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तुर्कमान गेट पर अवैध निर्माण हटाने के दौरान पुलिस पर पथराव, 10 हिरासत में

राजधानी दिल्ली में बुधवार तड़के पुरानी दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में उस वक्त स्थिति विस्फोटक हो गई, जब नगर निगम की तोड़फोड़ कार्रवाई के दौरान पुलिस पर पथराव शुरू हो गया। अधिकारियों ने बताया कि रामलीला मैदान के पास स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद से सटे अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए MCD की टीम भारी पुलिस बल के साथ पहुंची थी। बुधवार की सुबह करीब 1:30 बजे जैसे ही 17 बुलडोजरों ने अवैध ढांचों को गिराना शुरू किया, स्थानीय लोग बड़ी संख्या में जमा हो गए और विरोध प्रदर्शन करने लगे। देखते ही देखते विरोध ने हिंसक रूप ले लिया और भीड़ की ओर से बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की गई, जिसके बाद भारी पुलिस पर पथराव की घटना सामने आई। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए अब तक 10 लोगों को हिरासत में लिया है और दंगा करने तथा सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में FIR दर्ज की है।

देर रात 1:30 बजे शुरू हुआ ऑपरेशन, 32 जेसीबी और बुलडोजरों का एक्शन

दिल्ली नगर निगम (MCD) के अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान सुरक्षा चिंताओं और दिन के समय होने वाले संभावित विरोध से बचने के लिए आधी रात के बाद शुरू किया गया था। आमतौर पर ऐसे अभियान सुबह 8 बजे के बाद होते हैं, लेकिन संवेदनशीलता को देखते हुए इसे रात 1:30 बजे शुरू किया गया। सिटी एसपी ज़ोन (CSPZ) के डिप्टी कमिश्नर विवेक अग्रवाल ने बताया कि इस कार्रवाई में 10 से 17 बुलडोजर और मशीनों का उपयोग किया गया, जबकि कुल 32 जेसीबी मशीनों ने रात भर काम किया। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य लगभग 36,000 वर्ग फुट जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराना था। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से कानूनी है और कोर्ट के निर्देशों के अधीन की गई है।

तुर्कमान गेट हिंसा मस्जिद के पास चले बुलडोजर और पत्थरबाजी

झड़प में पांच पुलिसकर्मी घायल, भीड़ को तितर-बितर करने के लिए छोड़े आंसू गैस के गोले

जैसे ही तोड़फोड़ की कार्रवाई ने रफ्तार पकड़ी, लगभग 100 से 150 लोग मस्जिद के बाहर जमा हो गए और नारेबाजी करने लगे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन कुछ उपद्रवियों ने अराजकता फैलाते हुए पुलिस पर पथराव कर दिया। इस हिंसा में कम से कम पांच पुलिसकर्मियों को मामूली चोटें आईं, जिन्हें तुरंत मेडिकल उपचार उपलब्ध कराया गया। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी, तो भीड़ को पीछे धकेलने के लिए आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल करना पड़ा। डीसीपी (सेंट्रल) निधिन वलसन के अनुसार, पुलिस ने “न्यूनतम बल” का प्रयोग किया ताकि जनहानि न हो और स्थिति को सामान्य बनाया जा सके।

दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई, 38,940 वर्ग फुट जमीन का विवाद

यह पूरी कार्रवाई 12 नवंबर, 2025 को दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों के अनुपालन में की गई थी। कोर्ट ने MCD और PWD को तुर्कमान गेट और रामलीला मैदान के पास से 38,940 वर्ग फुट जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए तीन महीने का समय दिया था। अक्टूबर 2025 में किए गए एक संयुक्त सर्वे में पाया गया था कि PWD की 2,512 वर्ग फुट और नगर निगम की 36,248 वर्ग फुट जमीन पर अवैध कब्जा है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा था कि धार्मिक या कब्रिस्तान की जमीन का इस्तेमाल कमर्शियल कार्यों जैसे बैंक्वेट हॉल, क्लिनिक या दुकानों के लिए नहीं किया जा सकता। सेव इंडिया फाउंडेशन द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर यह ऐतिहासिक फैसला आया था।

