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बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी, विपक्ष को लगा बड़ा झटका

बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी

बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों में उभरी है, जिसने विपक्षी गठबंधन को पछाड़ते हुए ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग (SEC) द्वारा रविवार रात जारी अंतिम आंकड़ों के अनुसार, 246 नगर परिषदों और 42 नगर पंचायतों के लिए हुए दो चरणों के चुनावों में महायुति गठबंधन ने शानदार जीत दर्ज की है।

2 और 20 दिसंबर को हुए मतदान के बाद, रविवार को नरीमन पॉइंट स्थित बीजेपी मुख्यालय में जश्न का माहौल रहा। महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने इस बड़ी जीत का स्वागत किया। महायुति (बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी) ने कुल 288 खाली पदों में से 207 पर कब्जा किया, जबकि विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) मात्र 44 सीटों पर सिमट कर रह गई।

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नगर परिषद और नगर पंचायतों के विस्तृत आंकड़े

राज्य चुनाव आयोग (SEC) ने रविवार रात स्पष्ट किया कि स्थानीय निकाय चुनावों में महायुति का दबदबा पूरी तरह कायम रहा। नगर परिषदों के अध्यक्षों के कुल 288 पद दांव पर थे, जिनमें से अकेले बीजेपी ने 117 पदों पर जीत हासिल की है। महायुति के अन्य सहयोगियों में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 53 और अजीत पवार की एनसीपी ने 37 सीटें जीतीं।

इसके विपरीत, विपक्ष का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। कांग्रेस को 28, शिवसेना (UBT) को नौ और एनसीपी (शरद पवार) को केवल सात सीटें मिलीं। आयोग के अनुसार, 4 सीटें अन्य पंजीकृत पार्टियों ने जीतीं, जबकि 28 सीटों पर गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों का कब्जा रहा। शेष पांच सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता का जताया आभार

जैसे ही रुझानों में महायुति की जीत पक्की हुई, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर महाराष्ट्र की जनता और कार्यकर्ताओं का धन्यवाद किया। पीएम मोदी ने कहा, “महाराष्ट्र विकास के साथ मज़बूती से खड़ा है! नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों में बीजेपी और महायुति को आशीर्वाद देने के लिए महाराष्ट्र के लोगों का आभारी हूं।

यह लोगों पर केंद्रित विकास के हमारे विज़न में उनके भरोसे को दिखाता है।” उन्होंने आगे जोर देते हुए कहा कि बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए नई ऊर्जा के साथ काम करेगी। उन्होंने ज़मीनी स्तर पर कड़ी मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं की भी सराहना की।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने जीत को बताया ‘ट्रेलर’

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस जीत को टीम वर्क का परिणाम बताया। उन्होंने एक विस्तृत नोट लिखकर कहा कि यह जीत आने वाले नगर निगम चुनावों का सिर्फ एक ट्रेलर है। फडणवीस के अनुसार, जनता ने पीएम मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और जे.पी. नड्डा व नितिन नबीन के मार्गदर्शन में अटूट विश्वास जताया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते विकास के सकारात्मक एजेंडे पर आगे बढ़ी है। फडणवीस ने कहा, “पहली बार मैंने 100 प्रतिशत सकारात्मक वोट मांगे और लोगों ने हमें भरपूर प्यार दिया।” उन्होंने इसे संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय का परिणाम करार दिया।

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विपक्ष का आरोप: पैसे और सत्ता का हुआ दुरुपयोग

एक तरफ जहाँ महायुति में जश्न है, वहीं महा विकास अघाड़ी (MVA) खेमे में मायूसी और आक्रोश देखा गया। शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह चुनाव नहीं बल्कि ‘नीलामी’ थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पैसे की ताकत और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग से यह चुनाव जीता गया है।

राउत ने ANI से बात करते हुए कहा, “जिस नगर पालिका का बजट 30 करोड़ है, वहां प्रचार में 150 करोड़ खर्च किए गए।” उन्होंने यह भी तंज कसा कि पहली बार मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को स्थानीय निकाय चुनावों के लिए गली-गली प्रचार करते देखा गया है।

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कांग्रेस की ‘सम्मानजनक’ हार और भविष्य की उम्मीदें

झटके के बावजूद कांग्रेस इसे अपनी राजनीतिक वापसी की शुरुआत मान रही है। पार्टी ने 35 नगर परिषद अध्यक्ष पद (कुछ आंकड़ों में 34) जीतकर विपक्ष में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि दलितों, मुसलमानों और कमजोर वर्गों ने उन पर भरोसा जताया है।

विशेष रूप से विजय वडेट्टीवार, प्रतिभा धानोरकर और हर्षवर्धन सपकाल के नेतृत्व में चंद्रपुर और बुलढाणा जैसे जिलों में कांग्रेस को सफलता मिली। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि बिना संसाधनों के भी वे अजीत पवार की एनसीपी के करीब पहुंचे हैं, जो भविष्य के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

नांदेड़ में बीजेपी को लगा पारिवारिक झटके का स्वाद

जहाँ पूरे राज्य में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी, वहीं नांदेड़ के लोहा नगर निगम में पार्टी को व्यक्तिगत हार का सामना करना पड़ा। यहाँ बीजेपी ने एक ही परिवार के छह उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था, जिसे लेकर ‘वंशवादी राजनीति’ का विवाद शुरू हो गया था।

महायुति सहयोगी होने के बावजूद अजीत पवार की एनसीपी ने यहाँ ‘दोस्ताना मुकाबले’ में बीजेपी के सभी छह उम्मीदवारों को हरा दिया।

बीजेपी के दिग्गज गजानन सूर्यवंशी को एनसीपी के शरद पवार (उम्मीदवार का नाम) ने मात दी। सूर्यवंशी की पत्नी, भाई, भाभी और अन्य रिश्तेदार भी अपनी सीटें नहीं बचा पाए, जिसे स्थानीय स्तर पर बीजेपी के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।

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महायुति के दिग्गजों की प्रतिक्रिया और भविष्य का रोडमैप

अमित शाह ने भी X पर पोस्ट कर महायुति की जीत को मोदी सरकार की जन-कल्याणकारी नीतियों पर जनता की मुहर बताया। वहीं, उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने मतदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए इस जनादेश को गर्व और जिम्मेदारी का क्षण कहा।

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि बीजेपी ने 2017 की 94 सीटों के मुकाबले इस बार 129 नगर परिषदों (रुझानों सहित) में बढ़त बनाई है।

नांदेड़ में अशोक चव्हाण के प्रभाव के चलते बीजेपी ने कुंडलवाड़ी और भोकर जैसी जगहों पर जीत हासिल की, जबकि एनसीपी ने लोहा, कंधार और देगलूर में अपना परचम लहराया। कुल मिलाकर, यह चुनाव परिणाम आगामी बड़े चुनावों के लिए महायुति के मनोबल को बढ़ाने वाला साबित हुआ है।

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