मध्य प्रदेश के महू स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में आयोजित रण संवाद सेमिनार के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों के भीतर गहरा थिएटर कमांड मतभेद भारत के सामने आया। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने अपने समापन भाषण में सेनाओं के बीच संयुक्तता पर प्रगति को रेखांकित किया। उन्होंने माना कि विशेषज्ञों और पूर्व सैनिकों में एकीकरण की सहमति तो रही, लेकिन थिएटर कमांड की प्रक्रिया पर अलग-अलग राय भी उभरी।
सीडीएस चौहान ने असहमति को सकारात्मक बताते हुए कहा कि “यह चर्चा दर्शाती है कि हम राष्ट्रहित में ठोस निर्णय की ओर बढ़ रहे हैं। असहमति होने पर भी हम उसे सुलझा लेंगे।”
सेमिनार के भीतर सबसे प्रमुख मतभेद नौसेना और वायुसेना के बीच दिखा। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने थिएटर कमांड को “अंतिम लक्ष्य” बताते हुए इसकी वकालत की। उन्होंने साझा युद्धक्षेत्र परिदृश्य और एकीकृत संचालन को समय की जरूरत बताया।
दूसरी ओर, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने जल्दबाजी में बड़े ढांचे लागू करने से आगाह किया। उन्होंने दिल्ली में एक संयुक्त योजना एवं समन्वय केंद्र बनाने का सुझाव दिया, जिसमें सीडीएस और तीनों सेनाओं के प्रमुख शामिल हों।
वायुसेना प्रमुख ने ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए कहा कि संघर्ष के दौरान तीनों सेनाओं ने बिना किसी बड़े ढांचे में बदलाव के तालमेल से काम किया। इस ऑपरेशन ने दिखाया कि वायु शक्ति की प्रधानता कैसे प्रभावी साबित हुई।
उन्होंने यह भी कहा कि “सीडीएस चौहान ने समन्वय सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और छोटी-मोटी समस्याएं तुरंत सुलझाईं।”
एयर चीफ मार्शल सिंह ने स्पष्ट किया कि भारत को अमेरिका या किसी अन्य देश की तरह थिएटर कमांड नहीं अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि “भारत को अपनी भौगोलिक और सामरिक जरूरतों के अनुसार रास्ता तय करना होगा।” यह बयान थिएटर कमांड मतभेद भारत के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण माना गया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेमिनार के दूसरे दिन कहा कि थिएटर कमांड का उद्देश्य भारत की सुरक्षा संरचना में व्यापक बदलाव लाना है। प्रस्तावित मॉडल के तहत पाकिस्तान और चीन के खिलाफ दो थल एवं एक समुद्री थिएटर कमांड बनाए जाने की संभावना है।
हालांकि अंतिम रूपरेखा तय नहीं है, पर रक्षा मंत्रालय ने साफ किया कि निर्णय केवल राष्ट्रहित को ध्यान में रखकर होगा। सीडीएस चौहान ने भी भरोसा दिलाया कि सेनाओं की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए सही समाधान निकलेगा।
महू के रण संवाद से यह साफ हुआ कि भारतीय सशस्त्र बल एकीकृत संरचना की आवश्यकता तो मानते हैं, लेकिन उसके स्वरूप और गति पर असहमति बनी हुई है। थिएटर कमांड मतभेद भारत जैसे अहम विषय पर खुली चर्चा इस प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाती है। आने वाले समय में सरकार और सेनाओं के बीच सहमति से ऐसा ढांचा तैयार होगा, जो भारत की सामरिक जरूरतों को सर्वोत्तम तरीके से पूरा कर सके।
Post Comment