राज्यसभा चुनाव जून 2026 10 राज्यों की 24 सीटों पर 18 जून को मतदान,
राज्यसभा चुनाव जून 2026 देश के विधायी ढांचे में ‘राज्यों की परिषद’ यानी राज्यसभा (Rajya Sabha) के भीतर शक्ति संतुलन को री-सेट करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने शुक्रवार, 22 मई 2026 को देश के 10 राज्यों में फैली 24 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा कर दी है।
इन सीटों पर आगामी 18 जून को मतदान होगा और चुनावी परंपरा के अनुसार उसी दिन शाम 5 बजे मतों की गिनती के बाद परिणामों का ऐलान भी कर दिया जाएगा।
चुनाव आयोग के मुताबिक, यह चुनावी कवायद इसलिए जरूरी हो गई है क्योंकि संसद के उच्च सदन में विभिन्न राज्यों का प्रतिनिधित्व कर रहे कई मौजूदा सांसदों का कार्यकाल 21 जून से 19 जुलाई 2026 के बीच अलग-अलग तारीखों पर समाप्त हो रहा है।
इसके साथ ही आयोग ने महाराष्ट्र और तमिलनाडु की एक-एक खाली सीट पर उपचुनाव कराने का भी फैसला किया है। महाराष्ट्र में राकांपा (NCP) नेता सुनेत्रा पवार द्वारा विधानसभा के लिए चुने जाने के बाद इस्तीफा देने से यह सीट खाली हुई थी।
राज्यसभा चुनाव 2026: क्या है पूरा शेड्यूल?
चुनाव आयोग द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, विधिवत चुनावी प्रक्रिया निम्नलिखित कार्यक्रम के तहत संपन्न होगी:
अधिसूचना जारी होने की तारीख: 1 जून, 2026 (सोमवार)नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि: 8 जून, 2026 (सोमवार)नामांकन पत्रों की जांच (Scrutiny): 9 जून, 2026 (मंगलवार)नाम वापसी की अंतिम तारीख: 11 जून, 2026 (गुरुवार)मतदान की तारीख और समय: 18 जून, 2026 (सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक)मतगणना और परिणाम: 18 जून, 2026 (शाम 5 बजे से)चुनावी प्रक्रिया पूरी होने की डेडलाइन: 20 जून, 2026 (शनिवार)
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राज्यों का गणित: कहाँ कितनी सीटों पर होना है मुकाबला?
इस चुनावी चरण में देश के भौगोलिक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 10 राज्यों को शामिल किया गया है। सीटों का राज्यवार विवरण इस प्रकार है:
आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक: प्रत्येक राज्य में 4-4 सीटें (कुल 12 सीटें)।मध्य प्रदेश और राजस्थान: प्रत्येक राज्य में 3-3 सीटें (कुल 6 सीटें)।
झारखंड: 2 सीटें (जिसमें से एक सीट शिबू सोरेन के दुखद निधन के कारण रिक्त हुई है)।पूर्वोत्तर क्षेत्र (मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम): इन चारों राज्यों से 1-1 सीट (कुल 4 सीटें)।
आंध्र प्रदेश: वाईएसआरसीपी का पतन, चंद्रबाबू के नेतृत्व में एनडीए की क्लीन स्वीप की तैयारी
इस पूरे चुनाव में सबसे दिलचस्प और एकतरफा मुकाबला आंध्र प्रदेश में देखने को मिल रहा है। मई 2024 के विधानसभा चुनावों में टीडीपी (TDP), जनसेना (JSP) और भाजपा (BJP) के गठबंधन को मिली प्रचंड जीत का सीधा असर अब राज्यसभा की चार सीटों पर दिखने वाला है।
175 सदस्यीय आंध्र प्रदेश विधानसभा में एनडीए के पास 164 विधायकों का भारी-भरकम बहुमत है (TDP- 135, जनसेना- 21, BJP- 8)। इसके विपरीत, मुख्य विपक्षी दल वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) सिमटकर महज 11 सीटों पर रह गई है।
इस संख्या बल के कारण आंध्र प्रदेश की चारों सीटों पर एनडीए का निर्विरोध या सर्वसम्मत जीतना तय है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के रणनीतिक फैसले के तहत, टीडीपी दो सीटें अपने पास रखेगी, जिसमें पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष नारा लोकेश के बेहद करीबी व्यवसायी से राजनेता बने निवर्तमान सांसद सना सतीश बाबू को बरकरार रखा जाना तय है।
