ग्रोक AI और फीड क्वालिटी सुधारने के लिए एलन मस्क खोलेंगे X का एल्गोरिदम
ग्रोक AI फीड क्वालिटी दुनिया के सबसे अमीर इंसान और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) के मालिक एलन मस्क ने एक बार फिर तकनीकी जगत में हलचल मचा दी है। मस्क ने आधिकारिक घोषणा की है कि X पारदर्शिता बढ़ाने और प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए अगले सात दिनों के भीतर अपना ‘रिकमेंडेशन एल्गोरिदम’ ओपन-सोर्स कर देगा।
इस ऐतिहासिक कदम के तहत वह सारा कोड सार्वजनिक किया जाएगा, जो यह तय करता है कि उपयोगकर्ताओं को उनकी टाइमलाइन पर कौन सी पोस्ट और विज्ञापन दिखाए जाएंगे। 10 जनवरी, 2026 को दी गई इस जानकारी के अनुसार, मस्क का प्राथमिक लक्ष्य ग्रोक AI और फीड क्वालिटी के बीच एक मजबूत तालमेल बिठाना है, ताकि यूजर्स को उनकी पसंद का सटीक कंटेंट मिल सके।
हर चार हफ्ते में अपडेट और विस्तृत डेवलपर नोट्स
एलन मस्क ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक बार की प्रक्रिया नहीं होगी। उन्होंने प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट के माध्यम से बताया कि एल्गोरिदम साझा करने की यह प्रक्रिया हर चार हफ्ते में दोहराई जाएगी। प्रत्येक अपडेट के साथ ‘डेवलपर नोट्स’ भी जारी किए जाएंगे, जिससे दुनिया भर के डेवलपर्स और विशेषज्ञों को यह समझने में आसानी होगी कि एल्गोरिदम के लॉजिक में क्या बदलाव किए गए हैं।
मस्क ने वादा किया है कि इस बार कोड में वे सभी पैरामीटर्स शामिल होंगे जो किसी पोस्ट की ‘ऑर्गेनिक’ (प्राकृतिक पहुंच) और ‘पेड’ (विज्ञापनों के जरिए पहुंच) विजिबिलिटी को निर्धारित करते हैं। यह कदम उन यूजर्स के लिए राहत भरा हो सकता है जो लंबे समय से फीड में प्रासंगिकता की कमी की शिकायत कर रहे थे।
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पारदर्शिता का नया दौर और पुराने वादों की हकीकत
मस्क ने 2022 में ट्विटर अधिग्रहण के समय भी एल्गोरिदम को सार्वजनिक करने का वादा किया था। हालांकि, मार्च 2023 में GitHub पर जारी किया गया ‘फॉर यू’ फीड कोड अधूरा पाया गया था, जिसमें विशेषज्ञों ने दावा किया था कि महत्वपूर्ण लॉजिक गायब है। इस बार मस्क ने फिर से अपने वादे को दोहराते हुए कहा है, “हम नए X एल्गोरिदम को सात दिनों में इसके सोर्स के साथ पब्लिक करने जा रहे हैं।
” ग्रोक AI और फीड क्वालिटी को लेकर मस्क का मानना है कि एल्गोरिदम को ओपन-सोर्स करने से जनता का भरोसा जीतेगा और विशेषज्ञों को सिस्टम की खामियों को ऑडिट करने का मौका मिलेगा। हालांकि, पुराने अनुभवों को देखते हुए तकनीकी जगत में इस समय-सीमा को लेकर थोड़ा संदेह अभी भी बरकरार है।
ग्रोक AI का बढ़ता प्रभाव और पूरी तरह AI-संचालित इंजन
सितंबर में मस्क ने संकेत दिया था कि उनका लक्ष्य X के रिकमेंडेशन इंजन को “पूरी तरह से AI” आधारित बनाना है। इस विजन के केंद्र में उनका अपना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चैटबॉट ‘ग्रोक’ (Grok) है। मस्क के अनुसार, यूजर्स को उनके फीड में जो सुधार दिख रहा है, वह किसी व्यक्ति द्वारा मैन्युअल रूप से किए गए बदलावों के कारण नहीं, बल्कि ग्रोक AI और फीड क्वालिटी सुधारने वाले टूल्स के बढ़ते उपयोग का परिणाम है।
कंपनी वर्तमान में इस पर काम कर रही है कि X पर प्रतिदिन पोस्ट होने वाली 100 मिलियन से अधिक पोस्ट का मूल्यांकन ग्रोक द्वारा किया जाए। इसके बाद ग्रोक हर यूजर की व्यक्तिगत रुचि के आधार पर उसे सबसे बेहतरीन पोस्ट सुझाएगा, जिससे नवंबर तक फीड की गुणवत्ता में क्रांतिकारी बदलाव आने की उम्मीद है।
