15वीं बार जेल से बाहर: राम रहीम को फिर मिली 40 दिन की पैरोल
हरियाणा की रोहतक जेल में बंद डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। बलात्कार और हत्या के मामले में 20 साल की जेल की सजा काट रहे राम रहीम को एक बार फिर रविवार को सूत्रों के अनुसार 40 दिन की पैरोल दी गई है। यह उनके जेल जाने के बाद का 15वीं बार जेल से बाहर आने का अवसर होगा। रोहतक के डिविजनल कमिश्नर ने इस पैरोल को मंजूरी दी है, जिसके बाद उम्मीद जताई जा रही है कि उन्हें रविवार या सोमवार को सुनारिया जेल से रिहा कर दिया जाएगा। राम रहीम अपनी दो महिला शिष्याओं के साथ बलात्कार के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद से लगातार सजा काट रहे हैं, लेकिन समय-समय पर मिलने वाली पैरोल और फरलो ने हमेशा कानूनी और राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दिया है।
सजा की पृष्ठभूमि: बलात्कार और पत्रकार की हत्या के गंभीर मामले
गुरमीत राम रहीम को 2017 में पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने अपनी दो शिष्याओं के साथ बलात्कार के आरोप में 20 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। इसके अलावा, 2019 में उन्हें और तीन अन्य लोगों को 16 साल से भी पहले हुए पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इन गंभीर अपराधों के बावजूद, राम रहीम को बार-बार जेल से बाहर आने की अनुमति मिलती रही है। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि रोहतक डिविजनल कमिश्नर ने ताजा पैरोल के आवेदन पर विचार करने के बाद उन्हें 40 दिनों के लिए जेल से मुक्त करने का निर्णय लिया है। अपनी इस ताज़ा पैरोल से पहले, सिंह 2017 में दोषी ठहराए जाने के बाद से 14 बार जेल से बाहर आ चुके हैं, और अब वह 15वीं बार जेल से बाहर आएंगे।
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पैरोल का सिलसिला: पिछले एक साल में मिली राहतों का विवरण
राम रहीम को मिलने वाली पैरोल की आवृत्ति काफी अधिक रही है। उनकी यह ताजा पैरोल पिछले साल अगस्त 2025 में मिली 40 दिन की पैरोल के केवल पांच महीने बाद ही आ गई है। अगस्त 2025 की पैरोल का इस्तेमाल उन्होंने कथित तौर पर अपना 58वां जन्मदिन मनाने के लिए किया था। यदि पिछले साल के पूरे रिकॉर्ड को देखें, तो अगस्त की पैरोल के अलावा, उन्हें अप्रैल में 21 दिन की फरलो और जनवरी में 30 दिन की पैरोल दी गई थी। यह सिलसिला लगातार जारी है, जिससे जेल नियमों और सजा की गंभीरता पर सवाल उठते रहे हैं। अब एक बार फिर वह 15वीं बार जेल से बाहर आकर उत्तर प्रदेश के बागपत स्थित आश्रम में अपना समय बिता सकते हैं।
चुनावों से पैरोल का ‘खास कनेक्शन’: आंकड़ों की जुबानी
राम रहीम की पैरोल का समय अक्सर चुनावों के इर्द-गिर्द होता है, जो राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनता है। उदाहरण के लिए, उन्हें 1 अक्टूबर 2024 को 20 दिन की पैरोल दी गई थी, जो 5 अक्टूबर के हरियाणा विधानसभा चुनावों से ठीक कुछ दिन पहले थी। इसी तरह, अगस्त 2024 में उन्हें 21 दिन की फरलो मिली थी। इससे पहले, 7 फरवरी 2022 से उन्हें तीन सप्ताह की फरलो दी गई थी, जो पंजाब विधानसभा चुनावों से ठीक दो सप्ताह पहले की तारीख थी। जनवरी में मिली 30 दिन की पैरोल भी 5 फरवरी के दिल्ली विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आई थी। यह संयोग कई बार विवादों का कारण बना है, क्योंकि वह 15वीं बार जेल से बाहर आ रहे हैं और उनके अनुयायियों का वोट बैंक चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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सिख संगठनों का विरोध और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की आलोचना
राम रहीम को बार-बार दी जाने वाली इस राहत का सिख संगठनों ने कड़ा विरोध किया है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) जैसे संगठनों ने अतीत में राम रहीम को पैरोल दिए जाने के लिए हरियाणा सरकार की तीखी आलोचना की है। सिख संगठनों का तर्क है कि एक गंभीर अपराधी को बार-बार इस तरह की रियायत देना न्याय प्रणाली का अपमान है। हालांकि, सरकार और जेल अधिकारियों का कहना है कि पैरोल जेल मैनुअल के नियमों के तहत ही दी जाती है और यह कैदी का अधिकार है। बावजूद इसके, जब भी राम रहीम जेल से बाहर आते हैं, विरोध के स्वर तेज हो जाते हैं।
डेरा सच्चा सौदा का प्रभाव: हरियाणा और पंजाब में अनुयायियों की ताकत
सिरसा मुख्यालय वाले डेरा सच्चा सौदा का प्रभाव केवल हरियाणा तक सीमित नहीं है, बल्कि पंजाब, राजस्थान और कई अन्य राज्यों में भी इसके लाखों अनुयायी हैं। हरियाणा में विशेष रूप से सिरसा, फतेहाबाद, कुरुक्षेत्र, कैथल और हिसार जैसे जिलों में डेरा के अनुयायियों की बहुत बड़ी संख्या है। यही कारण है कि राम रहीम की रिहाई सामाजिक और राजनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। पैरोल के दौरान राम रहीम अक्सर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपने अनुयायियों को संबोधित करते हैं और सत्संग आयोजित करते हैं, जिससे उनका प्रभाव जेल के बाहर भी बना रहता है।
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पैरोल का गंतव्य: बागपत का आश्रम और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
सूत्रों के अनुसार, पिछले 13-14 मौकों पर जब भी राम रहीम जेल से बाहर आए हैं, वह अधिकांश समय उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में स्थित डेरा के बरनावा आश्रम में रुके हैं। इस बार भी संभावना है कि वह अपनी 40 दिनों की पैरोल वहीं बिताएंगे। पैरोल के दौरान उन पर सख्त शर्तें लागू रहती हैं, जिसमें बिना अनुमति क्षेत्र छोड़ने पर पाबंदी और पुलिस की निगरानी शामिल होती है। जेल से लेकर आश्रम तक सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं ताकि किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े। राम रहीम के अनुयायी उनकी एक झलक पाने के लिए आश्रम के बाहर जुटने लगते हैं, जिसे संभालना प्रशासन के लिए एक चुनौती होता है।
न्याय और नियमों के बीच उलझी पैरोल
गुरमीत राम रहीम की 40 दिन की यह पैरोल एक बार फिर कानूनी बहस छेड़ चुकी है। जहाँ प्रशासन इसे नियमों के तहत दी गई छुट्टी बता रहा है, वहीं सामाजिक कार्यकर्ता और विपक्षी संगठन इसे सत्ता के दुरुपयोग के रूप में देख रहे हैं। राम रहीम के 15वीं बार जेल से मुक्त होने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है और उनके सिरसा या बागपत पहुँचने की तैयारियों के बीच हरियाणा की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बार की पैरोल के दौरान राम रहीम की गतिविधियां क्या रहती हैं और समाज के विभिन्न वर्गों की इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है।
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