जनमत की चोरी: ECI और अवैध सरकार को भंग करने की मांग
भारतीय लोकतंत्र, जो कभी दुनिया का सबसे बड़ा और गौरवशाली लोकतन्त्र था, आज बीजेपी और चुनाव आयोग (ECI) की मिलीभगत से एक साजिशपूर्ण तानाशाही की गिरफ्त में फंस चुका है। जनमत की चोरी कर बनी सरकार और साजिशकर्ता चुनाव आयोग दोनों को भंग करने की मांग के साथ चेन्नई में सिविल सोसायटी के कार्यकर्ताओं द्वारा 25 अक्टूबर 2024 को पारित ‘जन प्रस्ताव’ ने इस मिलीभगत को बेनकाब कर दिया है।
मद्रास स्कूल ऑफ सोशल वर्क द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में न्यायमूर्ति हरि परंथमन, PUCL महासचिव वी. सुरेश, IAS अधिकारी आर. बालकृष्णन, एम.जी. देवसहायम, ट्रांसपेरेंसी कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज और डॉ. वी. पोनराज जैसे दिग्गजों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि ECI की कार्रवाइयों ने ‘चुनावी ईमानदारी से समझौता’ किया है, एक ऐसा आयोग जो निष्पक्षता की बजाय सत्ता की चाटुकारिता में डूबा हुआ है।
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ECI नियुक्ति संशोधन: संविधान का खुला अपमान और CJI को बाहर
2023 का मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्त (EC) नियुक्ति संशोधन विधेयक सुप्रीम कोर्ट के 2023 के फैसले का खुला अपमान था। कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि कार्यपालिका अकेले आयोग को नियुक्त नहीं कर सकती, लेकिन बीजेपी ने इस फैसले को पलटते हुए CJI को हटाकर प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) और एक केंद्रीय मंत्री की समिति बना दी।
इस समिति में बहुमत सत्ताधारी पार्टी का है, जिसने ECI की स्वतंत्रता को वस्तुतः समाप्त कर दिया है। ज्ञानेश कुमार जैसे बायस्ड CEC की नियुक्ति इसी का नतीजा है, जो विवादों में घिरे हैं और विपक्ष के आरोपों को ‘असंभव’ बताकर खारिज कर देते हैं। चेन्नई सम्मेलन में न्यायमूर्ति हरि परंथमन और PUCL के वी. सुरेश जैसे बुद्धिजीवियों ने सही कहा कि यह पक्षपाती आयोग लोकतंत्र का गला घोंट रहा है।
विपक्ष ने इस संशोधन को SC में चुनौती दी है, लेकिन सुनवाई में हो रही देरी से यह शक पैदा होता है कि क्या न्यायपालिका भी इस साजिश में शरीक हो गई है। विपक्ष ने इस विधेयक को ‘लोकतंत्र पर सबसे बड़ा प्रहार’ करार दिया, और कानूनी विशेषज्ञों ने चेताया कि इससे ECI की स्वतंत्रता खत्म हो गई है।
सोशल मीडिया पर #ECIBias ट्रेंड्स में कार्यकर्ता लिख रहे हैं कि यह विधेयक कार्यपालिका को ‘हां-मैन’ आयुक्त चुनने की शक्ति देता है, जो 2024 चुनावों में साफ दिखा। यह संशोधन न केवल संविधान का उल्लंघन है, बल्कि बीजेपी की तानाशाही और महत्वाकांक्षा का आईना भी है।
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SIR प्रक्रिया: वोटर लिस्ट को छेड़छाड़ का अड्डा और अल्पसंख्यकों को निशाना
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया, जो बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ के नाम पर चली, असल में वोटर लिस्ट को छेड़छाड़ का अड्डा बनी। 2024 में बिहार में 65 लाख वोटरों के नाम काटे गए, जबकि महाराष्ट्र में 4.1 लाख नए वोटर जोड़े गए, और ये बदलाव कई सीटों पर जीत-हार के मार्जिन से ज्यादा थे।
