UPSC Prelims परीक्षा 2026 देश भर में 5.49 लाख छात्र परीक्षा में शामिल,
UPSC Prelims परीक्षा 2026 संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने रविवार, 24 मई 2026 को देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा और भारतीय वन सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 2026 का देश भर में सफलतापूर्वक आयोजन किया।
परीक्षा के सुरक्षित और पारदर्शी संचालन को लेकर इस साल आयोग ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया। यूपीएससी के इतिहास में पहली बार, परीक्षा केंद्रों पर ‘मुन्नाभाइयों’ (फर्जी उम्मीदवारों) को रोकने और परीक्षा की शुचिता सुनिश्चित करने के लिए सभी उम्मीदवारों का ‘रियल-टाइम फेस ऑथेंटिकेशन’ (चेहरे की पहचान) कराया गया।
आयोग द्वारा जारी आधिकारिक और अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, इस साल सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के लिए कुल 8,19,732 उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से लगभग 5.49 लाख उम्मीदवार (करीब 67 प्रतिशत) परीक्षा में शामिल हुए। यह संख्या पिछले साल (2025) की तुलना में थोड़ी कम है, जहां 9.5 लाख आवेदकों में से 5.8 लाख (61 प्रतिशत) छात्रों ने परीक्षा दी थी।
चेयरमैन अजय कुमार ने तकनीकी सफलता को सराहा
यूपीएससी ने देश भर के 83 शहरों (परीक्षा केंद्रों) में स्थापित 2,072 परीक्षा स्थलों पर दो अनिवार्य सत्रों में परीक्षा आयोजित की। सुबह के सत्र (09:30 से 11:30 बजे) में जनरल स्टडीज (पेपर-I) और दोपहर के सत्र (02:30 से 04:30 बजे) में सिविल सर्विसेज एप्टीट्यूड टेस्ट (CSAT – पेपर-II) का आयोजन किया गया।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीज़न (NeGD) और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित ‘फेस ऑथेंटिकेशन प्रणाली’ सभी केंद्रों पर 100 प्रतिशत सफल रही।
यूपीएससी के चेयरमैन अजय कुमार ने इस बेहद जटिल ऑपरेशन के सुचारू निष्पादन पर गहरा संतोष व्यक्त करते हुए कहा, “यह शायद देश का अब तक का सबसे बड़ा रियल-टाइम फेस ऑथेंटिकेशन अभ्यास था। इस सफल तकनीक ने आयोग की विश्वसनीयता प्रक्रियाओं को एक नए मुकाम पर पहुंचा दिया है।” सुरक्षा के मद्देनजर सभी परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल सिग्नल जैमर भी लगाए गए थे।
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पेपर विश्लेषण: तीन कॉलम वाले नए प्रारूप और एथिक्स के प्रश्नों ने चौंकाया
इस साल का प्रश्न पत्र पिछले साल की तुलना में न केवल लंबा था, बल्कि इसके पैटर्न में भी बड़े बदलाव देखे गए। तमिलनाडु सरकार के अखिल भारतीय सिविल सेवा कोचिंग सेंटर के अतिरिक्त निदेशक टी. शंकर सरवनन के अनुसार, इस साल सामान्य अध्ययन (GS) का प्रश्न पत्र 51 पृष्ठों का था, जबकि पिछले साल यह केवल 40 पृष्ठों का था।
यूपीएससी ने इस बार प्रश्नों का एक बिल्कुल नया प्रारूप पेश किया, जिसमें उम्मीदवारों से 12 अलग-अलग तथ्यों के ‘तीन स्तंभों’ (Three Columns) का मिलान करने के लिए कहा गया था, जिसने छात्रों का काफी समय लिया। इसके अलावा, इस बार प्रारंभिक परीक्षा में ही नैतिकता (Ethics) पर आधारित व्यावहारिक प्रश्न शामिल किए गए थे।
जिन उम्मीदवारों ने मुख्य परीक्षा (Mains) के एथिक्स पेपर को ध्यान में रखकर तैयारी की थी, उन्हें इसमें काफी मदद मिली। समसामयिक घटनाओं (Current Affairs) का दबदबा इस बार भी रहा और 50% से अधिक प्रश्न इसी खंड से थे। विशेषज्ञों के मुताबिक, जिन छात्रों ने ‘इंडिया ईयर बुक’ और अखबारों का गहन अध्ययन किया था, वे बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रहे।
