साइबर सुरक्षा जम्मू-कश्मीर: सरकार का ऐतिहासिक फैसला
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने साइबर सुरक्षा जम्मू-कश्मीर को नया आयाम देने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। 25 अगस्त 2025 से लागू आदेश में सभी सरकारी विभागों में USB/पेन ड्राइव और व्हाट्सएप जैसे पब्लिक मैसेजिंग ऐप्स पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह निर्णय गृह मंत्रालय (MHA) और CERT-In के निर्देशों के अनुसार लिया गया है।
आयुक्त/सचिव एम. राजू (IAS) द्वारा जारी परिपत्र में कहा गया है कि संवेदनशील और गोपनीय डेटा अब केवल अनुमोदित सुरक्षित चैनलों के माध्यम से ही साझा होगा।
डिजिटल सुरक्षा का सख्त ऑडिट
केंद्र शासित प्रदेश को हाल ही में हुए साइबर हमलों के बाद अपनी डिजिटल सेवाओं की सुरक्षा को लेकर चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
- जम्मू-कश्मीर की 239 सरकारी वेबसाइटों में से 99 सुरक्षा ऑडिट न होने पर निष्क्रिय कर दी गईं।
- 21 मई 2025 को प्रशासन ने उन वेबसाइटों को बंद करने का आदेश दिया जो भारत सरकार के दिशानिर्देशों का पालन नहीं कर रही थीं।
- निजी डोमेन पर संचालित साइटों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया गया।
यह कदम खासतौर पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद बढ़े साइबर हमलों के मद्देनजर उठाया गया।
मुख्य सचिव की पहल से राहत
मुख्य सचिव अटल डुल्लू की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में साइबर सुरक्षा कार्ययोजना की समीक्षा की गई।
- CERT-In और OWASP मानकों पर ऑडिट के बाद 140 वेबसाइटें बहाल की गईं।
- सभी बहाल साइटों को वेब एप्लिकेशन फ़ायरवॉल (WAF) से सुरक्षित किया गया।
- लगभग 100 वेबसाइटें अब भी बंद हैं, जिससे जनता की सेवाओं में बाधा आ रही है।
इस स्थिति ने सरकार को साइबर सुरक्षा जम्मू-कश्मीर को और मजबूत करने पर मजबूर किया।
पेन ड्राइव और व्हाट्सएप पर सख्त रोक
आदेश में कहा गया है कि डेटा उल्लंघन, मैलवेयर संक्रमण और अनधिकृत पहुंच रोकने के लिए पेन ड्राइव और व्हाट्सएप का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
- यह प्रतिबंध जम्मू और श्रीनगर सचिवालयों के साथ-साथ सभी जिला उपायुक्त कार्यालयों पर लागू होगा।
- असाधारण मामलों में, पेन ड्राइव उपयोग की अनुमति NIC और राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी (SIO) से लिखित मंजूरी के बाद ही मिलेगी।
- मंजूर पेन ड्राइव को पुनः कॉन्फ़िगरेशन और स्वामित्व पंजीकरण के लिए NIC सेल में जमा करना अनिवार्य होगा।
GovDrive: सुरक्षित विकल्प
सरकार ने विभागों को GovDrive (https://govdrive.gov.in) का उपयोग करने का निर्देश दिया है।
- यह एक क्लाउड-आधारित मल्टी-टेनेंट प्लेटफॉर्म है।
- हर सरकारी अधिकारी को 50 GB सुरक्षित स्टोरेज उपलब्ध कराता है।
- यह डेटा संप्रभुता बनाए रखने के साथ केंद्रीकृत पहुंच और सिंक्रोनाइज़ेशन सुनिश्चित करता है।
यह कदम स्पष्ट करता है कि साइबर सुरक्षा जम्मू-कश्मीर सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
सख्त दिशानिर्देश और चेतावनी
नए आदेश में यह भी कहा गया है कि –
- व्हाट्सएप या iLovePDF जैसी असुरक्षित सेवाओं से आधिकारिक दस्तावेज़ साझा करना प्रतिबंधित है।
- ICT आर्किटेक्चर, IP एड्रेसिंग योजनाएं और तकनीकी रणनीतियाँ केवल CERT-In अनुमोदित चैनलों पर ही साझा होंगी।
- नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक और कानूनी विश्लेषण
भारत में सरकारी डेटा की सुरक्षा लंबे समय से एक चुनौती रही है। 2016 में भारतीय बैंकों पर हुए बड़े साइबर हमले और 2020 में चीन से जुड़े हमलों ने यह साबित किया कि डेटा सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधा जुड़ा मुद्दा है।
जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में यह फैसला और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि USB और पब्लिक ऐप्स पर प्रतिबंध से डेटा लीक और हैकिंग की घटनाएं काफी हद तक कम होंगी।
जम्मू-कश्मीर प्रशासन का यह कदम डिजिटल गवर्नेंस को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। इससे न केवल सरकारी सूचनाएं सुरक्षित रहेंगी बल्कि जनता की सेवाओं पर भरोसा भी मजबूत होगा।



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