संचार साथी ऐप विवाद: सरकार ने प्री-इंस्टॉलेशन ऑर्डर वापस लिया
केंद्र सरकार ने बुधवार को देश में बिकने वाले सभी स्मार्टफोन पर संचार साथी साइबर सिक्योरिटी ऐप के प्री-इंस्टॉलेशन को अनिवार्य करने वाला अपना ऑर्डर वापस ले लिया। यह फैसला संचार साथी ऐप विवाद के ठीक दो दिन बाद आया है जिसमें विपक्षी नेताओं, सिविल सोसाइटी, डिजिटल अधिकार कार्यकर्ताओं और Apple जैसी बड़ी कंपनियों ने प्राइवेसी उल्लंघन का गंभीर आरोप लगाया था।
28 नवंबर का ऑर्डर और 90 दिन की डेडलाइन
28 नवंबर को डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस ने टेलीकम्युनिकेशन (टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी) रूल्स, 2024 के रूल 8(4) के तहत सभी स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरर्स और इंपोर्टर्स को निर्देश दिया था कि 90 दिनों के अंदर सभी नए डिवाइस पर संचार साथी ऐप प्री-इंस्टॉल करना होगा और पुराने फोन में सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए इसे पुश करना होगा। ऑर्डर में साफ लिखा था कि ऐप को डिसेबल या रिस्ट्रिक्ट नहीं किया जा सकता और इसे आसानी से दिखना व एक्सेसिबल रहना चाहिए।
इसे भी पढ़े :- येदियुरप्पा POCSO केस: SC ने पूर्व मुख्यमंत्री को दी बड़ी राहत, लगाई रोक।
पेगासस की याद आई, विपक्ष ने किया तीखा हमला
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने इसे “मजाकिया” बताते हुए कहा, “यह सिर्फ टेलीफोन पर जासूसी नहीं है, वे पूरे देश को तानाशाही में बदल रहे हैं।” कार्ति चिदंबरम ने NDTV से कहा, “रूस और नॉर्थ कोरिया में होता है, अब वे हमारी प्राइवेट फोटो-वीडियो पर जासूसी करना चाहते हैं।” शिवसेना (UBT) की प्रियंका चतुर्वेदी ने इसे “एक और बिग बॉस सर्विलांस मोमेंट” करार दिया। पवन खेड़ा ने कहा कि सेक्शन 7(b) में साफ लिखा था कि ऐप को हटाया नहीं जा सकता।
मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संसद में दिया भरोसा
लोकसभा में कम्युनिकेशन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, “संचार साथी ऐप से जासूसी न मुमकिन है, न होगी। मैं इसे किसी भी दूसरे ऐप की तरह डिलीट कर सकता हूं। डेमोक्रेसी में हर नागरिक को यह अधिकार है।” उन्होंने दोहराया कि अगर फीडबैक के आधार पर ऑर्डर में बदलाव करना पड़ा तो सरकार तैयार है। मंगलवार को भी उन्होंने कहा था कि ऐप पूरी तरह वॉलंटरी और ट्रांसपेरेंट है, यूजर्स इसे कभी भी डिलीट कर सकते हैं।
इसे भी पढ़े :- संचार साथी ऐप: साइबर सुरक्षा या जासूसी टूल पर छिड़ी राष्ट्रव्यापी बहस
24 घंटे में 6 लाख डाउनलोड, कुल 1.4-1.5 करोड़ यूजर्स
सरकार ने रोलबैक का कारण बताते हुए कहा कि संचार साथी ऐप विवाद के बावजूद पिछले 24 घंटों में ही 6 लाख नए रजिस्ट्रेशन हुए हैं, यानी इस्तेमाल में 10 गुना बढ़ोतरी हुई है। कुल मिलाकर 1.4 से 1.5 करोड़ यूजर्स हो चुके हैं जो रोजाना करीब 2000 फ्रॉड की रिपोर्ट कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि ऐप की “बढ़ती स्वीकार्यता” और “जन भागीदारी” को देखते हुए अब प्री-इंस्टॉलेशन जरूरी नहीं रहा।
अब तक का असर: 6 लाख फ्रॉड ब्लॉक, 26 लाख फोन ट्रेस
संचार साथी ऐप से अब तक 26 लाख चोरी हुए हैंडसेट ट्रेस किए जा चुके हैं, 7 लाख यूजर्स को उनके फोन वापस मिले हैं, 41 लाख संदिग्ध मोबाइल कनेक्शन डिस्कनेक्ट किए गए और 6 लाख फ्रॉड पहले ही ब्लॉक हो चुके हैं। सरकार इसे जनता का भरोसा बता रही है।
इसे भी पढ़े :- संचार साथी ऐप विवाद: एप्पल ने निर्देश टाला, सरकार की परेशानियां बढ़ीं
Apple-Google भी करने वाले थे कानूनी चुनौती
इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक Apple और Google इस ऑर्डर का खुलकर विरोध करने की तैयारी कर रहे थे। उनका कहना था कि दुनिया में कहीं भी सरकार द्वारा अपना ऐप प्री-लोड करवाने का कोई उदाहरण नहीं है। इसके लिए iOS और Android को सिर्फ भारत के लिए अलग से कस्टमाइज करना पड़ता, जो प्राइवेसी और सिक्योरिटी के लिहाज से गंभीर सवाल खड़े करता।
अब ऐप पूरी तरह वैकल्पिक, डिलीट करने की पूरी आजादी
कम्युनिकेशन मिनिस्ट्री की ताजा प्रेस रिलीज में साफ कहा गया है कि संचार साथी ऐप अब सभी यूजर्स के लिए पूरी तरह वैकल्पिक है। इसे प्ले स्टोर और ऐप स्टोर से अपनी मर्जी से डाउनलोड किया जा सकता है और कभी भी अनइंस्टॉल किया जा सकता है। प्राइवेसी की जीत बताते हुए सरकार ने दो दिन में ही अपना सबसे विवादास्पद फैसला वापस लेकर दिखा दिया कि जनता का दबाव अभी भी काम करता है।
इसे भी पढ़े :- संसद में ड्रामा नहीं: PM की दो टूक, विपक्ष पर ‘फ्रस्ट्रेशन’ निकालने का आरोप



Post Comment