राहुल गांधी ने महादेवपुरा में 1 लाख से ज्यादा फर्जी वोटरों का खुलासा किया: डुप्लिकेट एंट्री, अमान्य पते, एक ही एड्रेस पर सैकड़ों वोटर। जनमत की चोरी के इस कृत्य को छुपाने के लिए ECI ने CCTV फुटेज 45 दिनों में मिटा दी और डिजिटल डेटा देने से इनकार कर दिया, जबकि विपक्ष को ‘साक्ष्य दो’ का फरमान सुनाता रहा।
चेन्नई प्रस्ताव ने इस प्रक्रिया को ‘पक्षपाती’ करार दिया, जोकि सही भी है, क्योंकि यह गरीबों, प्रवासियों और अल्पसंख्यकों के वोट चुराने का हथियार है, बीजेपी की जीत सुनिश्चित करने के लिए। बिहार में 67.3 लाख नाम काटे गए, जिनमें 10% सिर्फ 15 विधानसभाओं में, और मशीन-रीडेबल डेटा न देने से पारदर्शिता गायब है।
ECI का दावा है ‘शून्य अपीलें’, जो हास्यास्पद है क्योंकि लाखों प्रभावित हैं। सोशल मीडिया X पर #BiharSIR2025 में यूजर्स चीख चीख कर कह रहे हैं कि यह NRC का बैकडोर है, चुनाव आयोग के माध्यम से अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने का हथकंडा।
ECI की निष्क्रियता: मोदी के हेट स्पीच पर चुप्पी, विपक्ष पर चाबुक
2024 चुनावों में ECI की निष्क्रियता ने साबित कर दिया कि यह बीजेपी का सहयोगी है। प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ hate speech और MCC उल्लंघन की 27 शिकायतें थीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि विपक्ष की शिकायतों पर तुरंत चाबुक चलाया गया। वोटर टर्नआउट डेटा को छिपाया गया, और फॉरेन डेलिगेट्स को आमंत्रित कर ‘निष्पक्ष’ दिखावा किया गया।
चेन्नई में अंजलि भारद्वाज और आर. बालकृष्णन जैसे कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यह ‘चुनावी ईमानदारी का समझौता’ है, जो लोकसभा को ‘अवैध’ बना देता है। सोशल मीडिया पर विपक्षी पोस्ट्स और द ह्यूमन राइट्स वॉच रिपोर्ट्स बता रही हैं कि मुस्लिम-विरोधी भाषणों को अनदेखा किया गया।
ECI का बचाव कि ‘हमने टॉप लीडर्स को नहीं छुआ’, पूर्वाग्रह का खुला इजहार है, जो ECI से जनता का विश्वास खत्म कर रहा है। दिल्ली HC ने याचिकाएं खारिज कीं, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि ECI ने मोदी के ‘इनफिल्ट्रेटर्स’ वाले भाषण पर BJP को नोटिस दिया, मोदी को नहीं; 2019 से 27 शिकायतें लंबित हैं और कोई FIR नहीं हुई है। यह दोहरा मापदंड लोकतंत्र को कमजोर कर रहा है।
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राहुल गांधी का ‘वोट चोरी’ एटम बम: 48 सीटें चुराने का दावा
राहुल गांधी का अगस्त 2024 का प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से आरोप ‘वोट चोरी’ एक ‘एटम बम’ था, जो ECI को हिलाकर रख दिया। उन्होंने महादेवपुरा में 80 लोगों के एक ही एड्रेस पर रजिस्टर्ड होने, फर्जी फॉर्म 6 के दुरुपयोग, और 48 सीटें चुराने का दावा किया। ECI ने जवाब में राहुल गांधी से ‘माफी मांगो’ कहा, और साक्ष्य मांगे लेकिन खुद डेटा छिपाया।
चेन्नई सम्मेलन में डॉ. वी. पोनराज ने इसे ‘असंवैधानिक हस्तक्षेप’ कहा। इस मामले को लेकर विपक्षी मार्च हुए, लेकिन ECI ने इस विरोध को ‘अराजकता’ कहा। यह साजिश 2019 से चली आ रही है, जहां ECI ने BJP की शिकायतों पर 38/51 कार्रवाई की, लेकिन विपक्ष पर सख्ती दिखाई।
यह लेवल प्लेइंग फिल्ड का मजाक नहीं तो और क्या है। लोकतंत्र का आधार ‘वन मैन, वन वोट’ को बुरी तरह कुचला जा रहा है और ECI यह कार्य मोदी और शाह के इशारे पर कर रहा है।
आंकड़े दे रहे गवाही: 25 सीटें चुराने की साजिश
राहुल गांधी ने मशीन-रीडेबल डेटा और CCTV की मांग की लेकिन ECI ने इनकार किया। महाराष्ट्र में 4.6 लाख अनएक्सप्लेन्ड एडिशन, कर्नाटक में 1 लाख फेक वोट्स जैसे आंकड़े साबित करते हैं कि 2024 में कम से कम 25 सीटें चुराई गईं।
