बिहार में मतदाता सूची विवाद ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। लगभग 66 लाख मतदाता 1 अगस्त, 2025 को जारी होने वाली मसौदा सूची में शामिल नहीं हो पाएंगे। भारतीय चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, यह संख्या चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के कारण है। राज्य में 7.89 करोड़ से अधिक मतदाता हैं।
शेष मतदाताओं के फॉर्म का डिजिटलीकरण 1 अगस्त तक पूरा होगा। बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की रिपोर्ट भी उसी दिन मिलेगी।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया 24 जून से शुरू हुई थी। इसका उद्देश्य मतदाता सूचियों का शुद्धिकरण करना है। इस अभ्यास में लगभग 22 लाख मृत मतदाताओं के नाम दर्ज किए गए।
यह अभियान बिहार से शुरू होकर पूरे देश में लागू होगा। चुनाव आयोग ने इसका दावा किया है।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने SIR को फाड़ दिया। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इसे “लोकतंत्र पर हमला” बताया। शुक्रवार, 25 जुलाई, 2025 को दिल्ली में विपक्ष ने प्रदर्शन किया।
तेजस्वी यादव ने चुनाव बहिष्कार पर चर्चा की संभावना जताई है। झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने इसे गंभीर संकट बताया।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने आलोचना का जवाब दिया। उन्होंने फर्जी वोट रोकने के लिए इसे आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि मृतक या डुप्लिकेट नामों को हटाना जरूरी है। चुनाव आयोग ने 20 जुलाई को दलों से सूची साझा की।
77,000 से अधिक बीएलओ और 1.6 लाख बूथ लेवल एजेंट इसमें लगे हैं।
इस विवादास्पद प्रक्रिया को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। इस पर 28 जुलाई को सुनवाई होनी है। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग एक राजनीतिक दल के लिए काम कर रहा है। तृणमूल कांग्रेस सांसद सागरिका घोष ने भी इसका विरोध किया।
बिहार में मतदाता सूची विवाद अब एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है।
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