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अमेरिकी टैरिफ का भारत पर प्रभाव औरअसर: वित्त मंत्रालय की चेतावनी

अमेरिकी टैरिफ भारत प्रभाव

वित्त मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी टैरिफ भारत प्रभाव अभी सीमित दिख रहा है, लेकिन आगे विकास में रुकावट डाल सकता है। मासिक आर्थिक समीक्षा में कहा गया कि मौजूदा सुधारों का मक़सद अर्थव्यवस्था को लचीला बनाना और व्यापारिक व्यवधानों को कम करना है।

टैरिफ़ और वैश्विक व्यापार की चिंता

समीक्षा में बताया गया कि अमेरिकी टैरिफ़, भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला बाधाएँ मिलकर वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर रही हैं।

  • WTO का अनुमान: 2025 में वस्तु व्यापार केवल 0.9% बढ़ेगा।
  • पहले का अनुमान 2.7% था, जिसे अमेरिकी टैरिफ़ ने घटा दिया।
  • 2026 तक नकारात्मक असर और गहरा हो सकता है।

समीक्षा ने माना कि सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर व्यवधान कम कर सकते हैं, बशर्ते आर्थिक संकट का सामना मज़बूत खिलाड़ियों द्वारा किया जाए।

सरकार की प्रतिक्रिया और सुधार

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर जीएसटी सुधारों की घोषणा की।
  • जरूरी वस्तुओं पर कर बोझ कम करने से उपभोग में वृद्धि होगी।
  • एसएंडपी ने भारत की सॉवरेन रेटिंग को ‘BBB’ में अपग्रेड किया।
  • इससे विदेशी पूंजी प्रवाह और निवेश माहौल मज़बूत होगा।

उद्योग जगत की राय

एसोचैम अध्यक्ष संजय नायर ने कहा कि भारतीय उद्योग दबाव में भी टिकता है।

  • कपड़ा, रत्न, आभूषण और कृषि क्षेत्र में अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और आसियान देशों में निर्यात बढ़ाया जा रहा है।
  • पूर्व जी-20 शेरपा अमिताभ कांत ने कहा कि यह सुधारों का अवसर है।
  • उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी आरोपों में “रूसी तेल” मुख्य कारण नहीं है।

अमेरिका का दृष्टिकोण

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि भारत-अमेरिका रिश्ते “जटिल” हैं।

  • उनका मानना है कि अधिशेष वाले देशों को अधिक चिंता करनी चाहिए।
  • उन्होंने स्वीकारा कि भारत के साथ व्यापार समझौता अभी तक प्राथमिकता नहीं बन पाया है।
  • अमेरिकी डॉलर की मज़बूती के बीच रुपये का आरक्षित मुद्रा बनना चिंता का विषय नहीं है।

भविष्य की राह

सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत-अमेरिका के बीच संवाद जारी है और यह चरण अस्थायी है।
अमेरिकी टैरिफ भारत प्रभाव को देखते हुए दोनों देशों को साझा मंच पर बातचीत करनी होगी ताकि व्यापार विवाद जल्द समाप्त हो सके।

वित्त मंत्रालय का संदेश साफ है — टैरिफ़ तात्कालिक रूप से सीमित असर डालते हैं, लेकिन विलंबित प्रभाव विकास पर भारी पड़ सकते हैं। सरकार ने सुधारों और वैश्विक साझेदारी पर ज़ोर दिया है। उद्योग जगत ने भरोसा जताया है कि भारत नए बाज़ारों में विस्तार करेगा और प्रतिस्पर्धा के बीच और मज़बूत होकर उभरेगा।

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