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भारत फिजी संबंध: रक्षा और समुद्री सहयोग में नई साझेदारी का आगाज

भारत फिजी संबंध

भारत फिजी संबंध नए दौर में पहुँच गए हैं। फिजी प्रधानमंत्री सिटिवेनी राबुका की भारत यात्रा ने इस साझेदारी को नई दिशा दी। इस यात्रा में 9 समझौते और 17 नई पहलों की घोषणा हुई। यह कदम भारत के लिए प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक ताकत बढ़ाने का स्पष्ट संकेत है।

रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग का विस्तार

भारत और फिजी ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग मजबूत करने के लिए कार्य योजना बनाई। इसके तहत भारत, फिजी को उसके विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की सुरक्षा हेतु प्रशिक्षण और उपकरण देगा।

  • भारत ने सुवा स्थित उच्चायोग में रक्षा अताशे की तैनाती का फैसला किया।
  • यह निर्णय प्रशांत द्वीपों में चीन की बढ़ती मौजूदगी का संतुलन माना जा रहा है।
  • दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण में भी सहयोग पर सहमति जताई।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत, फिजी को प्रशांत द्वीपों में सहयोग का केंद्र मानता है।

विकास और सांस्कृतिक सहयोग की नई शुरुआत

फिजी में भारत एक सुपर-स्पेशलिटी अस्पताल बनाएगा, जो पूरे प्रशांत क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करेगा। साथ ही दवाओं की आपूर्ति, मानक सहयोग और त्वरित परियोजनाओं के लिए अनुदान भी मिलेगा।

  • मोदी ने ‘गिरमिट स्मृति दिवस’ के लिए राबुका को धन्यवाद दिया।
  • 19वीं शताब्दी में 60,000 भारतीय मजदूर फिजी भेजे गए थे।
  • आज भी फिजी की 37% आबादी भारतीय मूल की है।

इसके अलावा:

  • फिजी क्रिकेटरों को भारत में प्रशिक्षण मिलेगा।
  • हिंदी और संस्कृत शिक्षकों की फिजी में तैनाती होगी।
  • भारतीय घी की फिजी बाजारों में पहुँच सुनिश्चित की जाएगी।

आतंकवाद और वैश्विक दृष्टिकोण पर एकजुटता

संयुक्त बयान में दोनों देशों ने पहलगाम आतंकवादी हमले की निंदा की।

  • आतंकवाद पर शून्य सहिष्णुता नीति पर सहमति जताई।
  • कट्टरपंथ, आतंकवादी वित्तपोषण और संगठित अपराध से मिलकर लड़ने का संकल्प लिया।

फिजी ने UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता और 2028-29 की अस्थायी सदस्यता का समर्थन किया। यह वैश्विक दक्षिण में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को स्वीकार करने का संकेत है।

ऐतिहासिक और रणनीतिक महत्व

भारत-फिजी संबंध का यह नया चरण केवल द्विपक्षीय हितों तक सीमित नहीं है। यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।

इतिहास में देखें तो—

  • शीत युद्ध के बाद भारत ने प्रशांत क्षेत्र में सक्रियता बढ़ाई।
  • 2014 में प्रधानमंत्री मोदी की फिजी यात्रा ने रिश्तों को पुनर्जीवित किया।
  • अब राबुका की भारत यात्रा ने इसे और मजबूत कर दिया।

भारत फिजी संबंध नए दौर में हैं, जहाँ रक्षा, विकास और संस्कृति तीनों मोर्चों पर गहराई बढ़ रही है। यह सहयोग न केवल दोनों देशों की आकांक्षाओं को पूरा करेगा, बल्कि हिंद-प्रशांत में भारत की रणनीतिक स्थिति को भी मजबूत करेगा।

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