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डोभाल परिवार और विवाद: टैक्स हेवन और बदले वाली स्पीच

डोभाल परिवार और विवाद

डोभाल परिवार और विवाद का नाता काफी पुराना है, लेकिन हालिया घटनाओं ने इसे एक बार फिर देश की सबसे बड़ी बहस बना दिया है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल, जो अपनी छवि एक सख्त और निडर रणनीतिकार के रूप में रखते हैं, आज अपने ही बेटों के व्यावसायिक हितों और अपनी ‘विवादास्पद’ भाषा के कारण कटघरे में हैं।

एक तरफ वे आम भारतीय युवाओं से राष्ट्रवाद और इतिहास का बदला लेने का आह्वान कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ उनके अपने परिवार के तार उन टैक्स हेवन्स और देशों से जुड़े हैं, जिन्हें भारत अपनी सुरक्षा के लिए चुनौती मानता रहा है। यह विरोधाभास आज चर्चा के केंद्र में है।

विवेक डोभाल: कैमन आइलैंड्स, हेज फंड और डिमॉनेटाइजेशन का ‘संयोग’

NSA के छोटे बेटे विवेक डोभाल को लेकर डोभाल परिवार और विवाद की सबसे बड़ी परत 2019 में खुली थी। ‘द कारवां’ मैगजीन की एक विस्तृत जांच रिपोर्ट ने देश को चौंका दिया था। विवेक डोभाल, जो एक ब्रिटिश नागरिक (OCI कार्ड धारक) हैं और सिंगापुर में रहते हैं, वहां ‘GNY Asia Fund’ नामक एक हेज फंड चलाते हैं।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह फंड कैमन आइलैंड्स में रजिस्टर्ड है, जिसे दुनिया का कुख्यात टैक्स हेवन माना जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, यह फंड 2016 के डिमॉनेटाइजेशन (नोटबंदी) के महज 13 दिन बाद शुरू किया गया था।

हालांकि विवेक ने इन आरोपों को “निराधार” बताते हुए मानहानि का केस किया और खुद को एक “प्राउड OCI और UK सिटीजन” बताया, लेकिन हालिया 2025-2026 की मीडिया रिपोर्ट्स (जैसे OneIndia और Threads पोस्ट्स) पुष्टि करती हैं कि उनका आधार आज भी सिंगापुर और यूके ही है।

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शौर्य डोभाल: पाकिस्तानी पार्टनर और सऊदी कनेक्शन की अनसुलझी पहेली

बड़े बेटे शौर्य डोभाल पर लगे आरोप और भी गंभीर हैं। 2017 में कांग्रेस ने मुद्दा उठाया था कि शौर्य के बिजनेस पार्टनर सैयद अली अब्बास कथित तौर पर पाकिस्तानी मूल के थे। इसके अलावा, उनकी कंपनियों (Gemini Financial Services और Zeus Caps, जिसे बाद में Torch Investment कहा गया) में सऊदी प्रिंस मिशाल बिन अब्दुल्लाह की भागीदारी का भी जिक्र आया था।

कारवां की रिपोर्ट्स बताती हैं कि डोभाल भाइयों का व्यावसायिक जाल कैमन फंड्स और सऊदी कनेक्शनों के बीच उलझा हुआ है।

भले ही शौर्य अब भारतीय नागरिक हैं और उत्तराखंड बीजेपी के कार्यकारी सदस्य होने के साथ ‘इन्डिया फाउंडेशन’ जैसा प्रभावशाली थिंक टैंक चला रहे हैं, लेकिन 2017-2019 के दौरान उनके पाकिस्तानी और सऊदी लिंक्स पर आज तक कोई ठोस खंडन सामने नहीं आया है।

बदले की भावना या राजनीतिक ‘डॉग विसल’? डोभाल की नई स्पीच का सच

10 जनवरी 2026 को भारत मंडपम में ‘विकसित भारत यंग लीडर डायलाग’ के दौरान अजीत डोभाल ने जो भाषण दिया, उसने डोभाल परिवार और विवाद को नई ऊंचाई दे दी। 3,000 युवाओं के सामने उन्होंने कहा, “बदला (Revenge) एक अच्छा शब्द नहीं है, लेकिन यह एक बड़ी शक्ति हो सकती है।

हमें अपने इतिहास का बदला लेना होगा।” उन्होंने मंदिर लूटने, गांव जलाए जाने और पूर्वजों की “गहरी लाचारी” का जिक्र करते हुए गांधी, बोस और भगत सिंह का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि भारत को केवल सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास में मजबूत बनकर इतिहास का बदला लेना चाहिए।

हालांकि, पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने इसे ‘डॉग विसल’ करार देते हुए कहा कि ऐसी भाषा 21वीं सदी में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा को सामान्य बनाने और युवाओं को उकसाने का काम करती है।

