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मणिपुर हिंसा: 48 मिनट के ऑडियो टेप की फोरेंसिक जांच का SC का आदेश

मणिपुर हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए 48 मिनट के पूरे ऑडियो टेप की विस्तृत फोरेंसिक जांच कराने का आदेश दिया है। जस्टिस संजय कुमार और के विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा कि लीक हुई पूरी ऑडियो क्लिप को जांच के लिए नेशनल फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (NFSU), गांधीनगर भेजा जाए। यह ऑडियो क्लिप कथित तौर पर मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह को 2023 की जातीय हिंसा से जोड़ती है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस 48 मिनट की पूरी रिकॉर्डिंग को पूर्व मुख्यमंत्री के स्वीकार किए गए वॉयस सैंपल और याचिकाकर्ता द्वारा जमा की गई अन्य रिकॉर्डिंग के साथ मिलाकर जांचा जाए। अदालत ने NFSU से इस प्रक्रिया में तेजी लाने और अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सौंपने को कहा है।

जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने जताई चिंता: केवल चुनिंदा हिस्से ही क्यों भेजे गए?

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात पर “थोड़ी परेशानी” व्यक्त की कि पिछली बार केवल चुनिंदा क्लिपिंग ही फोरेंसिक जांच के लिए भेजी गई थीं। 15 दिसंबर को बेंच ने सवाल किया था कि लीक हुई पूरी ऑडियो टेप को जांच के लिए क्यों नहीं भेजा गया। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि राज्य को पूरी रिकॉर्डिंग पिछली सुनवाई के बाद ही मिली थी, क्योंकि याचिकाकर्ताओं ने पहले इसे जमा नहीं किया था। वहीं, याचिकाकर्ता कुकी ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट (KOHUR) की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि मामला लगभग 10 बार सूचीबद्ध किया जा चुका है और याचिका में ही पूरी बातचीत का ट्रांसक्रिप्ट और ऑडियो शामिल था।

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एन बीरेन सिंह पर गंभीर आरोप: हिंसा भड़काने और षड्यंत्र का दावा

याचिकाकर्ता संगठन KOHUR ने आरोप लगाया है कि एक गुमनाम व्हिसलब्लोअर द्वारा साझा किए गए इस ऑडियो टेप में पूर्व सीएम की टेलीफोन पर बातचीत है, जो मणिपुर की जातीय हिंसा में सर्वोच्च पदाधिकारी की मिलीभगत स्थापित करती है। आरोप है कि बीरेन सिंह ने कुकी-बहुल इलाकों में बड़े पैमाने पर हत्या और विनाश को “भड़काने, आयोजित करने और केंद्रीय रूप से संचालित करने” में मुख्य भूमिका निभाई थी। रिकॉर्डिंग में कथित तौर पर सिंह को यह कहते सुना जा सकता है कि संघर्ष कैसे शुरू हुआ और उन्होंने “बमों” के इस्तेमाल के खिलाफ गृह मंत्री अमित शाह के आदेश की अवहेलना की थी। हालांकि, पिछले साल 9 फरवरी को बीरेन सिंह ने बीजेपी के भीतर चल रही उथल-पुथल और नेतृत्व परिवर्तन की मांग के बीच इस्तीफा दे दिया था।

NFSU गांधीनगर की पिछली रिपोर्ट और प्रशांत भूषण की जवाबी दलीलें

इससे पहले की सुनवाई में NFSU गांधीनगर ने कोर्ट को सूचित किया था कि उसे भेजे गए ऑडियो क्लिप के हिस्से के साथ “छेड़छाड़ की गई थी” और वह वैज्ञानिक रूप से आवाज की तुलना के लिए उपयुक्त नहीं था। लैब ने कहा था कि चूंकि ऑडियो के साथ एडिटिंग और छेड़छाड़ के संकेत हैं, इसलिए वक्ताओं की समानता पर कोई निश्चित राय नहीं दी जा सकती। हालांकि, वकील प्रशांत भूषण ने एक अलग प्राइवेट फोरेंसिक रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें दावा किया गया है कि पूरी ऑडियो टेप अनएडिटेड है और इसमें आवाज बीरेन सिंह की होने की 93 प्रतिशत संभावना है। इसी विरोधाभास को दूर करने के लिए अब कोर्ट ने पूरे 48 मिनट के ऑडियो की नई सिरे से जांच का आदेश दिया है।