वैश्विक रेगुलेटर्स की जांच और पारदर्शिता की कमी के आरोप
भले ही मस्क पारदर्शिता का दावा कर रहे हों, लेकिन X लगातार वैश्विक नियामकों के निशाने पर है। यूरोपीय अधिकारियों ने गलत सूचना, अपर्याप्त कंटेंट मॉडरेशन और पारदर्शिता की कमी को लेकर जांच तेज कर दी है। विशेष रूप से फ्रांस के अधिकारियों ने पिछले जुलाई में पक्षपात और हेरफेर की जांच के लिए एल्गोरिदम तक पहुंच मांगी थी, जिसे X ने “राजनीतिक रूप से प्रेरित” बताकर ठुकरा दिया था।
वर्तमान में एल्गोरिदम पूर्वाग्रह पर EU की जांच और डीपफेक के लिए ग्रोक के इस्तेमाल को लेकर विवाद गहराया हुआ है। ऐसे में एल्गोरिदम को ओपन-सोर्स करना इन कानूनी दवाबों का एक जवाब भी माना जा रहा है।
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ग्रोक की इमेज-जेनरेशन क्षमताएं और अंतरराष्ट्रीय विवाद
मस्क के AI चैटबॉट ग्रोक को केवल तारीफें ही नहीं, बल्कि कड़ी आलोचना का भी सामना करना पड़ा है। X पर महिलाओं और बच्चों को सेक्शुअलाइज़ करने वाली AI-जेनरेटेड तस्वीरों की बाढ़ आने के बाद ग्लोबल रेगुलेटर्स भड़क उठे हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि इंडोनेशिया ने सेक्शुअल कंटेंट की जांच के बाद ग्रोक तक पहुंच ही ब्लॉक कर दी।
वहीं, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने मस्क को कड़ी चेतावनी देते हुए “अपना काम ठीक करने” को कहा है। टेक्नोलॉजी सेक्रेटरी लिज़ केंडल ने तो यहाँ तक कह दिया है कि यदि X ब्रिटिश कानूनों का पालन नहीं करता, तो यूके में इसकी सेवाओं को ब्लॉक किया जा सकता है। इन विवादों के बीच, ग्रोक AI और फीड क्वालिटी को बनाए रखना मस्क के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
तकनीकी चुनौतियां और ओपन-सोर्स के संभावित जोखिम
ओपन-सोर्सिंग के अपने खतरे भी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पूरे सिस्टम का कोड सार्वजनिक होने से इसका दुरुपयोग भी हो सकता है। जहाँ एक तरफ डेवलपर्स इसे ‘फोर्क’ करके अपने खुद के एप्लिकेशन बना सकेंगे और विज्ञापनदाताओं को रीच मैकेनिक्स की स्पष्ट जानकारी मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर हेरफेर का जोखिम भी बढ़ जाएगा।
CSAM (चाइल्ड सेक्सुअल अब्यूज मटेरियल) और बिना सहमति वाली इमेजरी के मामलों में ग्रोक की भूमिका पर EU पहले से ही 2026 तक रिटेंशन ऑर्डर बढ़ा चुका है। ऐसे में कोड सार्वजनिक होने के बाद होने वाले ऑडिट कंपनी के लिए “तूफानी मौसम” जैसा साबित हो सकते हैं।
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भविष्य की राह: ग्रोक-3 और नए फीचर्स का इंतजार
तमाम विवादों के बावजूद, मस्क पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। ग्रोक-3 के विकास के साथ ही X के रिकमेंडेशन इंजन को पूरी तरह स्वायत्त बनाने की तैयारी चल रही है। शुक्रवार से ग्रोक ने यूजर्स को सूचित करना शुरू कर दिया है कि इमेज बनाने और एडिट करने की सुविधाएं अब केवल पेड सब्सक्राइबर्स के लिए होंगी, जो पहले डेली लिमिट के साथ मुफ्त थीं।
कंपनी का लक्ष्य नवंबर तक नए फीचर्स रोल आउट करना है। अब देखना यह होगा कि सात दिनों के भीतर एल्गोरिदम के ओपन-सोर्स होने से यूजर्स का अनुभव कितना बदलता है और क्या मस्क रेगुलेटर्स के सवालों का संतोषजनक जवाब दे पाते हैं।
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