हाइपोक्रिसी की पराकाष्ठा: खुद के लिए विदेशी पासपोर्ट, जनता के लिए बलिदान

अजीत डोभाल के व्यक्तित्व में यह दोहरा चरित्र स्पष्ट दिखाई देता है। 2011 में उन्होंने बीजेपी को सौंपी एक रिपोर्ट में टैक्स हेवन्स के खिलाफ बेहद सख्त कार्रवाई की वकालत की थी, लेकिन आज उनके अपने बेटे का व्यवसाय उसी कैमन आइलैंड्स से संचालित हो रहा है।

सवाल यह उठता है कि क्या देशभक्ति, बलिदान और ब्लैक मनी के खिलाफ नीतियां केवल आम नागरिकों के लिए हैं? विवेक डोभाल ने कोर्ट में भले ही कहा हो कि लेख उनके पिता से “स्कोर सेटल” करने के लिए था, लेकिन विडंबना यह है कि जब आम भारतीयों से “ऐतिहासिक बदला” लेने की मांग की जाती है, तब उनके अपने बच्चे विदेशी पासपोर्ट और वैश्विक सुख-सुविधाओं के साथ सुरक्षित जीवन जी रहे होते हैं।

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विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन (VIF): वैचारिक जहर या सुरक्षा रणनीति?

डोभाल का आरएसएस (RSS) से गहरा जुड़ाव सर्वविदित है। 2009 में उन्होंने विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन (VIF) की स्थापना की थी। यद्यपि VIF खुद को स्वतंत्र बताता है, लेकिन यह विवेकानंद केंद्र से जुड़ा है जिसकी स्थापना RSS नेता एकनाथ रानाडे ने की थी।

विकिपीडिया और कारवां की रिपोर्ट्स स्पष्ट करती हैं कि VIF के बीजेपी और संघ के साथ मजबूत लिंक हैं और सरकार की कई नीतियां यहीं से जन्म लेती हैं। आलोचकों का मानना है कि डोभाल ने स्वामी विवेकानंद की सहिष्णुता और एकता की शिक्षाओं को हिंदुत्व की संकीर्ण राजनीति में बदल दिया है।

NSA बनने के बाद उनकी स्पीचें अब “इतिहास के बदले” और “सभ्यतागत संघर्ष” जैसे शब्दों से भर गई हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा को वैचारिक जहर की ओर धकेल रही हैं।

इन्डिया फाउंडेशन और हाइब्रिड वारफेयर: विभाजन की नई जमीन

VIF और शौर्य डोभाल द्वारा संचालित ‘इन्डिया फाउंडेशन’ दोनों ही संघ की छत्रछाया में काम करते हैं, जहां विदेशी फंडिंग और नीति-निर्माण का खेल चलता है। डोभाल परिवार और विवाद का यह पहलू सबसे खतरनाक है क्योंकि यहाँ राष्ट्रवाद का मुखौटा पहनकर पर्दे के पीछे से सांप्रदायिक एजेंडा चलाया जा रहा है।

डोभाल का मानना है कि युद्ध मनोबल तोड़ने के लिए लड़े जाते हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि यह रणनीति अब घरेलू स्तर पर भी लागू की जा रही है। “सभ्यतागत संघर्ष” की उनकी थ्योरी मुसलमानों को ‘बाहरी’ बताने का एक परोक्ष तरीका मानी जा रही है, जो भारत की आंतरिक अखंडता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकती है।

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राष्ट्रीय सुरक्षा या परिवार का स्वर्णिम भविष्य?

अंततः, अजीत डोभाल की यह दोहरी जिंदगी भारत की असली सुरक्षा के लिए एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। एक तरफ परिवार के लिए वैश्विक सुख-सुविधाएं, ब्रिटिश/OCI नागरिकता, टैक्स हेवन फंड्स और सऊदी-पाक कनेक्शन हैं, और दूसरी तरफ आम युवाओं के लिए इतिहास के बदले की आग।

अगर NSA का प्राथमिक रोल देश को एकजुट रखना है, तो डोभाल की रणनीति इसके ठीक विपरीत सामाजिक विभाजन पैदा कर रही है। स्वामी विवेकानंद की विरासत को नुकसान पहुंचाकर और सांप्रदायिक तनाव को हवा देकर क्या वास्तव में भारत सुरक्षित हो रहा है?

यह समय है कि इस “राष्ट्रीय” सलाहकार की भूमिका की गंभीरता से समीक्षा की जाए, वरना भारत की एकता को बाहरी दुश्मनों से पहले इसी आंतरिक वैचारिक जहर से खतरा हो सकता है।

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