UNSC में भारत का पाकिस्तान पर अब तक का सबसे तीखा प्रहार:
UNSC में भारत पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के मंच पर वैश्विक शांति और नागरिकों की सुरक्षा पर चल रही गंभीर चर्चा के दौरान भारत ने अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान के कूटनीतिक दुष्प्रचार को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।
२० मई, २०२६ को ‘सशस्त्र संघर्षों में नागरिकों की सुरक्षा’ (Protection of Civilians in Armed Conflict) विषय पर आयोजित सुरक्षा परिषद की वार्षिक खुली बहस में जब पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने हमेशा की तरह कश्मीर का मुद्दा उठाकर ध्यान भटकाने की हताश कोशिश की, तो भारतीय दल ने बेहद आक्रामक और कड़े कूटनीतिक प्रहारों से इस्लामाबाद को निरुत्तर कर दिया।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के नवनियुक्त स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत हरीश पर्वथनेनी ने पाकिस्तान के नरसंहार और सैन्य अत्याचारों के लंबे तथा दागदार रिकॉर्ड को दुनिया के सामने रखते हुए कहा कि पाकिस्तान का यह अमानवीय आचरण दशकों से उसकी उस हीनभावना को दर्शाता है, जिसमें वह अपनी घरेलू राजनीतिक और आर्थिक विफलताओं का ठीकरा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दूसरों पर फोड़ना चाहता है।
कश्मीर पर दोटूक: भारत के आंतरिक मामलों में दखल बर्दाश्त नहीं
बहस के दौरान जैसे ही पाकिस्तान की तरफ से जम्मू-कश्मीर में नागरिकों के अधिकारों का मनगढ़ंत और राजनीतिक रूप से प्रेरित राग अलापा गया, राजदूत हरीश पर्वथनेनी ने अपनी हस्तक्षेप टिप्पणी में उसे कड़ा जवाब दिया।
उन्होंने सुरक्षा परिषद को संबोधित करते हुए कहा कि यह बेहद हास्यास्पद और कूटनीतिक विडंबना है कि एक ऐसा देश, जिसका अपना इतिहास नरसंहार, दमन और सैन्य ज्यादतियों की खून से सनी गाथाओं से भरा पड़ा है, वह आज दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को नागरिकों की सुरक्षा पर उपदेश देने का दुस्साहस कर रहा है।
भारतीय दूत ने स्पष्ट शब्दों में दोहराया:
“जम्मू-कश्मीर पूरी तरह से और हमेशा के लिए भारत का अभिन्न और आंतरिक हिस्सा है। अपनी सीमाओं के भीतर और बाहर लगातार आतंकवाद और हिंसा को पालने वाला देश अंतरराष्ट्रीय कानून की भाषा का इस्तेमाल केवल अपनी कमियों को छिपाने के लिए चुन-चुनकर करता है, जबकि असलियत में वह इन मानवीय सिद्धांतों की धज्जियां उड़ाने में सबसे आगे है।”
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अफगानिस्तान में हालिया बर्बरता उजागर: रमजान में अस्पताल पर दागे बम
भारत ने पाकिस्तान के तथाकथित शांतिवादी मुखौटे को उतारने के लिए इसी साल (२०२६ के शुरुआती महीनों) में पड़ोसी देश अफगानिस्तान के नागरिक क्षेत्रों पर पाकिस्तानी वायुसेना द्वारा किए गए घातक हवाई हमलों का आधिकारिक डेटा सुरक्षा परिषद के पटल पर रख दिया।
संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन अफगानिस्तान (UNAMA) की हालिया रिपोर्ट के कूटनीतिक संदर्भों का हवाला देते हुए भारतीय राजदूत ने बताया कि २०२६ की पहली तिमाही में पाकिस्तानी सेना द्वारा की गई सीमा पार सशस्त्र आक्रामकता के कारण ७५० से अधिक निर्दोष अफगान नागरिक हताहत हुए हैं।
भारतीय दूत ने पाकिस्तान के इस अमानवीय कृत्य की तीखी निंदा करते हुए कहा:
“पूरी दुनिया गवाह है कि इसी साल मार्च में रमजान के पवित्र महीने के दौरान—जो आत्मचिंतन, शांति और दया का समय होता है—पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने काबुल में स्थित ‘उम्मीद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल’ (Omid Addiction Treatment Hospital) पर बर्बरतापूर्वक बमबारी की।