X पर @AUThackeray ने वर्ली में 19,333 वोट के घोटाले का खुलासा किया, जो साबित करता है कि न केवल वर्ली बल्कि यह राज्यव्यापी साजिश है। यह स्पष्ट प्रमाण है कि जनमत की चोरी एक सुनियोजित प्रयास था।
चेन्नई प्रस्ताव की मांग: 100% VVPAT और स्वतंत्र ECI
सिविल सोसायटियों का चेन्नई कॉन्क्लेव ‘प्रस्ताव’ एक विद्रोह की चिंगारी है। यह प्रस्ताव न केवल नया स्वतंत्र ECI और SIR रद्द करने की मांग करता है, बल्कि 100% VVPAT सत्यापन और मशीन-रीडेबल वोटर लिस्ट की भी अपील करता है, जो लोकतंत्र की रक्षा के लिए बेहद अनिवार्य हैं।
एम.जी. देवसहायम जैसे IAS अधिकारियों ने चेताया कि ‘चुराए जनादेश’ वाली सरकार भंग हो। कार्यकर्ताओं ने यह भी मांग की कि नाम काटने से पहले वोटरों को नोटिफाई किया जाए, और प्रवासी वर्कर्स के लिए डाक मतपत्र और प्रमाण आसान हों; लेकिन ECI ने इसे नजरअंदाज किया।
X पर कांग्रेस नेता @Pawankhera ने सवाल उठाया कि SIR में 65 लाख वोटों की कटौती लेकिन नए वोटर जोड़ने का कोई प्रयास क्यों नहीं? यह गरीबों और अल्पसंख्यकों को वोट से वंचित करने की साजिश है।
आह्वान: जनता उठो, यह तुम्हारा जनादेश है
यह साजिश भारतीय संविधान का चीरहरण कर रही है और लोकतंत्र का गला घोंट रही है। ऐसी सरकार जो ‘अवैध’ है, अतः इस सरकार को जनता द्वारा भंग करने का समय आ गया है। चेन्नई के कार्यकर्ताओं की पुकार सही है: नया, स्वतंत्र ECI बने, SIR रद्द हो, और पारदर्शिता लौटे।
बीजेपी+चुनाव आयोग का यह ‘लोकतंत्र-विरोधी गठजोड़’ इतिहास के कूड़ेदान में जरुर जाएगा, लेकिन तब तक लाखों वोटरों का अपमान जारी रहेगा। जनता, उठो! यह तुम्हारा जनादेश है, इसे चुराने वालों को सजा दो, वरना भारत का लोकतंत्र सिर्फ किताबों में बचेगा।
X पर #VoteChorGaddiChhod ट्रेंड कर रहा, जहां @Dr_MonikaSingh_ ने आदित्य ठाकरे के खुलासे को राहुल की दिशा बताया; यह जनआंदोलन की शुरुआत है। SC को अब सुधरना और हस्तक्षेप करना होगा, वरना 2025 के चुनाव भी चोरी का शिकार होंगे।
बीजेपी+चुनाव आयोग लोकतंत्र-विरोधी गठजोड़ सुनो होश में आओ लोकतन्त्र की हत्या मत करो वर्ना संविधान की प्रस्तावना में मौजूद “हम भारत के लोग” तुम्हें सड़क पर लाएंगे।
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जनमत की चोरी पर सियासी संग्राम
हाल ही में देशभर में जनमत की चोरी को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता खत्म होती जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार जनता की राय को नजरअंदाज कर लोकतंत्र की बुनियाद कमजोर कर रही है।
विपक्ष ने ईवीएम और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। सत्ताधारी दल ने आरोपों को बेबुनियाद बताया। कई सामाजिक संगठनों ने स्वतंत्र जांच की मांग की है।
लोकतांत्रिक संस्थाओं पर बढ़ा अविश्वास
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि जनमत की चोरी का मुद्दा केवल विपक्ष बनाम सत्ता का नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र के भविष्य से जुड़ा सवाल है। ऐसे आरोप जनता के विश्वास को कमजोर करते हैं और चुनाव प्रणाली पर गहरा असर डालते हैं।पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, निष्पक्षता ही लोकतंत्र की आत्मा है। जनता अब अधिक पारदर्शिता की मांग कर रही है।



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