शशि थरूर कॉकरोच जनता पार्टी नीट विवाद को बताया सब्र का आखिरी बांध,
शशि थरूर कॉकरोच जनता पार्टी भारतीय राजनीति का स्थापित ढर्रा अब डिजिटल मोर्चों के उभार से असहज होने लगा है। बेरोजगारी और न्यायपालिका की कथित टिप्पणियों के खिलाफ उपजा व्यंग्यात्मक डिजिटल आंदोलन (CJP) अब महज सोशल मीडिया का कौतुक नहीं रह गया है, बल्कि इसे देश के सबसे बड़े विपक्षी नेताओं का भी वैचारिक समर्थन मिलने लगा है।
कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने इस आंदोलन के पक्ष में खुलकर खड़े होते हुए इसे भारतीय युवाओं की वास्तविक कुंठा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का एक बड़ा जरिया बताया है।
दूसरी ओर, इस वायरल आंदोलन की बढ़ती ताकत के बीच इसके संस्थापक, पुणे के रहने वाले 30 वर्षीय राजनीतिक संचार रणनीतिकार अभिजीत दिपके ने एक बड़ा और सनसनीखेज दावा किया है।
अमेरिका में रहकर इस आंदोलन को चला रहे दिपके ने आशंका जताई है कि जैसे ही वे भारत की धरती पर कदम रखेंगे, सरकार और प्रशासन उन्हें सलाखों के पीछे भेज देगा।
शशि थरूर का बड़ा बयान: “विपक्ष को इस मौके का फायदा उठाना चाहिए”
एक बेबाक और विस्तृत इंटरव्यू में शशि थरूर ने सीजेपी की अभूतपूर्व डिजिटल सफलता पर अपनी गंभीर राजनीतिक राय साझा की।
थरूर ने स्वीकार किया कि वे इस आंदोलन के प्रभाव से ‘बेहद प्रभावित’ हैं, जिसने महज पांच दिनों में इंस्टाग्राम पर 18 मिलियन (1.8 करोड़) से अधिक फॉलोअर्स जुटाकर देश की दोनों मुख्यधारा की पार्टियों—भाजपा (8.7 मिलियन) और कांग्रेस (13.3 मिलियन)—को काफी पीछे छोड़ दिया है।
शशि थरूर कॉकरोच जनता पार्टी ने एक्स (X) पर सीजेपी के मुख्य हैंडल को भारत सरकार की कानूनी मांग पर ब्लॉक (जियो-ब्लॉक) किए जाने की तीखी आलोचना की। उन्होंने इस प्रशासनिक कदम को “विनाशकारी और बेहद नासमझी भरा” करार देते हुए कहा, “लोकतंत्रों को असहमति, हास्य, व्यंग्य और यहां तक कि हताशा को भी व्यक्त करने के लिए सुरक्षित जगह देनी चाहिए।
युवाओं को अपनी भावनाएं व्यक्त करने के लिए एक मंच मिलना ही चाहिए, इसलिए सीजेपी के अकाउंट को बंद करने के बजाय उसे काम करने देना चाहिए।” थरूर ने विपक्ष को सलाह दी कि स्थापित राजनीतिक दलों को इस अपरंपरागत राजनीतिक संदेश के पीछे छिपी युवाओं की सामूहिक ऊर्जा को समझना चाहिए और इस मौके को राजनीतिक विमर्श बदलने के लिए भुनाना चाहिए।
,इसे भी पढ़े : “मेटा कर्मचारी छंटनी 2026” ने 8,000 कर्मचारियों को निकाला,
नीट (NEET) पेपर लीक विवाद: ‘ऊंट की पीठ पर आखिरी तिनका’
शशि थरूर ने देश के मौजूदा माहौल और इस डिजिटल विद्रोह के कारणों का विश्लेषण करते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण बिंदु उठाया। उन्होंने कहा कि हाल ही में सामने आया नीट (NEET) पेपर लीक विवाद देश के करोड़ों छात्रों और युवाओं के लिए “ऊंट की पीठ पर आखिरी तिनका” (सब्र का बांध तोड़ने वाली घटना) साबित हुआ है।
कांग्रेस नेता के शब्दों में, “युवा पहले से ही भयानक बेरोजगारी, आसमान छूती महंगाई, जीवन और शिक्षा में सीमित होते अवसरों और भविष्य की भारी अनिश्चितताओं से जूझ रहे थे।
ऐसे में नीट परीक्षा के घोटाले ने उनके सब्र का बांध तोड़ दिया। सीजेपी का उदय यह दिखाता है कि जब युवा खुद को मुख्यधारा की राजनीतिक चर्चाओं से पूरी तरह कटा हुआ महसूस करते हैं, तो वे अपनी लड़ाई के लिए ऐसे ही लीक से हटकर नए रास्ते चुनते हैं।”
“दिल्ली पुलिस मुझे तिहाड़ जेल ले जाएगी”: संस्थापक अभिजीत दिपके का खौफ
इस पूरे डिजिटल आंदोलन के बीच सबसे बड़ा भूचाल तब आया जब सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके का एक हालिया इंटरव्यू सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया। ‘द रेड माइक’ डिजिटल चैनल को दिए साक्षात्कार में दिपके ने अपनी सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की।
दिपके ने कहा, “मुझे लगता है कि जैसे ही मैं अमेरिका से भारत वापस लौटूंगा और दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरूंगा, दिल्ली पुलिस का एक काफिला मुझे सीधे गिरफ्तार करके तिहाड़ जेल ले जाएगा।
