93वां वायु सेना दिवस: ऑपरेशन सिंदूर, IAF शक्ति प्रदर्शन, हिंडन एयरबेस
93वां वायु सेना दिवस आज (बुधवार) उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित हिंडन एयरफोर्स स्टेशन पर बड़ी धूमधाम और गर्व के साथ मनाया गया। भारतीय वायुसेना (आईएएफ) की 93वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित इस वायुसेना दिवस समारोह में IAF के गौरवशाली इतिहास और भविष्य की तैयारियों को प्रदर्शित किया गया।
इस अवसर पर हेरिटेज फ्लाइट द्वारा एक शानदार हवाई प्रदर्शन भी शामिल था, जिसने दर्शकों को भारत के आकाश के रक्षकों की ताकत और सटीकता का नजारा दिखाया।
इस साल की परेड भारत के सबसे बड़े और सबसे रणनीतिक एयरबेसों में से एक, हिंडन एयरबेस पर आयोजित की गई। इससे पहले, वायु सेना दिवस परेड 2024 में चेन्नई और 2023 में प्रयागराज में आयोजित की जाती थी।
इस कार्यक्रम में रक्षा प्रमुख जनरल अनिल चौहान, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह, थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी सहित देश के शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने भाग लिया।
भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने हिंडन एयर बेस पर परेड का निरीक्षण किया और वायु सेना दिवस समारोह के तहत आयोजित परेड की सलामी ली। इस दौरान वायु योद्धाओं ने विमानवाहक पोतों के साथ भव्य मार्च पास्ट किया, जिसमें उन्होंने IAF की परिचालन शक्ति और बढ़ती तकनीकी क्षमताओं का प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन में राफेल, सुखोई Su-30MKI, मिग-29 जैसे लड़ाकू विमानों के साथ-साथ C-17 ग्लोबमास्टर III और अन्य विमान शामिल थे। साथ ही, भारत के स्वदेशी नेत्र $\text{AEW&C}$ और एक S-बैंड रोहिणी रडार को भी प्रदर्शित किया गया। स्वदेशी आकाश सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली भी प्रदर्शन का हिस्सा थी।
ऑपरेशन सिंदूर को विशेष श्रद्धांजलि: IAF प्रमुख ने बताया निर्णायक क्षण
इस अवसर पर अपने संबोधन में, वायुसेना प्रमुख, एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने भारतीय वायुसेना की एक साधारण शुरुआत से लेकर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायुसेना बनने तक की असाधारण यात्रा पर प्रकाश डाला।
इस वर्ष के समारोह में ऑपरेशन सिंदूर को विशेष श्रद्धांजलि दी गई, जो वायुसेना की विरासत का एक निर्णायक क्षण था। एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना का प्रदर्शन उसके पराक्रम का प्रमाण है, जिसमें साहसिक और सटीक हमलों ने राष्ट्रीय चेतना में आक्रामक हवाई कार्रवाई के उचित स्थान को पुनर्स्थापित किया है।
उन्होंने आगे कहा, “दुनिया एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक बदलाव देख रही है, और हाल के संघर्षों ने राष्ट्रीय उद्देश्यों की प्राप्ति में वायु शक्ति की निर्णायक भूमिका को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया है। ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से, हमने सैन्य परिणामों को आकार देने में वायु शक्ति की प्रधानता की पुष्टि की है।”
वायु सेना प्रमुख ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर को 22 अप्रैल को हुए पहलगाम हमले के जवाब में, 7 मई, 2025 को शुरू किया गया था। यह पहलगाम हमले का 2025 में बदला लेने के लिए किया गया एक उच्च-सटीक, खुफिया जानकारी पर आधारित दंडात्मक हमला था।
इस अभियान में पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में नौ पुष्ट आतंकवादी शिविरों को नष्ट करने के लिए हवाई शक्ति का इस्तेमाल किया गया। भारतीय वायुसेना ने उन्नत स्वदेशी प्लेटफार्मों का उपयोग करते हुए नूर खान और रहीमयार खान हवाई अड्डों सहित महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर समन्वित हमले किए तथा वास्तविक समय, बहु-डोमेन समन्वय के लिए एकीकृत वायु कमान और नियंत्रण प्रणाली (IACCS) का लाभ उठाया।
श्री सिंह ने नवाचार और अनुकूलनशीलता के प्रति वायुसेना की प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया और प्रशिक्षण एवं योजना के प्रति वायुसेना के दृष्टिकोण का हवाला दिया, जो “जैसे हम लड़ते हैं वैसे ही प्रशिक्षण भी लेते हैं” के सिद्धांत पर आधारित है।
IAF प्रमुख ने 97 सैन्य अलंकरण प्रदान किए
93वां वायु सेना दिवस समारोह के दौरान, IAF प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह ने कई वायु योद्धाओं को सैन्य अलंकरण प्रदान किए। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वायु सेना प्रमुख ने विभिन्न श्रेणियों के कुल 97 पदकों के साथ वायु योद्धाओं को सम्मानित किया, जिसमें वायु सेना पदक (असाधारण साहस के कार्य के लिए), वायु सेना पदक और विशिष्ट सेवा पदक शामिल थे।
इनमें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कर्तव्य की पंक्ति में अपने सर्वोच्च बलिदान के लिए एक सार्जेंट को मरणोपरांत दिया गया वीरता पदक शामिल है। कार्यक्रम में की गई घोषणा के अनुसार, सार्जेंट सुरेंद्र कुमार को “ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कर्तव्य पथ पर उनके सर्वोच्च बलिदान” के लिए मरणोपरांत वीरता पदक प्रदान किया गया, जिसे इस अवसर पर उनके परिवार के सदस्य ने ग्रहण किया। इसके अलावा, एक कॉर्पोरल को भी “कर्तव्य पथ पर उनके सर्वोच्च बलिदान” के लिए मरणोपरांत वीरता पदक प्रदान किया गया।
वायु सेना दिवस समारोह के दौरान, भारतीय वायुसेना प्रमुख ने असाधारण पेशेवर योगदान के लिए छह यूनिट प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किए। ये प्रशस्ति पत्र निम्नलिखित IAF यूनिट्स को दिए गए:
17 स्क्वाड्रन
222 स्क्वाड्रन
43 स्क्वाड्रन
2601 स्क्वाड्रन
2232 स्क्वाड्रन
एक बेस रिपेयर डिपो
यह समारोह भारतीय वायु सेना की 93वीं वर्षगांठ का प्रतीक है, जिसकी आधिकारिक स्थापना 8 अक्टूबर, 1932 को ब्रिटिश भारत की एक सहायक वायुसेना के रूप में हुई थी, और तब से यह बल दुनिया की सबसे दुर्जेय वायु शक्तियों में से एक के रूप में विकसित हुआ है।
आज देशभर में 93वां वायु सेना दिवस अत्यंत गर्व और उत्साह के साथ मनाया गया। गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर आयोजित मुख्य समारोह में वायुसेना ने अपने आधुनिक विमानों और तकनीकी कौशल का शानदार प्रदर्शन किया।



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