मुंबई में फलों पर चूहा मार जहर: दो वेंडर्स मलाड में गिरफ्तार
फलों पर चूहा मार जहर लगाने की यह घटना मुंबई के उपनगरीय इलाके मलाड से सामने आई है, जिसने पूरे शहर में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। बुधवार, 25 फरवरी 2026 को सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि रेहड़ी-पटरी पर फल बेचने वाले कुछ दुकानदार अपने फलों पर कीड़े-मकोड़ों या चूहों से बचाने के नाम पर घातक पेस्टिसाइड और चूहा मारने वाले जहर का छिड़काव कर रहे थे।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, यह वीडियो सामने आने के तुरंत बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। मुंबई जैसे महानगर में, जहाँ लाखों लोग रोज सड़कों से फल खरीदकर खाते हैं, वहां इस तरह की जानलेवा लापरवाही सीधे तौर पर हत्या के प्रयास जैसी है।
सीसीटीवी में कैद हुई दरिंदगी: कैसे ग्राहकों की जान से खिलवाड़ कर रहे थे दुकानदार
मिड-डे की रिपोर्ट के मुताबिक, मलाड पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दो वेंडर्स को गिरफ्तार कर लिया है। वीडियो में अपराधी किस्म के ये दुकानदार चुपके से फलों की टोकरियों के नीचे और ऊपर फलों पर चूहा मार जहर का लेप लगाते हुए पकड़े गए।
बताया जा रहा है कि यह सब इसलिए किया जा रहा था ताकि गोदाम या रेहड़ी के आसपास चूहे न आएं और फलों को नुकसान न पहुँचाएं। लेकिन उन्हें इस बात की जरा भी परवाह नहीं थी कि वही जहर फलों के छिलकों के जरिए आम आदमी के पेट तक पहुँच सकता है। पुलिस ने मौके से जहर के पैकेट भी बरामद किए हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
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इंडिया टुडे का खुलासा: क्या मुंबई के हर कोने में बिक रहा है ऐसा ही ‘मीठा जहर’?
इस घटना के बाद इंडिया टुडे ने अपनी पड़ताल में पाया कि फलों पर चूहा मार जहर लगाने का यह ट्रेंड केवल मलाड तक सीमित नहीं हो सकता। कई छोटे वेंडर्स स्टोरेज की समस्या और चूहों के आतंक से बचने के लिए ऐसे खतरनाक शॉर्टकट्स अपनाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि चूहा मार जहर में जिंक फास्फाइड या वारफारिन जैसे तत्व होते हैं, जो इंसानों के लिए बेहद घातक साबित हो सकते हैं। अगर इसे सही से साफ न किया जाए, तो यह किडनी फेलियर या नर्वस सिस्टम को स्थायी नुकसान पहुँचा सकता है। यह खबर सामने आने के बाद अब लोग बाजार से फल खरीदने में भी कतरा रहे हैं, जिससे ईमानदार दुकानदारों के धंधे पर भी असर पड़ रहा है।
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी की नींद टूटी: एफडीए ने शुरू किया छापेमारी अभियान
जैसे ही फलों पर चूहा मार जहर की खबर नेशनल मीडिया में आई, महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) और FSSAI ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मुंबई के विभिन्न इलाकों जैसे अंधेरी, बोरीवली और दादर में फलों की मंडियों पर अचानक छापेमारी शुरू कर दी गई है।
अधिकारियों ने सैंपल कलेक्ट किए हैं और वेंडर्स को सख्त चेतावनी दी है कि अगर किसी भी फल में प्रतिबंधित केमिकल या जहर के अंश मिले, तो उनका लाइसेंस रद्द करने के साथ-साथ उन पर गैर-जमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। प्रशासन ने जनता से भी अपील की है कि वे कटे हुए फल न खरीदें और साबुत फलों को भी अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें।
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जेन-जी और सोशल मीडिया आउटरेज: ‘स्ट्रीट फूड’ लवर्स के लिए वेक-अप कॉल
मुंबई की जेन-जी पीढ़ी, जो अक्सर अपनी लाइफस्टाइल में बाहर के जूस और फलों पर निर्भर रहती है, इस खबर से सबसे ज्यादा प्रभावित है। इंस्टाग्राम और ट्विटर (X) पर #MumbaiFoodSafety और #FruitScandal ट्रेंड कर रहा है। युवा यूजर्स वीडियो शेयर करते हुए सवाल उठा रहे हैं कि क्या हम अपनी सेहत के साथ रोज ‘रूसी रूलेट’ खेल रहे हैं?
