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मुंबई में “BMC कचरा प्रबंधन रिपोर्ट” का होगा पूर्ण निजीकरण,

BMC कचरा प्रबंधन रिपोर्ट

BMC कचरा प्रबंधन रिपोर्ट देश की आर्थिक राजधानी मुंबई को कूड़े के ढेरों और प्रदूषण से निजात दिलाने के लिए बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने एक बेहद आक्रामक और दूरगामी कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनिवार्य किए गए ‘ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026’ के अनुपालन में बीएमसी ने गुरुवार (21 मई, 2026) को एक विस्तृत कंप्लायंस रिपोर्ट जारी की है।

इस रिपोर्ट के अनुसार, नागरिक निकाय ने न केवल पूरे महानगर में कचरा अलग करने और उसके वैज्ञानिक निपटान की दिशा में बड़ी प्रगति की है, बल्कि जून 2025 से मुंबई की कचरा संकलन व्यवस्था का व्यापक स्तर पर निजीकरण (Privatization) करने का ऐतिहासिक फैसला भी लिया है।

अधिकारियों के मुताबिक, एम-ईस्ट (M-East) और एम-वेस्ट (M-West) वार्डों को छोड़कर, पूरे शहर में घर-घर से कचरा उठाने से लेकर उसे डंपिंग ग्राउंड तक सुरक्षित पहुंचाने की पूरी जिम्मेदारी अब निजी एजेंसियों को सौंपी जा रही है। सात साल के इस बड़े प्रोजेक्ट को अलग-अलग चरणों में लागू किया जा रहा है, जो अगस्त 2026 तक पूरी तरह जमीन पर उतर जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देश: चार श्रेणियों में कचरे का विभाजन और प्लाज्मा भट्ठियां

बीएमसी की कंप्लायंस रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में अब पारंपरिक तरीके से हटकर चार-स्तरीय (Four-Way) कचरा पृथक्करण प्रणाली लागू कर दी गई है। अब कचरे को गीला, सूखा, सैनिटरी (स्वास्थ्य संबंधी) और विशेष देखभाल श्रेणियों में अलग-अलग संकलित किया जा रहा है।

विशेष डोर-टू-डोर कलेक्शन: सैनिटरी और विशेष देखभाल वाले खतरनाक कचरे के लिए नागरिक निकाय ने एक अलग कस्टमाइज्ड सेवा शुरू की है। इस व्यवस्था से अब तक शहर की 7,000 से अधिक आवासीय सोसाइटियां, शैक्षणिक संस्थान, ब्यूटी पार्लर और गर्ल्स हॉस्टल्स जुड़ चुके हैं।

प्लाज्मा तकनीक से निपटान: बीएमसी ने बताया कि इस प्रकार अलग किए गए विशेष कचरे को शहर के विभिन्न हिस्सों में स्थापित 11 विकेंद्रीकृत प्लाज्मा भट्ठियों (Plasma Pyrolysis Units) में वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकूल तरीके से नष्ट किया जा रहा है।

लीक-प्रूफ परिवहन बेड़ा: सड़कों पर कचरा परिवहन के दौरान होने वाली बदबू और तरल रिसाव को रोकने के लिए बीएमसी ने अपने बेड़े को पूरी तरह अपग्रेड कर दिया है। प्राथमिक और माध्यमिक दोनों चरणों के लिए अब शत-प्रतिशत बंद और लीक-प्रूफ वाहनों का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है।

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कचरे के 147 संवेदनशील हॉटस्पॉट चिन्हित; चेंबूर, मलाड और धारावी सबसे आगे

महानगर में सड़कों और चौराहों पर अवैध रूप से कचरा फेंकने की आदतों पर नकेल कसने के लिए बीएमसी ने पूरे मुंबई में कचरे के लिहाज से 147 सबसे संवेदनशील जगहों (Garbage Vulnerable Points – GVPs) की पहचान की है।

मुंबई में प्रतिदिन लगभग 6,300 से 6,500 मीट्रिक टन नगरपालिका ठोस कचरा निकलता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा इन्हीं भीड़भाड़ वाले इलाकों और अनौपचारिक बस्तियों (स्लम एरिया) में जमा हो जाता है, जहाँ संकरी गलियों के कारण कचरा ट्रक नहीं पहुंच पाते।

वार्ड-वार तैयार की गई इस सूची में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं:

एम-वेस्ट वार्ड (चेम्बूर, तिलक नगर, छेड़ा नगर): यह इलाका सबसे संवेदनशील पाया गया है, जहाँ अकेले 37 कचरा हॉटस्पॉट हैं।पी-नॉर्थ वार्ड (मलाड, मालवानी): इस क्षेत्र में 12 संवेदनशील बिंदु चिन्हित किए गए हैं।

जी-नॉर्थ वार्ड (दादर, धारावी) और एन वार्ड (घाटकोपर): यहाँ 10-10 डंपिंग हॉटस्पॉट पाए गए हैं।एम-ईस्ट (देवनार, मानखुर्द) और एफ-नॉर्थ (सायन, माटुंगा, वडाला): इन घनी आबादी वाले क्षेत्रों में 9-9 ब्लैक स्पॉट मिले हैं।

