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ट्रंप व्यापार सलाहकार नवारो का ‘ब्राह्मण’ टिप्पणी पर विवादित बयान:

ट्रंप व्यापार सलाहकार नवारो

वाशिंगटन से एक शीर्ष अधिकारी के भारत दौरे से ठीक पहले, डोनाल्ड ट्रंप के व्यापार सलाहकार, ट्रंप व्यापार सलाहकार नवारो के सुर बदले हुए नज़र आए। सीएनबीसी के साथ एक साक्षात्कार में उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर बात करते हुए कहा कि भारत बातचीत की मेज पर आ रहा है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक सुलहपूर्ण ट्वीट और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस पर प्रतिक्रिया का भी जिक्र किया। नवारो ने कहा, “हम देखेंगे कि यह कैसे काम करता है।” हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने भारत के ऊंचे टैरिफ़ और गैर-टैरिफ़ बाधाओं का भी ज़िक्र किया और कहा कि इन समस्याओं से वैसे ही निपटना होगा जैसे वे दूसरे देशों के साथ निपट रहे हैं।

यह टिप्पणी तब आई जब अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि ब्रेंडन लिंच मंगलवार को चर्चा के लिए नई दिल्ली का एक दिवसीय दौरा करने वाले थे। इस घटनाक्रम की पुष्टि भारत के मुख्य वार्ताकार और वाणिज्य मंत्रालय में विशेष सचिव राजेश अग्रवाल ने भी की। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका व्यापार वार्ता को ‘तेज़ गति’ देंगे।

यह वार्ता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय निर्यात पर दंडात्मक शुल्क लगाने के कुछ हफ़्ते बाद हो रही थी, जिससे अगस्त में भारत का निर्यात नौ महीने के निचले स्तर पर पहुँच गया था।

जब नवारो ने कहा भारत को आना होगा बातचीत की मेज पर

इससे एक हफ्ता पहले, ट्रंप व्यापार सलाहकार नवारो ने ‘रियल अमेरिकाज़ वॉयस’ शो में एक इंटरव्यू के दौरान भारत पर कड़ा रुख अख्तियार किया था। उन्होंने कहा था कि भारत को अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में किसी न किसी मोड़ पर आना ही होगा, वरना यह दिल्ली के लिए “अच्छा नहीं होगा”। उन्होंने भारत को टैरिफ़ का ‘महाराजा’ भी बताया और कहा कि भारत सरकार उनसे नाराज़ है।

पूर्व अमेरिकी एनएसए जॉन बोल्टन ने ट्रंप व्यापार सलाहकार नवारो पर भारत-अमेरिका संबंधों में दरार डालने का आरोप भी लगाया था। यह आरोप तब सामने आया जब वाशिंगटन के शीर्ष वार्ताकार व्यापार समझौते पर चर्चा के लिए भारत दौरे से एक दिन पहले नवारो के सुर अचानक बदल गए।

‘ब्राह्मण’ टिप्पणी पर बवाल और हिंदू समूहों की तीखी प्रतिक्रिया

हालांकि, नवारो की सबसे विवादित टिप्पणी उनकी “ब्राह्मण” वाली टिप्पणी थी, जिसके लिए उन्हें हिंदू अमेरिकी समूहों से कड़ी आलोचना झेलनी पड़ी। फॉक्स न्यूज पर एक कार्यक्रम में उन्होंने भारतीय वस्तुओं पर प्रशासन के नए 50% टैरिफ का बचाव करते हुए कहा, “आपने भारतीय लोगों की कीमत पर ब्राह्मणों को मुनाफाखोरी करते देखा है, और हम चाहते हैं कि यह बंद हो।”

उन्होंने नई दिल्ली पर “क्रेमलिन के लिए एक धोबीघर” के रूप में काम करने का भी आरोप लगाया। इस बयान के बाद हिंदू-विरोधी होने के आरोप लगे और उन्हें हटाने की मांग भी की गई।

हिंदूपैक्ट, एक अमेरिका स्थित वकालत समूह, ने नवारो के शब्दों को “हिंदू-विरोध को हथियारबंद” बताया। समूह के कार्यकारी अध्यक्ष अजय शाह ने कहा कि औपनिवेशिक नीतियों के ज़रिए हिंदुओं को बाँटने से रिश्ते नहीं बनते, बल्कि टूटते हैं। हिंदूपैक्ट से जुड़े एक निगरानी समूह, अमेरिकन हिंदूज़ अगेंस्ट डिफेमेशन ने भी नवारो को बर्खास्त करने की माँग की।

टिप्पणी पर भारतीय प्रतिक्रिया और इसका संदर्भ

नवारो की इस टिप्पणी पर भारतीय नेताओं और उद्योगपतियों ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उद्योगपति हर्ष गोयनका ने कहा कि आर्थिक अभिजात वर्ग को जाति से जोड़ना भारत की वास्तविकता के प्रति अज्ञानता दर्शाता है, क्योंकि भारत के कई सबसे शक्तिशाली व्यापारिक परिवार ब्राह्मण नहीं हैं। भारतीय राजनीतिज्ञ प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस बयान को “शर्मनाक और भयावह” बताया।

यह विवाद अमेरिका-भारत संबंधों के एक तनावपूर्ण दौर में हुआ, जब ट्रंप प्रशासन ने भारतीय वस्तुओं पर भारी टैरिफ़ लगाए। हिंदू परंपरा में, ब्राह्मण सर्वोच्च जाति है, जो ऐतिहासिक रूप से पुरोहिती और विद्वत्तापूर्ण कर्तव्यों से जुड़ी रही है और आज भारत की आबादी का केवल 4% से 5% ही है। अमेरिका में, “बोस्टन ब्राह्मण” शब्द का भी प्रयोग धनी श्वेत प्रोटेस्टेंट अभिजात वर्ग के लिए किया जाता था।

यह घटना इस बात का भी एक उदाहरण है कि कैसे राजनीतिक बहसों में जाति जैसी संवेदनशील रूढ़ियाँ हानिकारक हो सकती हैं। ट्रंप व्यापार सलाहकार नवारो की यह टिप्पणी अमेरिका और भारत दोनों में विवाद का विषय बन गई है।

जाति-भेदभाव पर अमेरिकी अध्ययन और भारतीय-अमेरिकी समुदाय

2024 के कार्नेगी एंडोमेंट अध्ययन में पाया गया कि 32% भारतीय अमेरिकियों ने कहा कि वे किसी भी जाति से नहीं जुड़े हैं, जबकि 46% ने खुद को “सामान्य या उच्च जाति” के रूप में पहचाना। अधिकांश उत्तरदाताओं ने जातिगत भेदभाव के खिलाफ कानूनी उपायों का समर्थन किया।

हालांकि, हिंदू अधिवक्ताओं का कहना है कि अमेरिका में जाति को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने के वास्तविक परिणाम होते हैं, जिससे यहाँ रहने वाले हिंदुओं को धमकाया जाता है और उन्हें अपनी विरासत के लिए माफ़ी माँगने को मजबूर किया जाता है।

यह विवाद भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन की हाई-प्रोफाइल यात्रा के दौरान भी हुआ था, जहाँ उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी।

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता

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