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मस्जिद को नहीं पहुंचा कोई नुकसान, अवैध बैंक्वेट हॉल और डिस्पेंसरी जमींदोज

MCD के डिप्टी कमिश्नर विवेक कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ किया है कि इस तोड़फोड़ अभियान के दौरान मुख्य मस्जिद के ढांचे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। कार्रवाई केवल उन हिस्सों पर की गई जिन्हें अदालत ने अवैध घोषित किया था। इसमें मस्जिद से सटा एक बैंक्वेट हॉल, एक डिस्पेंसरी, दो दो-मंजिला बाउंड्री वॉल और कुछ व्यावसायिक निर्माण शामिल थे। अधिकारियों ने बताया कि ये निर्माण काफी मजबूती से किए गए थे, जिनकी दीवारें 9 इंच मोटी थीं, जिसके कारण ऑपरेशन में अधिक समय लगा। वर्तमान में साइट पर करीब 200 से 250 गाड़ियों के मलबे को हटाने का काम जारी है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम, नौ ज़ोन में बंटा पूरा इलाका और ड्रोन से निगरानी

हिंसा और पुलिस पर पथराव के बाद सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा कर दिया गया है। जॉइंट कमिश्नर (सेंट्रल रेंज) मधुर वर्मा ने बताया कि पूरे इलाके को नौ संवेदनशील ज़ोन में बांटा गया है, जिसकी कमान एडिशनल डीसीपी रैंक के अधिकारियों को सौंपी गई है। इलाके में दिल्ली पुलिस के साथ-साथ रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की तैनाती की गई है। पुलिस अब ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी फुटेज के जरिए उपद्रवियों की पहचान कर रही है। पुलिस कर्मियों के बॉडी कैमरा की रिकॉर्डिंग को भी सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पत्थरबाजी में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

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मस्जिद कमेटी का पक्ष और वक्फ बोर्ड का कानूनी दावा

इससे पहले मंगलवार को फैज-ए-इलाही मस्जिद की मैनेजिंग कमेटी ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर MCD की कार्रवाई को चुनौती दी थी। कमेटी का तर्क है कि वे प्रॉपर्टी का किराया दिल्ली वक्फ बोर्ड को दे रहे हैं और यह वक्फ संपत्ति है, जिसका विवाद सुलझाने का अधिकार केवल वक्फ ट्रिब्यूनल को है। याचिका में दावा किया गया कि मस्जिद 0.195 एकड़ जमीन पर बनी है, लेकिन एमसीडी के 22 दिसंबर, 2025 के नोटिस के अनुसार, मालिकाना हक के दस्तावेज न होने के कारण अतिरिक्त निर्माण को अवैध माना गया। कमेटी ने कब्रिस्तान की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है, हालांकि प्रशासन का कहना है कि वे केवल कोर्ट के आदेश का पालन कर रहे हैं।

सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयास और भविष्य की कार्रवाई

फिलहाल तुर्कमान गेट इलाके में स्थिति नियंत्रण में है और शांति बहाल करने के लिए स्थानीय ‘अमन कमेटी’ के सदस्यों के साथ बैठकें की जा रही हैं। पुलिस ने हिरासत में लिए गए 10 लोगों के अलावा अन्य संदिग्धों की तलाश जारी रखी है। अधिकारियों ने बताया कि इस इलाके में लाल किले के पास हुए विस्फोट के संदिग्ध उमर उन नबी के देखे जाने की खबरों के बाद सुरक्षा और सतर्कता पहले से ही बढ़ा दी गई थी। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने दोहराया है कि दिल्ली पुलिस न्यायिक निर्देशों को पेशेवर और संवेदनशील तरीके से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाली गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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