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भारत की प्रहार नीति: पहली बार राष्ट्रीय एंटी-टेरर डॉक्ट्रिन लॉन्च

भारत की प्रहार नीति

भारत की प्रहार नीति आज देश की सुरक्षा के इतिहास में एक मील का पत्थर बन गई है, जब केंद्र सरकार ने आधिकारिक तौर पर भारत की पहली राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी नीति ‘प्रहार’ को सार्वजनिक किया। सोमवार, 23 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में एक उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक के बाद जारी इस नीति का मुख्य उद्देश्य सीमा पार से होने वाले आतंकवाद, साइबर खतरों और आधुनिक ड्रोन हमलों के खिलाफ एक एकीकृत मोर्चा बनाना है।

इससे पहले भारत के पास अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों के लिए अलग-अलग गाइडलाइंस तो थीं, लेकिन पूरे देश के लिए एक साझा ‘एंटी-टेरर डॉक्ट्रिन’ की कमी हमेशा महसूस की जाती रही।

‘प्रहार’ के जरिए अब थल, नभ, जल और डिजिटल स्पेस में आतंकवाद के खिलाफ एक साथ प्रहार करने की शक्ति भारत को मिल गई है। यह नीति स्पष्ट संदेश देती है कि भारत अब रक्षात्मक नहीं, बल्कि प्रो-एक्टिव सुरक्षा मॉडल पर काम करेगा।

सीमा पार आतंकवाद पर सीधा वार: अब केवल बचाव नहीं, आक्रामक होगा भारत

इस भारत की प्रहार नीति के तहत सबसे बड़ा बदलाव भारत के रणनीतिक रुख में आया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अब भारत किसी हमले का इंतजार नहीं करेगा, बल्कि आतंकी खतरों को उनके स्रोत पर ही खत्म करने की क्षमता विकसित करेगा।

इस नीति में ‘क्रॉस-बॉर्डर टेरर’ को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया गया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि यदि खुफिया इनपुट किसी बड़े खतरे की पुष्टि करते हैं, तो भारत सीमा पार जाकर भी ऑपरेशन करने से पीछे नहीं हटेगा।

इसके लिए स्पेशल फोर्सेस और खुफिया एजेंसियों के बीच रीयल-टाइम डेटा शेयरिंग के लिए एक नया ‘ग्रिड’ तैयार किया जा रहा है। यह डॉक्ट्रिन उन ताकतों को चेतावनी है जो भारत की सीमाओं के पास आतंकी ढांचे को पालती-पोसती हैं।

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ड्रोन और साइबर खतरों का मुकाबला: आधुनिक युद्ध के लिए ‘प्रहार’ की नई तकनीक

आज के दौर में आतंकवाद केवल हथियारों तक सीमित नहीं रह गया है, और भारत की प्रहार नीति इसी कड़वी हकीकत को पहचानती है। द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, ‘प्रहार’ में पहली बार ड्रोन हमलों और साइबर टेररिज्म को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़े उभरते खतरों के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

सरकार अब सीमाओं पर आधुनिक ‘एंटी-ड्रोन सिस्टम’ तैनात करने और देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे जैसे पावर ग्रिड और न्यूक्लियर प्लांट्स को साइबर हमलों से बचाने के लिए एक समर्पित कमांड सेंटर बना रही है।

‘प्रहार’ के जरिए भारत अब डिजिटल और एरियल स्पेस में एक अभेद्य दीवार खड़ी करने जा रहा है ताकि तकनीक का इस्तेमाल कर आतंकी किसी भी तरह की सेंध न लगा सकें।

एजेंसियों का महाविलय: ‘प्रहार’ के तहत एक कमांड सेंटर से चलेगा पूरा ऑपरेशन

एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, भारत की प्रहार नीति का एक क्रांतिकारी हिस्सा विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल बिठाना है। अक्सर देखा गया है कि खुफिया इनपुट होने के बावजूद एजेंसियां आपसी समन्वय की कमी के कारण समय पर कार्रवाई नहीं कर पातीं।

‘प्रहार’ इस समस्या को खत्म करने के लिए एक ‘नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर’ (NCTC) जैसा ढांचा तैयार कर रहा है, जहाँ एनआईए (NIA), आईबी (IB), रॉ (R&AW) और राज्यों की एटीएस (ATS) टीमें एक ही प्लेटफॉर्म पर काम करेंगी।

