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“सुप्रीम कोर्ट न्यायिक नियुक्ति विवाद गहराया: न्यायमूर्ति पंचोली पर सवाल”

न्यायिक नियुक्ति विवाद गहराया

न्यायिक नियुक्ति विवाद गहराया भारत के न्यायिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ा जब राष्ट्रपति ने पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश विपुल मनुभाई पंचोली और बॉम्बे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश आलोक अराधे को सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत किया। इन नियुक्तियों के बाद सुप्रीम कोर्ट अब 34 न्यायाधीशों की अपनी पूरी क्षमता के साथ कार्य करेगा।

कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि यह नियुक्तियाँ संविधान प्रदत्त शक्तियों और भारत के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से की गई हैं।

न्यायिक नियुक्ति विवाद गहराया

इन नियुक्तियों में सबसे अधिक विवाद न्यायमूर्ति पंचोली को लेकर है। कॉलेजियम की सदस्य और सुप्रीम कोर्ट की एकमात्र महिला न्यायाधीश, न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना ने उनके नाम का कड़ा विरोध किया था। उनका कहना था कि न्यायमूर्ति पंचोली से वरिष्ठ और योग्य कई न्यायाधीशों को दरकिनार कर दिया गया।

  • उन्होंने चेतावनी दी कि इससे कॉलेजियम प्रणाली की विश्वसनीयता समाप्त हो सकती है।
  • न्यायमूर्ति पंचोली अखिल भारतीय वरिष्ठता सूची में 57वें स्थान पर हैं।
  • CJAR जैसे न्यायिक सुधार संगठनों ने भी इसे अन्यायपूर्ण बताया।

वरिष्ठता और पारदर्शिता पर सवाल

न्यायमूर्ति नागरत्ना का असहमति नोट यह दर्शाता है कि न्यायिक नियुक्ति विवाद गहराया है और पारदर्शिता का प्रश्न फिर उठ खड़ा हुआ है। कार्यपालिका पहले से ही कॉलेजियम प्रणाली पर हमलावर रही है, और अब अंदरूनी मतभेदों ने इस व्यवस्था को और कमजोर कर दिया है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की नियुक्तियाँ भविष्य में मुख्य न्यायाधीश के चयन पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालेंगी।

न्यायमूर्ति पंचोली का करियर

  • जन्म: 28 मई 1968
  • वकालत की शुरुआत: 1991 (गुजरात उच्च न्यायालय)
  • 2014: अतिरिक्त न्यायाधीश
  • 2016: स्थायी न्यायाधीश
  • 2023: पटना उच्च न्यायालय स्थानांतरण
  • 2025: मुख्य न्यायाधीश बने

यदि सब कुछ सामान्य रहा तो वे 2031 में भारत के मुख्य न्यायाधीश बन सकते हैं।

न्यायमूर्ति आलोक अराधे की यात्रा

  • जन्म: अप्रैल 1964
  • 2009: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में अतिरिक्त न्यायाधीश
  • 2011: स्थायी न्यायाधीश
  • विभिन्न कार्यकाल: जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, तेलंगाना, बॉम्बे
  • जनवरी 2025: बॉम्बे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश

भविष्य की दिशा और चुनौतियाँ

इन दोनों नियुक्तियों से सुप्रीम कोर्ट की ताकत तो पूरी हुई, लेकिन न्यायिक नियुक्ति विवाद गहराया है। यह सवाल बना रहेगा कि क्या कॉलेजियम प्रणाली भविष्य में पारदर्शिता और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित कर पाएगी या इसे बड़े सुधारों की ज़रूरत है।

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