इन्फ्लुएंसर्स अब आर्गेनिक फार्मिंग और डायरेक्ट फार्मर परचेज को बढ़ावा देने की बात कर रहे हैं। यह घटना उन लोगों के लिए एक बड़ा सबक है जो बिना जांचे-परखे कहीं से भी खाने-पीने की चीजें उठा लेते हैं। युवाओं का गुस्सा इस बात पर भी है कि प्रशासन केवल वीडियो वायरल होने के बाद ही क्यों जागता है।
कैसे पहचानें जहरीले फल: घर पर अपनी और परिवार की सुरक्षा कैसे करें?
इस डरावनी स्थिति में खुद को बचाना ही एकमात्र उपाय है। डॉक्टरों का सुझाव है कि अगर फलों पर कोई अजीब सी सफेद परत, चिपचिपाहट या तीखी गंध आ रही हो, तो उसे बिल्कुल न खरीदें। फलों को खाने से पहले कम से कम 20 मिनट तक गुनगुने पानी और नमक के घोल में भिगोकर रखें।
मुमकिन हो तो छिलका उतारकर ही फल का सेवन करें। फलों पर चूहा मार जहर जैसी चीजें अक्सर फलों की सतह पर रह जाती हैं, जो साधारण पानी से धोने पर नहीं निकलतीं। इसलिए विनेगर या बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करना अधिक सुरक्षित माना जाता है। अपनी सुरक्षा अपने हाथ में है, और जागरूकता ही इसका सबसे बड़ा हथियार है।
कानूनी कार्रवाई का शिकंजा: आरोपियों को क्या होगी सजा?
मलाड में पकड़े गए दोनों वेंडर्स पर आईपीसी की धारा 272 (मिलावट), 273 (हानिकारक भोजन की बिक्री) और 308 (गैर इरादतन हत्या का प्रयास) के तहत मामला दर्ज किया गया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अपराधों में कड़ी सजा का प्रावधान होना चाहिए ताकि अन्य मिलावटखोरों के मन में डर पैदा हो।
मुंबई की एक अदालत ने आरोपियों को पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इनके पीछे कोई बड़ा गिरोह है जो सड़े-गले फलों को चमकाने या उन्हें सुरक्षित रखने के लिए ऐसे रसायनों का बड़े पैमाने पर सप्लाई करता है।
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मुनाफे की भूख और मासूम जानों के बीच का खूनी संघर्ष
अंततः, मुंबई की यह घटना हमारे समाज के उस गिरे हुए नैतिक स्तर को दिखाती है जहाँ चंद रुपयों के मुनाफे के लिए किसी की जान की परवाह नहीं की जाती। एक वरिष्ठ पत्रकार के रूप में मेरा मानना है कि जब तक सख्त कानून और नियमित चेकिंग नहीं होगी, तब तक ऐसे अपराधी हमारे प्लेट तक पहुँचते रहेंगे।
हमें एक उपभोक्ता के तौर पर जागरूक होना होगा और प्रशासन को जवाबदेह बनाना होगा। फल स्वास्थ्य के लिए होते हैं, लेकिन अगर उन पर मौत का सामान छिड़का जा रहा हो, तो यह पूरे सिस्टम की विफलता है। उम्मीद है कि यह गिरफ्तारी केवल एक शुरुआत होगी और मुंबई की सड़कों पर बिकने वाला हर फल सुरक्षित होगा।
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