वहीं, नायडू ने अपने सहयोगियों के लिए दरियादिली दिखाते हुए एक सीट पवन कल्याण की जनसेना पार्टी को दी है, जिससे जनसेना पहली बार संसद के उच्च सदन में अपना खाता खोलेगी। चौथी सीट भाजपा के खाते में जाएगी।
यह वाईएसआरसीपी के लिए एक बड़ा झटका है, जिसके तीन निवर्तमान सांसद—अल्ला अयोध्या रामी रेड्डी, परिमल नाथवानी और पिल्ली सुभाष चंद्र बोस रिटायर हो रहे हैं।
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सेवानिवृत्त होने वाले निवर्तमान दिग्गज: खड़गे, देवेगौड़ा और केंद्रीय मंत्रियों की साख
जून के इस चरण में देश की राजनीति के कई सबसे कद्दावर चेहरे राज्यसभा से निवर्तमान हो रहे हैं। कर्नाटक से पूर्व प्रधानमंत्री और जेडीएस (JDS) प्रमुख एच.डी. देवेगौड़ा और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। कर्नाटक विधानसभा के मौजूदा समीकरणों को देखते हुए इन सीटों पर नए सिरे से राजनीतिक शह-मात का खेल शुरू होगा।
इसके अतिरिक्त, राजस्थान से केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और मध्य प्रदेश से केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है, जिन्हें सरकार में बने रहने के लिए दोबारा उच्च सदन में चुनकर आना जरूरी है। मध्य प्रदेश से कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह और गुजरात से कांग्रेस के तेजतर्रार नेता शक्तिसिंह गोहिल भी निवर्तमान सांसदों की सूची में शामिल हैं।
संसदीय विज्ञान: कैसे होता है राज्यसभा का यह जटिल चुनाव?
आम चुनावों (लोकसभा) के विपरीत, जहाँ देश की जनता सीधे मतदान करती है, राज्यसभा का चुनाव एक अप्रत्यक्ष प्रणाली है। इसमें राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित विधायक (MLAs) हिस्सा लेते हैं।
एकल संक्रमणीय मत (STV): यह चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत ‘एकल संक्रमणीय मत’ विधि से होता है। विधायकों को एक मतपत्र दिया जाता है जिस पर उन्हें उम्मीदवारों के नाम के आगे अपनी वरीयता (1, 2, 3) दर्ज करनी होती है।कोटा निर्धारण सूत्र: किसी उम्मीदवार को जीतने के लिए एक न्यूनतम वोट मूल्य या कोटे की आवश्यकता होती है।
इसका गणितीय सूत्र है:{आवश्यक कोटा} ={कुल विधानसभा मतों की संख्या}}{राज्यसभा सीटों की संख्या} + खुला मतपत्र (Open Ballot System): क्रॉस-वोटिंग और हॉर्स-ट्रेडिंग (विधायकों की खरीद-फरोख्त) को रोकने के लिए राज्यसभा में खुला मतपत्र इस्तेमाल होता है।
प्रत्येक पार्टी के विधायक को वोट डालने से पहले अपने मतपत्र को अपनी पार्टी के अधिकृत व्हिप या प्रतिनिधि को दिखाना अनिवार्य होता है। हालांकि, यह नियम निर्दलीय विधायकों पर लागू नहीं होता, जो किसी भी दल के प्रतिनिधि को अपना वोट दिखाने के लिए बाध्य नहीं हैं।
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संपादकीय दृष्टिकोण:
18 जून को होने वाले ये राज्यसभा चुनाव केवल खाली सीटों को भरने की प्रक्रिया नहीं हैं, बल्कि ये हालिया विधानसभा चुनावों में बदले राजनीतिक समीकरणों का संसद के भीतर रिफ्लेक्शन हैं। आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में जहाँ एनडीए पूरी तरह से विपक्ष का सूपड़ा साफ करने की स्थिति में है, वहीं कर्नाटक और झारखंड में स्थानीय गठबंधनों की परीक्षा होगी।
केंद्रीय मंत्रियों को सदन में बनाए रखने की भाजपा की चुनौती और विपक्षी खेमे द्वारा अपने शीर्ष रणनीतिकारों को दोबारा सदन में भेजने की जद्दोजहद के बीच, यह चुनाव 2026 की राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राज्यसभा चुनाव जून 2026 में दिखेगा शह-मात का खेल राज्यसभा चुनाव जून 2026, समीकरण बदलने के लिए
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