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ट्विशा शर्मा मौत मामला सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, CBI को सौंपी गई जांच

ट्विशा शर्मा मौत मामला

ट्विशा शर्मा मौत मामला देश की न्यायिक शुचिता और वीआईपी आरोपियों के कारण जांच प्रभावित होने के कथित ‘नैरेटिव’ (विमर्श) को लेकर भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक कदम उठाया है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रहने वाली 33 वर्षीय पूर्व मॉडल व अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की उनके ससुराल में हुई अप्राकृतिक मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए पूरी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया है।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ—जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली शामिल हैं—ने सोमवार, 25 मई 2026 को इस हाई-प्रोफाइल मामले की तत्काल सुनवाई की।

शीर्ष अदालत ने साफ किया कि मामले की संवेदनशीलता और समाज में गढ़े जा रहे ‘संस्थागत पूर्वाग्रह’ के नैरेटिव को देखते हुए एक स्वतंत्र और केंद्रीय एजेंसी द्वारा जांच कराना बेहद आवश्यक हो गया था।

दूसरी तरफ, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इस मामले की मुख्य आरोपी और मृतका की सास, सेवानिवृत्त जिला जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द करने की याचिकाओं पर होने वाली सुनवाई को आगामी 27 मई तक के लिए टाल दिया है।

क्या है मामला? विवाह के महज 5 महीने बाद मौत

गौरतलब है कि यह दर्दनाक और विवादित मामला 12 मई 2026 को सामने आया था, जब भोपाल के कटारा हिल्स स्थित आलीशान ससुराल में 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा का शव फंदे से लटका हुआ पाया गया था। ट्विशा की शादी महज पांच महीने पहले भोपाल के एक रसूखदार कानूनी परिवार में रहने वाले प्रैक्टिसिंग वकील समर्थ सिंह से हुई थी। समर्थ सिंह की मां गिरिबाला सिंह मध्य प्रदेश न्यायपालिका में एक पूर्व जिला जज के रूप में सेवानिवृत्त हुई हैं।

ट्विशा के मायके वालों ने आरोप लगाया है कि शादी के बाद से ही उनके पति समर्थ और सास गिरिबाला सिंह द्वारा लगातार भारी दहेज की मांग की जा रही थी और मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। परिवार का आरोप है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या है।

हालांकि, ससुराल पक्ष ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया था कि ट्विशा गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और नशे की लत से जूझ रही थीं, जिसके कारण उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने की धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज की है।

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न्यायपालिका पर उठती उंगलियों से आहत सुप्रीम कोर्ट; स्वतः संज्ञान का शीर्षक

यह मामला तब राष्ट्रीय सुर्खियों में आया जब मीडिया और सोशल मीडिया पर यह विमर्श तेजी से फैलने लगा कि आरोपी पति के वकील और सास के पूर्व जज होने के कारण मध्य प्रदेश पुलिस और स्थानीय न्यायपालिका आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रही है। भोपाल की एक सत्र अदालत (Session Court) द्वारा पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह को दी गई अग्रिम जमानत ने इस संदेह को और हवा दे दी थी।

इन मीडिया रिपोर्टों को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार, 23 मई की देर रात इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया। अदालत ने इस मामले को ऐतिहासिक शीर्षक दिया: “In Re: Alleged Institutional Bias and Procedural Discrepancies in the Unnatural Death of Young Woman at Matrimonial Home” (विवाह के घर में एक युवती की अप्राकृतिक मौत के मामले में कथित संस्थागत पक्षपात और प्रक्रियागत विसंगतियां)

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बेहद गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा, “हमें राज्य की पुलिस और हमारी न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है, लेकिन समाज में एक खतरनाक कहानी (Narrative) गढ़ी जा रही है कि न्यायपालिका अपनों को बचा रही है। हम इस गढ़े जा रहे नैरेटिव के सख्त खिलाफ हैं। जनता का कानून पर भरोसा बना रहे, इसीलिए सीबीआई को इस मामले की जांच तुरंत अपने हाथ में लेनी चाहिए।”

मीडिया को सुप्रीम कोर्ट की नसीहत: “दुख को साउंड बाइट्स में न बदलें”

जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मीडिया ट्रायल और दोनों परिवारों द्वारा टीवी चैनलों पर की जा रही बयानबाजी पर गहरी चिंता व्यक्त की। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि आरोपी सास गिरिबाला सिंह लगातार टीवी चैनलों पर आकर मृतका की छवि खराब करने वाले बेबुनियाद बयान दे रही थीं, जिससे मीडिया का हस्तक्षेप बहुत बढ़ गया था।

वहीं, आरोपियों के वकील सिद्धार्थ दवे ने आपत्ति जताई कि पुलिस कस्टडी में सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए गोपनीय बयान भी अखबारों में लीक कर दिए गए।

इस पर सर्वोच्च न्यायालय ने मीडिया और दोनों पक्षों को कड़ी हिदायत जारी की। अदालत ने कहा, “हम अपने मीडिया मित्रों से पुरजोर अनुरोध करते हैं कि वे पीड़िता के परिवार के दुख को केवल टीआरपी और ‘साउंड बाइट्स’ तक सीमित न करें। जांच को पूरी तरह कानून के मुताबिक चलने दें।

मीडिया को ऐसे किसी भी व्यक्ति का इंटरव्यू या बयान रिकॉर्ड करने से बचना चाहिए जो इस मामले में संभावित गवाह हो सकता है, क्योंकि इससे अंतिम कानूनी नतीजों पर बुरा असर पड़ता है।” अदालत ने जनता से भी सोशल मीडिया पर अटकलें लगाने से बचने की अपील की।

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सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का मार्मिक संदेश; एम्स में हुआ दोबारा पोस्टमार्टम

अदालत में मध्य प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वस्त किया कि कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) आज ही अधिसूचना जारी कर देगा ताकि सीबीआई एक दिन के भीतर औपचारिक रूप से जांच शुरू कर सके।

बहस के दौरान तुषार मेहता ने देश के सभी माता-पिता के लिए एक बेहद मार्मिक और कड़ा संदेश साझा किया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण मामला देश के सभी माता-पिता के लिए एक बड़ा सबक है।

किसी भी बेटी के माता-पिता के लिए यह कहीं ज्यादा बेहतर और सुरक्षित है कि उनकी बेटी तलाकशुदा (Divorced) होकर सम्मान के साथ उनके घर लौट आए, बजाय इसके कि वह ऐसे ससुराल में रहकर अपनी जान गंवा दे।

सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को यह भी सूचित किया कि हाई कोर्ट के पहले के निर्देशों के तहत, जांच की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए रविवार को एम्स (AIIMS) भोपाल के डॉक्टरों की एक विशेष टीम द्वारा मृतका ट्विशा शर्मा के शव का दोबारा पोस्टमार्टम (Second Postmortem) कराया गया है, जिसकी रिपोर्ट सीधे जांच एजेंसी को सौंपी जाएगी।

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संपादकीय दृष्टिकोण:

ट्विशा शर्मा की अप्राकृतिक मौत का यह मामला केवल दो परिवारों की कानूनी लड़ाई नहीं है, बल्कि यह इस बात की परीक्षा है कि क्या भारत का कानून रसूखदार पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ भी उतनी ही निष्पक्षता से काम करता है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘संस्थागत पूर्वाग्रह’ के आरोपों पर स्वतः संज्ञान लेना यह दर्शाता है कि न्यायपालिका अपनी आंतरिक शुचिता को लेकर कितनी सजग है।

जब आरोपी खुद कानून की बारीकियों के ज्ञाता हों, तो आम जनता के मन में निष्पक्ष न्याय को लेकर संदेह पैदा होना स्वाभाविक है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का यह कहना कि ‘लाश से बेहतर तलाकशुदा बेटी है’, भारतीय समाज में पैर पसार चुकी दहेज की कुप्रथा और सामाजिक लोकलाज के डर पर एक करारा तमाचा है।

अब जब देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी सीबीआई ने इस केस की बागडोर संभाल ली है, तो उम्मीद की जानी चाहिए कि बिना किसी प्रभाव और नैरेटिव के, सच जल्द ही सामने आएगा और पीड़िता को सच्चा न्याय मिलेगा। ट्विशा शर्मा मौत मामला, नए सबूतों और गवाहों को लेकर ट्विशा शर्मा मौत मामला पर बड़ी खबर

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