इस चिकित्सा केंद्र का दूर-दूर तक कोई सैन्य महत्व नहीं था। यूएनएएमए के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, तरावीह की शाम की नमाज खत्म होने के ठीक बाद, जब मरीज और स्थानीय नागरिक अस्पताल के पास की मस्जिद से बाहर निकल रहे थे, तब अंधेरे की आड़ में यह कायरतापूर्ण हमला किया गया, जिसमें २६९ बेकसूर नागरिकों की मौत हो गई और १२२ अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।”
इस पाकिस्तानी सैन्य दुस्साहस के कारण ९४,००० से अधिक स्थानीय अफगान नागरिकों को अपनी पुश्तैनी जमीन छोड़कर आंतरिक रूप से विस्थापित होना पड़ा है। भारत ने इन आंकड़ों के जरिए सुरक्षा परिषद को आगाह किया कि जो देश अपने पड़ोसी मुल्कों में स्वास्थ्य केंद्रों और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाता है, उसका अंतरराष्ट्रीय मंच पर मानवाधिकारों की बात करना पाखंड की पराकाष्ठा है।
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1971 का दाग: ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ और 4 लाख महिलाओं से सामूहिक बलात्कार का इतिहास
भारत ने पाकिस्तान के ऐतिहासिक सैन्य चरित्र को बेनकाब करने के लिए अपनी आलोचना का दायरा बढ़ाते हुए दक्षिण एशिया के इतिहास के सबसे काले पन्नों को पलटा।
राजदूत पर्वथनेनी ने वर्ष १९७१ के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में पाकिस्तानी सेना द्वारा बंगाली राष्ट्रवादी आंदोलन को कुचलने के लिए चलाए गए कुख्यात सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ (Operation Searchlight) का विशेष रूप से उल्लेख किया।
सुरक्षा परिषद के सदस्यों को इतिहास की क्रूरता की याद दिलाते हुए भारतीय दूत ने कहा:
“पाकिस्तान का वर्तमान आचरण किसी के लिए भी आश्चर्य की बात नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह वही देश है जिसने १९७१ में अपनी ही जनता के खिलाफ सुनियोजित तरीके से नरसंहार को संस्थागत मंजूरी दी थी।
‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ के दौरान पाकिस्तानी जनरलों के इशारे पर लगभग ४,००,००० बंगाली महिलाओं के साथ सुनियोजित और संस्थागत तरीके से सामूहिक बलात्कार किया गया और लाखों निर्दोष लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई।
इतिहास गवाह है कि क्रूरता और दमन का जो हिंसक पैटर्न पाकिस्तान ने १९७१ में अपनाया था, वही आज भी उसकी विदेश और रक्षा नीति का मुख्य आधार बना हुआ है।”
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संपादकीय दृष्टिकोण:
यूएनएससी की इस खुली और तीखी बहस ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच के गहरे कूटनीतिक और रणनीतिक तनाव को वैश्विक पटल पर ला दिया है। भारतीय कूटनीति का यह रुख इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब भारत रक्षात्मक होने के बजाय सीधे आक्रमण की नीति पर चल रहा है।
कश्मीर जैसे पवित्र और आंतरिक मुद्दे पर पाकिस्तान के दुष्प्रचार का जवाब केवल खंडन से देने के बजाय, भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UNAMA) की ही रिपोर्टों का कूटनीतिक अस्त्र के रूप में इस्तेमाल कर पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के सामने एक ‘गैर-जिम्मेदार और हिंसक स्टेट’ के रूप में स्थापित कर दिया है। बिना किसी नैतिक आधार और बिना किसी आंतरिक स्थिरता के, पाकिस्तान की यह कूटनीतिक चाल खुद उसी के पैरों पर कुल्हाड़ी साबित हुई है। एक बार फिर UNSC में भारत पाकिस्तान के बीच तीखी बहस
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