नया आयकर कानून 2025: सरलीकरण और सुधार की नई उम्मीद
नया आयकर कानून 2025, भारत की छह दशक पुरानी कर व्यवस्था को बदलने के लिए तैयार है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में संशोधित आयकर विधेयक को मंज़ूरी दी है। इसे सोमवार को लोकसभा में पेश किया जाएगा ताकि इसे पारित कर कानून का रूप दिया जा सके।
- यह विधेयक मौजूदा आयकर अधिनियम, 1961 की जगह लेगा।
- इसमें संसदीय समिति की अधिकांश सिफ़ारिशें शामिल की गई हैं।
- सरकार का उद्देश्य करदाताओं के लिए कानून को अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाना है।
इस कदम से करदाताओं और पेशेवरों के लिए कर प्रक्रियाओं को काफी सरल बनाने की उम्मीद है।
पुराना विधेयक क्यों वापस लिया गया?
सरकार ने इस साल फरवरी में पेश किए गए पुराने आयकर विधेयक को वापस ले लिया है। इस निर्णय का मुख्य कारण विभिन्न संस्करणों से उत्पन्न होने वाले भ्रम को रोकना था। सरकार ने एक समेकित और स्पष्ट मसौदा प्रस्तुत करने का विकल्प चुना है।
- बैजयंत पांडा की अध्यक्षता वाली प्रवर समिति ने मसौदे की समीक्षा की।
- समिति ने विधेयक में 285 सुझाव और 32 बड़े बदलावों की सिफ़ारिश की थी।
- नए विधेयक में समिति की लगभग सभी सिफ़ारिशों को स्वीकार किया गया है।
पुराने प्रावधानों को हटाकर और सीधी भाषा का उपयोग करके, नया आयकर कानून 2025 करदाताओं के लिए एक साफ और आधुनिक शुरुआत करेगा।
क्या हैं समिति की प्रमुख सिफ़ारिशें?
संसदीय समिति ने 4,575 पृष्ठों की एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इस रिपोर्ट में व्यक्तिगत और कॉर्पोरेट दोनों करदाताओं के लिए महत्वपूर्ण बदलाव सुझाए गए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य अनुपालन बोझ को कम करना है।
- व्यक्तिगत करदाताओं के लिए देर से रिटर्न दाखिल करने पर भी रिफंड मिलेगा।
- ‘लाभार्थी स्वामी‘ की परिभाषा में बदलाव किया गया है, जिससे लाभ मिलेगा।
- नगरपालिका करों को घटाकर 30% की मानक कटौती का प्रस्ताव किया गया है।
नए विधेयक में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) की परिभाषा पर भी स्पष्टता प्रदान की गई है।
कॉर्पोरेट और गैर-लाभकारी संस्थाओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
विधेयक में कॉर्पोरेट और धर्मार्थ ट्रस्टों के लिए भी कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। नए प्रावधानों का उद्देश्य इन क्षेत्रों में पारदर्शिता और स्पष्टता लाना है। इससे कानूनी विवादों को कम करने में मदद मिलेगी।
- अंतर-कॉर्पोरेट लाभांश के लिए कटौती को बहाल करने की सिफ़ारिश है।
- गैर-लाभकारी संस्थाओं के लिए भी स्पष्ट प्रावधानों की मांग की गई है।
- गुमनाम दान से धार्मिक-सह-धर्मार्थ ट्रस्टों की कर छूट प्रभावित नहीं होगी।
यह नया आयकर कानून 2025 कॉर्पोरेट और धर्मार्थ क्षेत्रों में कराधान की व्याख्या को सरल बनाने में मदद करेगा।
अन्य महत्वपूर्ण बदलाव और अपेक्षाएं
संशोधित विधेयक में कई अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं को भी शामिल किया गया है। इन बदलावों का लक्ष्य करदाताओं को अधिक सुविधा प्रदान करना है। विधेयक को मुकदमे-प्रतिरोधी बनाने पर भी जोर दिया गया है।
- करदाता शून्य टीडीएस प्रमाणपत्र के लिए आवेदन कर सकेंगे।
- विधेयक में कर दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
- पुराने आयकर अधिनियम, 1961 के शेष संदर्भों को हटाने का आह्वान किया गया है।
यह नया आयकर कानून 2025 कराधान को सरल और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
अगले कदम क्या हैं?
अब संशोधित आयकर विधेयक को सोमवार को लोकसभा में पेश किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि यह विधेयक संसद में आसानी से पारित हो जाएगा। इसके बाद यह कानून का रूप लेगा और भारत की कर प्रणाली में एक नए अध्याय की शुरुआत करेगा।
- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को पुराना विधेयक वापस लिया।
- नया विधेयक लोकसभा में विचार-विमर्श के लिए पेश किया जाएगा।
- इससे पहले मिंट ने कैबिनेट की बैठक की जानकारी दी थी।
सरकार का लक्ष्य पुराने कानून के बजाय एक आधुनिक और स्पष्ट कर व्यवस्था स्थापित करना है।



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