CSAT पेपर-II: रीजनिंग मुश्किल, क्वांटिटेटिव के सवाल लंबे
दोपहर के सत्र में हुए सिविल सर्विसेज एप्टीट्यूड टेस्ट (CSAT) ने छात्रों को काफी पसीना बहाया। दृष्टि IAS के CSAT विशेषज्ञ श्री अभिषेक करण के अनुसार, इस साल के पेपर ने छात्रों की विश्लेषणात्मक सोच और गणना की गति की कड़ी परीक्षा ली।
क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड: गणितीय खंड में नंबर सिस्टम, औसत, समय-गति-दूरी, अनुपात, HCF-LCM और डेटा पर्याप्तता (Data Sufficiency) से कई चरणों वाले (Multi-step) सवाल पूछे गए थे। ये सवाल काफी लंबे और अधिक गणना (Calculative) वाले थे, जिसके कारण छात्रों को समय की कमी महसूस हुई।
लॉजिकल रीजनिंग: रीजनिंग सेक्शन में करीब 24 सवाल पूछे गए थे, जो वैचारिक रूप से काफी जटिल और बहुपरतीय (Multi-layered) थे। इन्हें हल करने से पहले गहरा दिमाग लगाना पड़ रहा था।रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन: अच्छी तैयारी करने वाले छात्रों के लिए रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन (RC) सबसे स्कोरिंग रहा।
हालांकि पैसेज लंबे थे, लेकिन शासन, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण जैसे गंभीर विषयों पर आधारित थे, जिसमें सीधे तथ्यों के बजाय छात्र के कूटनीतिक अनुमान और विश्लेषणात्मक समझ को परखा गया।
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दिल्ली में सबसे ज्यादा भीड़, कारगिल में सबसे कम; कट-ऑफ गिरने की उम्मीद
आयोग के अनुसार, भौगोलिक दृष्टि से परीक्षा केंद्रों में आवेदकों की संख्या में भारी असमानता देखी गई। दिल्ली हमेशा की तरह सबसे बड़ा केंद्र रहा, जहां 144 केंद्रों पर 70,885 उम्मीदवार परीक्षा में बैठे। इसके बाद हैदराबाद में 44,209 और पटना में 39,147 छात्र शामिल हुए।
इसके विपरीत, कारगिल में सबसे कम केवल 98 उम्मीदवार एक केंद्र पर परीक्षा में शामिल हुए, जबकि लेह में 308 और पोर्ट ब्लेयर में 270 छात्र उपस्थित रहे। भीड़भाड़ कम करने के लिए इस साल भुवनेश्वर, कानपुर और मेरठ के रूप में तीन नए शहर जोड़े गए थे।
प्रश्न पत्र के कठिन और लंबे प्रारूप को देखते हुए विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस साल प्रारंभिक परीक्षा का कट-ऑफ काफी कम रह सकता है। सरवनन के अनुसार, जहां पिछले साल (2025) सामान्य श्रेणी का कट-ऑफ 92.6 था, वहीं इस साल यह घटकर 75 से 85 अंकों के दायरे में रहने की उम्मीद है, जो कि वर्ष 2023 के सबसे कठिन पेपर के दौर जैसा ही है।
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पहली बार परीक्षा के तुरंत बाद जारी होगी प्रोविजनल आंसर-की
पारदर्शिता को और बढ़ावा देते हुए यूपीएससी ने घोषणा की है कि वह अपने इतिहास में पहली बार परीक्षा समाप्त होने के तुरंत बाद ‘प्रोविज़नल आंसर-की’ (अस्थायी उत्तर कुंजी) जारी करेगा। आयोग द्वारा आधिकारिक वेबसाइट पर उत्तर कुंजी प्रकाशित करने के बाद उम्मीदवार परीक्षा की तारीख से सातवें दिन यानी 31 मई 2026 की शाम 6:00 बजे तक ऑनलाइन माध्यम से अपनी आपत्तियां (Representations) दर्ज करा सकेंगे।
प्राप्त आपत्तियों और सहायक दस्तावेजों की विषय विशेषज्ञों द्वारा सावधानीपूर्वक जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, आयोग के स्थापित नियमों के मुताबिक, फाइनल आंसर-की सिविल सेवा परीक्षा-2026 के अंतिम परिणाम (Final Result) की घोषणा के बाद ही सार्वजनिक की जाएगी। UPSC Prelims परीक्षा 2026, रणनीति में करें ये बदलाव तभी क्लियर होगी UPSC Prelims परीक्षा 2026
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