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मणिपुर जातीय हिंसा का काला अध्याय: 260 से अधिक मौतें और हजारों विस्थापित

मई 2023 में इंफाल घाटी के मेइतेई और पहाड़ी जिलों के कुकी-ज़ो समुदायों के बीच भड़की जातीय हिंसा में अब तक 260 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और 59,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं। यह झड़पें तब शुरू हुई थीं जब मेइतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (ST) दर्जे की मांग पर हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ ‘ट्राइबल सॉलिडेरिटी मार्च’ निकाला गया था। 2024 और 2025 में भी हिंसा में समय-समय पर बढ़ोतरी देखी गई, जिसके बाद फरवरी 2025 में राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। कुकी समूहों का आरोप है कि राज्य मशीनरी की प्रतिक्रिया पक्षपातपूर्ण थी और उन्होंने बहुसंख्यकवाद को बढ़ावा दिया।

सुप्रीम कोर्ट की अन्य अहम सुनवाई: सोनम वांगचुक और नेहा सिंह राठौर का मामला

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अन्य महत्वपूर्ण मामलों पर भी सुनवाई हुई। जस्टिस अरविंद कुमार की बेंच ने जेल में बंद जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो द्वारा एनएसए के तहत हिरासत के खिलाफ दायर याचिका को 8 जनवरी तक के लिए टाल दिया। इसके अलावा, कोर्ट ने लोक गायिका नेहा सिंह राठौर को पहलगाम आतंकी हमले पर सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर दर्ज मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने कमेंट्स में पीएम मोदी, अमित शाह और बीजेपी को निशाना बनाया था। इन मामलों के बीच मणिपुर के ऑडियो क्लिप की जांच का मुद्दा सबसे अधिक चर्चा में रहा।

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वैज्ञानिक जांच और सीलबंद रिपोर्ट: क्या सामने आएगा बीरेन सिंह का सच?

जस्टिस संजय कुमार और आलोक अराधे की बेंच ने NFSL से स्पष्ट रूप से पूछा है कि क्या ऑडियो टेप में मौजूद आवाज वास्तव में बीरेन सिंह की है। बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता से मिली पूरी रिकॉर्डिंग को गुजरात की लैब में भेजा जाए। कोर्ट ने पहले CFSL से भी रिपोर्ट मांगी थी और राज्य सरकार से नई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। भूषण का आरोप है कि रिकॉर्ड की गई बातचीत से पहली नजर में हिंसा में राज्य मशीनरी की संलिप्तता का पता चलता है। अब सबकी नजरें NFSU की उस सीलबंद रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस हाई-प्रोफाइल मामले की दिशा तय करेगी।

कूटनीतिक और न्यायिक सुरक्षा के बीच फंसा मणिपुर का भविष्य

मणिपुर का मुद्दा न केवल सुरक्षा की दृष्टि से बल्कि न्यायिक पारदर्शिता के लिहाज से भी अत्यंत संवेदनशील हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री के इस्तीफे और राष्ट्रपति शासन के बावजूद, इंफाल से लेकर दिल्ली तक इस ऑडियो रिकॉर्डिंग की गूंज सुनाई दे रही है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि न्याय की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की वैज्ञानिक अपूर्णता नहीं रहने दी जाएगी। 48 मिनट की यह जांच केवल एक व्यक्ति की आवाज की पहचान नहीं है, बल्कि यह उस प्रणाली की जवाबदेही का परीक्षण है जिसे एक पूरे राज्य की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया था।

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