इससे आतंकी वित्तपोषण (Terror Funding) और स्लीपर सेल्स के नेटवर्क को तोड़ने में बहुत आसानी होगी। यह एक ऐसा ‘हैमर’ (Hammer) होगा जो आतंकवाद के हर छोटे-बड़े तंत्र को जड़ से उखाड़ फेंकने की ताकत रखेगा।

भारत की आंतरिक सुरक्षा का कवच: राज्यों के साथ मिलकर बनेगा सुरक्षा का ताना-बाना

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की प्रहार नीति केवल केंद्र की नहीं, बल्कि पूरे देश की साझी जिम्मेदारी है। इसमें राज्यों की पुलिस और विशेष दस्तों को आधुनिक हथियार और ट्रेनिंग देने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।

‘प्रहार’ नीति मानती है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में स्थानीय पुलिस पहली सुरक्षा पंक्ति होती है, इसलिए उन्हें तकनीकी रूप से सशक्त बनाना अनिवार्य है।

नीति के तहत पूरे देश में एक ‘यूनिफाइड टेरर डेटाबेस’ बनाया जाएगा, जिससे किसी भी संदिग्ध अपराधी की पहचान पलक झपकते ही किसी भी राज्य में की जा सकेगी। यह आंतरिक सुरक्षा का वह कवच है जो कश्मीर से लेकर केरल तक हर नागरिक को सुरक्षित महसूस कराएगा।

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जेन-जी और मिलेनियल्स की सुरक्षा: डिजिटल स्पेस में कट्टरपंथ के खिलाफ जंग

आज की युवा पीढ़ी सबसे ज्यादा समय इंटरनेट पर बिताती है, और आतंकी संगठन इसी का फायदा उठाकर उन्हें कट्टरपंथी बनाने की कोशिश करते हैं। ‘प्रहार’ नीति में सोशल मीडिया मॉनिटरिंग और ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन को रोकने के लिए विशेष ‘साइबर वॉरियर्स’ की भर्ती का प्लान है।

युवाओं को आतंकवाद के दुष्प्रचार से बचाने के लिए यह नीति एक ‘सॉफ्ट पावर’ दृष्टिकोण भी अपनाती है, जिसमें सामुदायिक भागीदारी और शिक्षा के माध्यम से शांति का संदेश फैलाया जाएगा। जेन-जी के लिए यह समझना जरूरी है कि राष्ट्रीय सुरक्षा अब केवल सीमाओं पर बंदूक थामने तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल वर्ल्ड में सही सूचना के साथ खड़े रहना भी देश की सुरक्षा में योगदान देना है।

वैश्विक पटल पर भारत का बढ़ता कद: दुनिया देखेगी भारत का ‘प्रहार’ मॉडल

भारत द्वारा अपनी पहली एंटी-टेरर नीति जारी करना वैश्विक स्तर पर एक बड़ा संदेश है। अब तक भारत दुनिया के सामने आतंकवाद का रोना रोता था, लेकिन अब भारत ने अपनी खुद की एक ऐसी नियमावली तैयार कर ली है जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘प्रहार’ नीति भारत को सुरक्षा के मामले में इजरायल और अमेरिका जैसे देशों की श्रेणी में खड़ा कर देगी। यह नीति अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के उस तर्क को मजबूती देगी कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी तरह का ‘अच्छा आतंक’ या ‘बुरा आतंक’ नहीं हो सकता। भारत अब वैश्विक स्तर पर काउंटर-टेररिज्म ट्रेनिंग और सहयोग में एक लीडर की भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

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शांति की ओर बढ़ता भारत और सुरक्षित कल का संकल्प

अंततः, भारत की प्रहार नीति उस संकल्प का नाम है जो हर भारतीय को आतंकवाद मुक्त भविष्य देने का वादा करता है। एक वरिष्ठ पत्रकार के रूप में मेरा मानना है कि नीतियां तो बहुत बनती हैं, लेकिन ‘प्रहार’ की सफलता इसके जमीनी कार्यान्वयन पर निर्भर करेगी।

जिस तरह से इसमें आधुनिक खतरों को शामिल किया गया है, वह सरकार की दूरदर्शी सोच को दर्शाता है। हम एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रहे हैं जहाँ सुरक्षा केवल हथियारों से नहीं, बल्कि बुद्धिमत्ता और तकनीक के तालमेल से सुनिश्चित होगी। ‘प्रहार’ भारत की उसी शक्ति और स्वाभिमान का प्रतीक है जो शांति के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

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