर चर्चा होगी।
- राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक 2025 भी एजेंडे में है।
- छोटे दलों को पर्याप्त समय देने पर सहमति बनी है।
यह सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त तक चलेगा, जिसमें कुल 21 बैठकें होंगी।
प्रधानमंत्री की संसद में उपस्थिति: एक स्पष्टीकरण
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में सबसे ज़्यादा उपस्थिति दर्ज कराने वालों में से एक हैं। उन्होंने बताया कि जब तक वे किसी महत्वपूर्ण कार्यक्रम के लिए राज्य या विदेश में न हों, तब तक वे कार्यवाही में अवश्य शामिल होते हैं। रिजिजू ने प्रधानमंत्री की सदन में उपस्थिति को लेकर अनावश्यक विवाद पैदा करने के प्रयासों की आलोचना की।
- प्रधानमंत्री मोदी की संसद में उपस्थिति दर काफी उच्च है।
- उनकी अनुपस्थिति केवल आवश्यक आधिकारिक दौरों के कारण होती है।
- उनकी उपस्थिति पर विवाद खड़ा करना अनुचित है।
प्रश्नकाल के दौरान प्रधानमंत्री के मंत्रालय से संबंधित प्रश्नों के समय वे सदैव उपस्थित रहते हैं।
विपक्ष की दृढ़ता और उम्मीदें
राजद के सांसद मनोज कुमार झा ने कहा कि विपक्ष पहलगाम आतंकवादी हमले के लिए स्पष्टीकरण मांगेगा। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर पर व्यापक चर्चा की मांग की। झा ने कहा कि संसद का उद्देश्य जनता की चिंताओं का समाधान करना है। भाकपा ने भी पहलगाम हमले में “गंभीर सुरक्षा और खुफिया विफलता” की आलोचना की।
- विपक्ष पहलगाम आतंकवादी हमले पर स्पष्टीकरण मांगेगा।
- ऑपरेशन सिंदूर पर व्यापक चर्चा की मांग भी रखी गई है।
- भाकपा ने सुरक्षा विफलता पर चिंता व्यक्त की।
उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री “संसद के माध्यम से राष्ट्र के सामने अपनी सफाई पेश करें।”
सकारात्मक सहयोग की अपेक्षा
भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने आशा व्यक्त की कि विपक्ष रचनात्मक भूमिका निभाएगा और आठ विधेयकों सहित कई विधायी कार्य पूरे किए जाएंगे। भाजपा सांसद चंद्र प्रकाश जोशी ने भी बिना किसी व्यवधान के सुचारु संचालन सुनिश्चित करने का आह्वान किया, ताकि हर प्रतिनिधि को अपने निर्वाचन क्षेत्र की समस्याओं को उठाने का अवसर मिले।
- भाजपा सांसदों ने विपक्ष से रचनात्मक भूमिका की अपेक्षा की है।
- महत्वपूर्ण विधायी कार्य सत्र में पूरे होने हैं।
- संसद को बिना किसी व्यवधान के चलना चाहिए।
जद (यू) नेता के.सी. त्यागी ने भी संतुलित स्वर में कहा कि संसद सुचारु रूप से चलेगी।
संसद 2025 मानसून सत्र राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। लोकसभा चुनाव 2029 से पहले का यह संभवतः आखिरी पूर्ण मानसून सत्र होगा। ऐसे में यह देखा जाना बाकी है कि क्या यह सत्र देश को समाधान देगा या फिर एक और राजनीतिक टकराव का मंच बनेगा।



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