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जम्मू-कश्मीर राज्यसभा चुनाव: NC की जीत, सत शर्मा ने चौंकाया

सत शर्मा राज्यसभा जीत

सत शर्मा राज्यसभा जीत केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू-कश्मीर में हुए पहले राज्यसभा चुनाव के नतीजे उम्मीद के मुताबिक ही रहे। सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) ने शुक्रवार को चार में से तीन सीटें जीतकर अपनी राजनीतिक पकड़ को मजबूत किया, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जम्मू-कश्मीर इकाई के प्रमुख सत शर्मा ने अंतिम और चौथी सीट पर कब्जा जमाया।

यह सत शर्मा राज्यसभा जीत मुख्य रूप से कुछ निर्दलीय उम्मीदवारों द्वारा संभावित रणनीतिक क्रॉस-वोटिंग और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस (पीसी) के मतदान से दूर रहने के कारण मिली। चार राज्यसभा सीटों के लिए शुक्रवार को मतदान हुआ था, जिसे चुनाव आयोग द्वारा तीन अधिसूचनाओं में विभाजित किया गया था।

यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि गुलाम नबी आज़ाद और नज़ीर अहमद लावे के कार्यकाल पूरा होने के बाद 15 फरवरी, 2021 से इस केंद्र शासित प्रदेश का संसद के उच्च सदन में कोई प्रतिनिधित्व नहीं था।

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पहला और दूसरा मुकाबला: एनसी का दबदबा

पहली सीट पर, नेशनल कॉन्फ्रेंस के चौधरी मोहम्मद रमजान का भाजपा के अली मोहम्मद मीर से सीधा मुकाबला था। विधानसभा सचिव और रिटर्निंग ऑफिसर एम के पंडिता ने संवाददाताओं को बताया कि कुल 87 वोटों में से नेशनल कॉन्फ्रेंस उम्मीदवार रमजान को 58 वोट मिले, जबकि भाजपा को केवल 28 वोट ही मिले।

इस प्रक्रिया में एक वोट खारिज कर दिया गया। दूसरी सीट पर भी नेशनल कॉन्फ्रेंस के सज्जाद किचलू ने भाजपा के राकेश महाजन के खिलाफ सीधी टक्कर में जीत हासिल की। किचलू को 57 वोट मिले और भाजपा को 29 वोट मिले, जबकि इस सीट के लिए दो वोट खारिज कर दिए गए। इन दोनों जीतों ने एनसी के खेमे में जश्न का माहौल बना दिया।

तीसरी अधिसूचना: कांटे की टक्कर और सत शर्मा की निर्णायक जीत

तीसरी अधिसूचना में दो सीटों के लिए चुनाव हुआ, जिसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस ने दो उम्मीदवार उतारे थे – जी एस ओबेरॉय, जिन्हें शम्मी ओबेरॉय के नाम से भी जाना जाता है, और इमरान नबी डार। दूसरी ओर, भाजपा ने अपनी जम्मू-कश्मीर इकाई के प्रमुख सत शर्मा को मैदान में उतारा था।

पंडिता ने बताया कि इस मुकाबले में ओबेरॉय को 31 वोट मिले, डार को केवल 21 वोट ही मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार सत शर्मा को 32 वोट मिले। इस सीट पर तीन वोट अवैध घोषित कर दिए गए। नेशनल कॉन्फ्रेंस के लंबे समय से सदस्य और कोषाध्यक्ष ओबेरॉय ने भाजपा के सतपाल शर्मा को हराकर तीसरी सीट जीती।

हालांकि, सत शर्मा चौथी सीट जीतने में कामयाब रहे, जहाँ उन्हें 32 वोट मिले, जबकि डार को 22 वोट मिले। भाजपा के मतों की गिनती से स्पष्ट हुआ कि पार्टी को अपने 28 विधायकों के अलावा चार और वोट मिले, जो संभवतः निर्दलीय विधायकों के थे। इस सत शर्मा राज्यसभा जीत ने सबको चौंका दिया।

उमर अब्दुल्ला का दावा: पार्टी के वोट बरकरार, क्रॉस वोटिंग पर सवाल

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राज्यसभा के लिए चुने गए तीनों नेशनल कॉन्फ्रेंस उम्मीदवारों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि चारों चुनावों में पार्टी के सभी वोट सुरक्षित रहे, और चुनाव एजेंट ने प्रत्येक मतदान पर्ची देखी। उन्होंने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, “हमारे किसी भी विधायक ने क्रॉस-वोटिंग नहीं की।

तो सवाल उठता है—भाजपा के चार अतिरिक्त वोट कहाँ से आए? वे विधायक कौन थे जिन्होंने वोट देते समय गलत वरीयता संख्या डालकर जानबूझकर अपने वोट रद्द कर दिए?” अब्दुल्ला ने तीखे सवाल उठाते हुए पूछा कि किस दबाव या प्रलोभन ने उन विधायकों को भाजपा की मदद करने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने हारने वाले उम्मीदवार इमरान नबी डार के लिए भी प्रोत्साहन भरे शब्द कहे और कहा कि उन्हें जिताने की पूरी कोशिश की गई, लेकिन आखिरी समय में निराश होना पड़ा।

सज्जाद लोन का गंभीर आरोप: ‘फिक्स्ड मैच’

जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के प्रमुख और उत्तरी कश्मीर के हंदवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के विधायक सज्जाद लोन ने राज्यसभा चुनाव के नतीजों की कड़ी आलोचना करते हुए इसे सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस और विपक्षी भाजपा के बीच एक “फिक्स्ड मैच” बताया।

उन्होंने चुनाव में मतदान से परहेज किया था और नतीजों के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। लोन ने कहा, “तो भाजपा चौथी सीट जीत जाती है। जैसा कि अनुमान लगाया गया था – एक फिक्स्ड मैच; बुराई की धुरी – एनसी और भाजपा।” उन्होंने कहा, “भगवान का शुक्र है कि मैंने मतदान नहीं किया।

सोचिए मेरी क्या हालत होती। अब, यह गणितीय रूप से सिद्ध हो गया है कि यह एक फिक्स मैच था।” उन्होंने सवाल उठाया कि एनसी ने उम्मीदवार तीन के लिए अतिरिक्त वोट क्यों डाले, जबकि उन्हें इसकी ज़रूरत नहीं थी, और यह भी पूछा कि किसके वोट खारिज हुए और किसकी मिलीभगत थी।

इमरान नबी डार का ‘खरीद-फरोख्त’ का आरोप

हारे हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस के उम्मीदवार इमरान नबी डार ने सीधे तौर पर भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया। उन्होंने चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद यहां संवाददाताओं से कहा, “भाजपा के पास यह सीट जीतने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं थी। उनके पास केवल 28 विधायक थे। उन्हें 32 कैसे मिल गए?

यह स्पष्ट है कि विधायकों की खरीद-फरोख्त हुई है।” डार ने दावा किया कि भाजपा ने ज़रूर चार वोट “खरीदे” होंगे। उन्होंने कहा कि उन चार लोगों ने हमें वोट देने का वादा किया था और अगर उनमें ज़रा भी शर्म बची है, तो उन्हें आगे आकर स्वीकार करना चाहिए कि उन्होंने भाजपा को वोट दिया।

डार ने कहा कि पार्टी “उन सभी लोगों का पर्दाफाश करने” के लिए काम कर रही है जिन्होंने क्रॉस-वोटिंग की। उधर, भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने कहा, “अगर कोई खुद हमारे पास आने को तैयार है, तो हमें उसे खरीदने की ज़रूरत नहीं है। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने धर्म और क्षेत्र के आधार पर वोटों को एकजुट करने की कोशिश की।”

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राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया और जश्न का माहौल

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने राज्यसभा चुनाव जीतने वाले नेशनल कॉन्फ्रेंस के तीन उम्मीदवारों को बधाई दी और उम्मीद जताई कि वे जम्मू-कश्मीर के लोगों का मज़बूती से प्रतिनिधित्व करेंगे। पीडीपी ने चुनावों में “भाजपा को दूर रखने” के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस को समर्थन देने की घोषणा की थी।

जम्मू-कश्मीर कांग्रेस प्रमुख तारिक हमीद कर्रा ने भी नेशनल कॉन्फ्रेंस को “तीन सुरक्षित सीटें हासिल करने और चौथी असुरक्षित सीट के लिए कड़ी टक्कर देने” के लिए बधाई दी। नतीजों के आते ही, विधानसभा लॉन और उत्तरी कश्मीर के हंदवाड़ा सहित कई स्थानों पर दोनों पार्टियों के समर्थकों में जश्न का माहौल बन गया।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के समर्थकों ने विजयी उम्मीदवारों और उमर अब्दुल्ला के पक्ष में नारे लगाए, जिनमें “वोट चोर, गद्दी चोर” के नारे भी शामिल थे। दूसरी ओर, भाजपा समर्थकों ने भी विधानसभा लॉन में अपने विजयी उम्मीदवार सत शर्मा के पक्ष में नारे लगाए। भाजपा प्रवक्ता बलबीर राम रतन ने कहा कि यह सत शर्मा राज्यसभा जीत जनता और उनके प्रतिनिधियों, दोनों के भाजपा की नीतियों में पूर्ण विश्वास का स्पष्ट प्रतिबिंब है।

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चुनावों की पृष्ठभूमि और भविष्य की राजनीतिक बिसात

यह चुनाव जम्मू-कश्मीर विधानसभा के लिए 10 साल बाद हुए। अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद यह केंद्र शासित प्रदेश में उच्च सदन के लिए पहली बार चुनाव था। विधानसभा में, नेशनल कॉन्फ्रेंस के 41, कांग्रेस के छह, पीडीपी के तीन, और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के एक विधायक हैं।

सात निर्दलीय हैं और भाजपा के पास 28 सीटें हैं। चुनावों से पहले, पीडीपी ने एनसी को समर्थन देने का वादा किया था और अधिकांश निर्दलीय विधायकों से सत्तारूढ़ गठबंधन का समर्थन करने की अटकलें थीं। गुप्त मतदान वाले इस चुनाव में, पार्टियों से जुड़े विधायकों को अपनी-अपनी पार्टी के एजेंटों को वोटिंग स्लिप दिखानी होती है, लेकिन निर्दलीय उम्मीदवारों के लिए ऐसी कोई आवश्यकता नहीं थी।

इस सत शर्मा राज्यसभा जीत के बाद, अब जम्मू-कश्मीर में नगरोटा और बडगाम विधानसभा क्षेत्रों के लिए उपचुनाव 11 नवंबर को होने हैं, जो भविष्य की राजनीतिक बिसात के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

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