    बीएमसी इन सभी 147 स्थानों को हमेशा के लिए बंद करने के उद्देश्य से सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगा रही है। इन कैमरों के जरिए बिना अनुमति कचरा फेंकने वालों की पहचान की जाएगी और उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

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    ‘पिंक आर्मी’ का उग्र मोर्चा और ‘मुंबई क्लीन लीग 2026’ की सफलता

    भीड़भाड़ वाले और कचरा-प्रवण क्षेत्रों में दिन में दो शिफ्टों में सफाई टीमों की तैनाती शुरू की गई है। इस अभियान का सबसे अनूठा पहलू बीएमसी की ‘पिंक आर्मी’ (Pink Army) है। यह सफाई कर्मियों का एक ऐसा विशेष दस्ता है, जिसमें कम से कम 70 प्रतिशत महिला कर्मचारी शामिल हैं, जो मलिन बस्तियों और संक्रामक इलाकों में व्यवहार परिवर्तन और ऑन-स्पॉट सफाई का मोर्चा संभाल रही हैं।

    इसके साथ ही, जागरूकता के लिए शुरू किए गए ‘मुंबई क्लीन लीग (MCL) 2026’ पोर्टल पर नागरिकों की भागीदारी अभूतपूर्व रही है। 21 मई, 2026 तक इस पोर्टल पर रिकॉर्ड 20,272 रजिस्ट्रेशन दर्ज किए जा चुके हैं।

    इसमें 18,330 आम नागरिक और 1,942 व्यावसायिक व सामाजिक संस्थाएं (जिनमें 413 स्कूल, 182 अस्पताल, 416 रेस्टोरेंट और 532 हाउसिंग सोसाइटियां शामिल हैं) सक्रिय रूप से जुड़ी हैं। इस अभियान के तहत अब तक 64 बड़े कचरा हॉटस्पॉट की समस्याओं को पूरी तरह से हल कर दिया गया है।

    निजीकरण की चुनौतियाँ, बजट की कमी और भविष्य का रोडमैप

    सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट विभाग के डिप्टी म्युनिसिपल कमिश्नर किरण दिघावकर ने इस नई निजीकरण नीति और चुनौतियों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, “ठेकेदारों को पूरे आवंटित क्षेत्र की स्वच्छता की देखरेख खुद करनी होगी। उन्हें उनके द्वारा संकलित किए गए कचरे के कुल वजन के आधार पर ही भुगतान किया जाएगा।

    हमारी सबसे बड़ी चुनौती नागरिकों की उदासीनता है। साल 2014 से अब तक बीएमसी ने स्रोत पर कचरा अलग करने के महत्व को समझाने के लिए जागरूकता (ICE) गतिविधियों पर सालाना 10 से 12 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, लेकिन महामारी के बाद स्थिति फिर से पुरानी स्थिति पर आ गई। अब हमें इसे मिशन मोड में नए सिरे से शुरू करना होगा।”

    प्रबंधन के तहत मुलुंड डंपिंग ग्राउंड में संचित पुराने कचरे के लिए ‘बायोमाइनिंग’ (Biomining) का काम युद्धस्तर पर चल रहा है, जबकि देवनार डंपिंग ग्राउंड के वैज्ञानिक क्लोजर के लिए ‘लेटर ऑफ अवार्ड’ (LOA) जारी किया जा चुका है।

    नियमों का पालन करने वाली बड़ी सोसाइटियों को प्रॉपर्टी टैक्स में विशेष छूट दी जा रही है, जबकि उल्लंघन करने वालों के लिए ‘सॉलिड वेस्ट बाय-लॉज़ 2025’ के तहत कड़े आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है।

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    संपादकीय दृष्टिकोण (बजट की कमी पर चिंता):

    बीएमसी ने अपनी रिपोर्ट में एक बेहद चिंताजनक तकनीकी पहलू को भी उजागर किया है। नागरिक निकाय ने स्वीकार किया है कि इस महाप्रोजेक्ट के बावजूद बीएमसी के कुल वार्षिक बजट का केवल 6.88 प्रतिशत हिस्सा ही ठोस कचरा प्रबंधन के लिए आवंटित किया गया है।

    यह आंकड़ा सुप्रीम कोर्ट की उस वैधानिक सिफारिश से बेहद कम है, जिसमें शीर्ष अदालत ने सफाई व्यवस्था के लिए कुल बजट का कम से कम 30 प्रतिशत हिस्सा सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था। निजीकरण का फैसला निश्चित रूप से प्रशासनिक अनियमितताओं और गाड़ियों के अनियंत्रित समय की शिकायतों को दूर करेगा, जैसा कि नागरिक संगठनों (लोखंडवाला ओशिवारा सिटीजन एसोसिएशन) का भी मानना है।

    लेकिन जब तक बीएमसी वित्तीय आवंटन को शीर्ष अदालत के मानकों के अनुरूप नहीं बढ़ाती, तब तक देश के सबसे बड़े महानगर को पूरी तरह से कचरा-मुक्त और वैश्विक मानकों के अनुरूप स्वच्छ बनाना एक अधूरी चुनौती बना रहेगा। मुंबई की सफाई को लेकर सामने आई BMC कचरा प्रबंधन रिपोर्ट डंपिंग ग्राउंड को लेकर BMC कचरा प्रबंधन रिपोर्ट में बड़ा दावा

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