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शिंदे पर राज ठाकरे का तंज: मराठा आरक्षण पर फिर क्यों उठा विवाद?

शिंदे पर राज ठाकरे का तंज

मराठा आरक्षण के मौजूदा विवाद में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने एकनाथ शिंदे पर तंज कसते हुए कहा है कि केवल मुख्यमंत्री ही यह समझा सकते हैं कि यह मुद्दा दोबारा क्यों उठा। मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत 10 प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर दक्षिण मुंबई के आज़ाद मैदान में अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर शनिवार को दूसरे दिन भी डटे रहे।

सवाल-जवाब का दौर: ठाकरे ने शिंदे की ओर बढ़ाई जिम्मेदारी

जब पत्रकारों ने राज ठाकरे से आंदोलन के बारे में सवाल किया, तो उन्होंने सीधे तौर पर जवाब देने के बजाय मुख्यमंत्री शिंदे पर जिम्मेदारी डालते हुए कहा, “केवल एकनाथ शिंदे ही मराठा आंदोलन और आरक्षण के मुद्दे के बारे में सब कुछ समझा सकते हैं। अगर आप जानना चाहते हैं कि मनोज जरांगे क्यों लौटे हैं, तो उनसे ही पूछिए।” ठाकरे ने याद दिलाया कि पिछली बार जब शिंदे मुख्यमंत्री के रूप में नवी मुंबई गए थे, तो उन्होंने इस मुद्दे को सुलझा लिया था। उन्होंने सवाल किया कि फिर यह मुद्दा दोबारा क्यों उठा है और कहा कि इन सभी सवालों के जवाब केवल शिंदे ही दे सकते हैं।

पिछले साल का वादा और मौजूदा रुख

राज ठाकरे का यह बयान पिछले साल जनवरी की घटना की ओर इशारा करता है, जब शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार के अनुरोध पर, आरक्षण की मांगें पूरी करने का आश्वासन मिलने के बाद जरांगे का मुंबई मार्च नवी मुंबई के वाशी में रुक गया था। शिंदे ने उस समय मराठा आरक्षण का मुद्दा जल्द सुलझाने का वादा किया था। हालांकि, इस बार जरांगे अपने रुख पर अड़े हुए हैं कि वह राज्य सरकार द्वारा मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की घोषणा के बाद ही शहर छोड़ेंगे। उनके हजारों समर्थक राज्य के विभिन्न हिस्सों से, खासकर मराठवाड़ा से, आर्थिक राजधानी तक की यात्रा कर चुके हैं।

सरकार का रुख: भाजपा मंत्री ने किया बचाव, पवार ने दिया आश्वासन

इस बीच, सांगली में भाजपा मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने शिंदे का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने मराठा आरक्षण के मुद्दे पर कोई झूठा वादा नहीं किया था। पाटिल ने जोर देकर कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर मराठा समुदाय से जुड़े सभी मुद्दों का समाधान किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मजबूरियों का कोई समाधान नहीं होता। पाटिल ने आंदोलन के कारण आम नागरिकों को परेशानी न होने की अपील की। दूसरी ओर, उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने माहौल शांत करने की कोशिश करते हुए कहा कि सरकार इस मुद्दे के समाधान के लिए “युद्धस्तर” पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल के नेतृत्व में एक 10 सदस्यीय उपसमिति सभी पक्षों के साथ बातचीत कर रही है।

जरांगे की मुख्य मांग: कुनबी पहचान

मनोज जरांगे की मुख्य मांग मराठों को कुनबी के रूप में मान्यता देना है। कुनबी एक कृषि प्रधान जाति है जो ओबीसी श्रेणी में शामिल है। इस पहचान से मराठा समुदाय सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण का लाभ उठा पाएगा।

राज ठाकरे की टिप्पणी और राजनीतिक दबाव

राज ठाकरे ने, जो आगामी नगर निकाय चुनावों के सिलसिले में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करने आए थे, अपनी टिप्पणी से सरकार पर नया दबाव डाल दिया है। उनका यह शिंदे पर राज ठाकरे का तंज यह दर्शाता है कि विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा है। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा, “क्या शिंदे नवी मुंबई जाकर इस मुद्दे को नहीं सुलझाते? फिर यह आंदोलन फिर क्यों?”

समाधान की चुनौती

कुल मिलाकर, मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर महाराष्ट्र की राजनीति में गरमा गया है। राज ठाकरे जैसे नेताओं का यह तीखा शिंदे पर राज ठाकरे का तंज मौजूदा भाजपा-शिवसेना-राकांपा (अजित पवार गुट) सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, जिसे इस संवेदनशील मुद्दे का दीर्घकालिक समाधान निकालना है।

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