“ हालांकि दिपके के खिलाफ अभी तक किसी आधिकारिक शिकायत या कानूनी मामले की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन एक्स पर मुख्य अकाउंट के सस्पेंशन और उनके इंस्टाग्राम हैंडल को हैक करने की कथित कोशिशों ने इस डर को और गहरा कर दिया है।
बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशन्स में मास्टर डिग्री धारक दिपके ने यह भी साफ किया कि वे इस रिकॉर्डतोड़ फॉलोअर्स की संख्या से व्यक्तिगत रूप से खुश नहीं हैं।
उन्होंने बेहद परिपक्व लहजे में कहा, “मुझे इस बात की कोई खुशी नहीं है कि हमारे फॉलोअर्स बीजेपी से ज्यादा हो गए हैं। इससे जमीनी स्तर पर क्या बदलेगा? युवाओं के बेरोजगारी और सामाजिक असमानता के मुद्दे तो आज भी वहीं के वहीं खड़े हैं।”
,इसे भी पढ़े : मुंबई में “BMC कचरा प्रबंधन रिपोर्ट” का होगा पूर्ण निजीकरण,
एक्स पर ‘ओन गोल’ और ‘कॉकरोच कभी मरते नहीं’ की गूंज
प्रशासनिक पाबंदियों के बावजूद इस मोर्चे ने तकनीकी मोर्चे पर हार नहीं मानी है। भारत में मुख्य एक्स अकाउंट ब्लॉक होने के तुरंत बाद, दिपके ने केवल दो शब्दों का एक रहस्यमयी ट्वीट किया—”Own Goal” (आत्मघाती गोल), जिसका संकेत साफ था कि अकाउंट बैन करने से सरकार ने खुद का ही नुकसान किया है और इस आंदोलन को और ज्यादा पब्लिसिटी मिल गई है।
शशि थरूर कॉकरोच जनता पार्टी मेटा और एक्स की पाबंदियों को धता बताते हुए दिपके ने तत्काल “Cockroach is Back” नाम से एक बैकअप हैंडल शुरू कर दिया। इस नए प्रोफाइल के बायो में एक बेहद आक्रामक और प्रतीकात्मक नारा लिखा गया: “कॉकरोच कभी नहीं मरते” (Cockroaches don’t die)। इस नए वैकल्पिक पेज की ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि महज दो पोस्ट के भीतर और 24 घंटे से कम समय में इसके फॉलोअर्स की संख्या 1 लाख (96.2 हजार) के आंकड़े को छूने लगी।
इसके अलावा, व्हाट्सऐप (WhatsApp) पर भी सीजेपी के आधिकारिक चैनल ने कुछ ही दिनों में 36,000 से अधिक फॉलोअर्स का आंकड़ा पार कर लिया है।
महुआ मोइत्रा और अखिलेश यादव सहित समूचे विपक्ष का परोक्ष समर्थन
इस आंदोलन की ‘इंटरनेट-फर्स्ट’ (Internet-First) शैली और मीम-आधारित धारदार ढांचे ने देश के बड़े विपक्षी क्षत्रपों को भी अपनी ओर आकर्षित किया है। तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और कीर्ति आजाद जैसे कद्दावर राजनेताओं ने इस आंदोलन की सामग्री को सोशल मीडिया पर री-शेयर या उस पर अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं।
इसके साथ ही देश के बड़े स्टैंड-अप कॉमेडियन, डिजिटल इन्फ्लुएंसर्स और पैरोडी कलाकारों के शामिल होने से इसकी पहुंच गांवों और कस्बों तक के युवाओं तक हो गई है।
,इसे भी पढ़े : कॉकरोच जनता पार्टी आंदोलन का डिजिटल ब्लास्ट: 4 दिन में तोड़े रिकॉर्ड,
संपादकीय दृष्टिकोण:
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का नए राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर शशि थरूर का महत्वपूर्ण बयान यह अभूतपूर्व विस्तार इस बात का स्पष्ट संकेत है कि देश की नई पीढ़ी यानी Gen Z अब रैलियों के पारंपरिक और उबाऊ भाषणों के बजाय मीम्स, पैरोडी पोस्टर्स और व्यंग्यात्मक नारों के जरिए अपनी बात कहना ज्यादा पसंद कर रही है।
देश की सर्वोच्च अदालत के मुख्य न्यायाधीश की एक कथित अमर्यादित टिप्पणी से उपजा यह गुस्सा अब नीट घोटाले जैसी प्रशासनिक विफलताओं से मिलकर एक राजनीतिक आंदोलन का रूप ले चुका है।
सरकार द्वारा डिजिटल सेंसरशिप का सहारा लेकर युवाओं की इस आवाज को दबाने की कोशिश और संस्थापक के मन में गिरफ्तारी का डर यह दर्शाता है कि सत्ता अब सोशल मीडिया के इन ‘आभासी तिलचट्टों’ के तीखे कतरनों से असहज हो चुकी है।
जैसा कि शशि थरूर ने कहा, लोकतंत्र को जीवंत रखने के लिए इस तरह के डिजिटल हास्य और असहमति को दबाने के बजाय उन्हें स्वतंत्र हवा मिलनी चाहिए।
,इसे भी पढ़े : बंगाल की फलता विधानसभा पर दोबारा मतदान TMC के जहांगीर खान हटे,



Post Comment