मुंबई बेस्ट बस संकट 10,000 बसों की जरूरत परसिर्फ 3,000, बेस्ट बसों
मुंबई बेस्ट बस संकट देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था इस समय एक अभूतपूर्व परिवर्तन और गंभीर परिचालन संकट के चौराहे पर खड़ी है। बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) की कमिश्नर अश्विनी भिड़े ने महानगर की परिवहन आवश्यकताओं को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है।
शुक्रवार, 22 मई 2026 को मुंबई के ताज प्रेसिडेंट में आयोजित ‘द हिंदू’ के महाराष्ट्र इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्क्लेव के दौरान वरिष्ठ पत्रकार विनया देशपांडे के साथ एक विशेष सत्र में बोलते हुए आईएएस (IAS) अश्विनी भिड़े ने स्वीकार किया कि मुंबई की आबादी और सफर की जरूरतों के हिसाब से शहर को रोजाना कम से कम 10,000 बसों की आवश्यकता है, लेकिन दुर्भाग्य से आज सड़कों पर महज 3,000 बसें ही दौड़ रही हैं।
कमिश्नर ने साफ किया कि जब तक बसों की संख्या में यह भारी अंतर दूर नहीं किया जाता, तब तक मुंबई की ऐतिहासिक बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (BEST) उपक्रम को वित्तीय और परिचालन संकट से बाहर नहीं निकाला जा सकता।
उन्होंने कहा कि कोस्टल रोड (तटीय सड़क), जो मरीन ड्राइव को वर्सोवा से जोड़ती है, वहां बसों के लिए पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार है, लेकिन बसों की किल्लत के कारण हम इसका पूरा फायदा नहीं उठा पा रहे हैं।
मेट्रो एक्वा लाइन में नेटवर्क ब्लैकआउट: नया टेलीकॉम एक्ट बना बड़ी बाधा
कॉन्क्लेव के दौरान कमिश्नर भिड़े से मुंबई मेट्रो एक्वा लाइन (लाइन 3 – आरे JVLR से कफ परेड) में पिछले छह महीनों से यात्रियों को हो रही मोबाइल कनेक्टिविटी की समस्या पर तीखे सवाल पूछे गए। यात्रियों की इस भारी परेशानी को स्वीकार करते हुए उन्होंने आश्वासन दिया कि अगले दो से तीन महीनों में इस अंडरग्राउंड रूट पर मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह बहाल कर दिया जाएगा।
इस देरी के पीछे के प्रशासनिक और कानूनी गतिरोध को उजागर करते हुए उन्होंने बताया कि यह पूरी तरह से एक संविदात्मक और विनियामक (Regulatory) उलझन थी। सुश्री भिड़े ने कहा, “शुरुआत में मोबाइल कंपनियों ने सेवाएं दीं, लेकिन बाद में उन्होंने अपने पैर खींच लिए। इसी बीच केंद्र सरकार द्वारा नया टेलीकॉम एक्ट और उससे जुड़े नियम लागू कर दिए गए।
नए कानून के तहत मोबाइल सेवाओं को ‘बुनियादी और आवश्यक सेवा’ का दर्जा दे दिया गया, जिसे मुफ़्त में उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सरकारी संस्था पर डाल दी गई।
बीएमसी ने लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च करके जो ‘ट्रांसपोर्ट नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर’ तैयार किया था, वह एक एग्रीगेटर के जरिए निजी मोबाइल ऑपरेटरों को दिया जाना था, लेकिन कंपनियां इस व्यवस्था से जुड़ने को तैयार नहीं थीं। चूंकि सरकारी तंत्र पर दोष मढ़ना आसान होता है, इसलिए यह बदनामी हमारे सिर आई। अब हम लागत की आंशिक भरपाई के लिए कंपनियों से बातचीत के अंतिम दौर में हैं।”
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प्रोजेक्ट्स का विरोध और मोनोरेल की विफलता पर दोटूक
कोस्टल रोड एक्सटेंशन (तटीय सड़क विस्तार) के खिलाफ हो रहे स्थानीय और कड़े विरोध प्रदर्शनों पर बोलते हुए अश्विनी भिड़े ने बेहद व्यावहारिक प्रशासनिक दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा, “ऐसा कौन सा बड़ा प्रोजेक्ट है, जिसका विरोध नहीं होता?
लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर बुनियादी बदलाव का शुरुआती विरोध तय है, लेकिन जब वही प्रोजेक्ट्स पूरे हो जाते हैं, तो मुंबई के आम नागरिकों को सफर में जो आसानी होती है, उसका अनुभव वे खुद रोज़ करते हैं।”
उन्होंने मुंबई मोनोरेल को एक “नाकाम प्रोजेक्ट” कहे जाने वाली आलोचनाओं को भी खारिज किया और स्पष्ट किया कि मोनोरेल की एकमात्र समस्या केवल ट्रेनों की संख्या (रेक) का कम होना है, न कि पूरा प्रोजेक्ट खराब है।
राजनीतिक इच्छाशक्ति: बेस्ट को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाएगी महायुति
दूसरी तरफ, मुंबई में बीएमसी चुनावों की सुगबुगाहट के बीच सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन ने भी बेस्ट (BEST) के वित्तीय संकट को भुनाने और इसे सुलझाने के लिए कमर कस ली है। मुंबई बीजेपी अध्यक्ष और वरिष्ठ विधायक अमित सातम ने स्पष्ट किया है कि बीएमसी में महायुति सरकार की सबसे पहली प्राथमिकताओं में से एक बेस्ट उपक्रम को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना होगा।
अमित सातम ने वेट-लीज (Wet-Lease) यानी निजी ऑपरेटरों से किराए पर ली गई बसों के संचालन में बड़े पैमाने पर हो रहे राजस्व के नुकसान (लीकेज) की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि वेट-लीज मॉडल से बेस्ट को जिस रेवेन्यू की उम्मीद थी, वह लीकेज के कारण उपक्रम के मुख्य बैंक खातों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
इसके साथ ही बसों और डिपो पर विज्ञापन से मिलने वाले राजस्व में आई भारी कमी भी चिंता का विषय है। सातम ने घोषणा की कि मेट्रो नेटवर्क के विस्तार को देखते हुए बेस्ट के रूटों का पुनर्गठन (Route Rationalization) किया जा रहा है।
उदाहरण के लिए, उन्होंने बताया कि मंगलवार को सिद्धिविनायक मंदिर और वीकेंड पर जुहू बीच जैसे भारी भीड़भाड़ वाले इलाकों के लिए विशेष फीडर रूट (Feeder Routes) बनाए जा रहे हैं, जिसकी शुरुआत शनिवार को दादर से सिद्धिविनायक के बीच एक नए रूट के उद्घाटन से होगी।
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बीएमसी का 15-पॉइंट ‘सर्वाइवल मैनुअल’: सोनिया सेठी का रोडमैप
लगातार वित्तीय बेलआउट पैकेज (आर्थिक मदद) की मांग कर रही बेस्ट अंडरटेकिंग को बीएमसी ने बिना शर्त पैसा देने के बजाय 15 सूत्रीय एक सख्त ‘सर्वाइवल मैनुअल’ (पुनरुद्धार योजना) थमा दिया है।
बेस्ट की जनरल मैनेजर सोनिया सेठी ने इस बात की पुष्टि की है कि अंडरटेकिंग ने बीएमसी द्वारा उठाए गए कड़े वित्तीय सवालों के विस्तृत जवाब सौंप दिए हैं। बीएमसी की इस 15-पॉइंट रणनीति के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
बिजली चोरी पर कड़ा प्रहार: बेस्ट के बिजली डिवीजन में होने वाले कमर्शियल नुकसान और बिजली चोरी को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर विजिलेंस रेड की जाएगी।घाटे वाले रूटों की समीक्षा: जिन रूटों पर यात्रियों की संख्या न के बराबर है, उनकी समीक्षा कर उन्हें बंद किया जाएगा या फीडर रूट में बदला जाएगा।
खाली संपत्तियों का मौद्रिकरण (Monetization): बेस्ट के स्वामित्व वाली खाली जमीनों, बस डिपो के ऊपर की खाली जगहों और पार्किंग क्षेत्रों को व्यावसायिक रूप से किराए पर देकर अतिरिक्त राजस्व जुटाया जाएगा।
ईवी चार्जिंग स्टेशन नेटवर्क: बेस्ट के डिपो में बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे, जिनका उपयोग आम जनता भी सशुल्क कर सकेगी, जिससे उपक्रम की आय बढ़ेगी।
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संपादकीय दृष्टिकोण:
मुंबई जैसे वैश्विक महानगर की लाइफलाइन को सिर्फ 3,000 बसों के भरोसे छोड़ देना नीतिगत विफलता का एक बड़ा उदाहरण है। बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिड़े ने 10,000 बसों की जरूरत की बात स्वीकार कर बीमारी की सही पहचान तो कर ली है, लेकिन इसका इलाज केवल वेट-लीजिंग की कमियों और निजी टेलीकॉम कंपनियों के अड़ियल रुख के पीछे नहीं छिपाया जा सकता।
महायुति सरकार द्वारा बेस्ट को आत्मनिर्भर बनाने का दावा सराहनीय है, बशर्ते वह बीएमसी द्वारा दिए गए 15-पॉइंट सर्वाइवल मैनुअल को सख्ती से लागू करे। मुंबईकरों को विश्वस्तरीय कोस्टल रोड और आलीशान अंडरग्राउंड मेट्रो तो मिल रही है, लेकिन जब तक उन्हें मेट्रो स्टेशनों से घर तक छोड़ने के लिए बेस्ट की फीडर बसें पर्याप्त संख्या में सड़कों पर नहीं दिखेंगी, तब तक मुंबई का सार्वजनिक परिवहन संकट दूर नहीं होने वाला। मुंबई बेस्ट बस संकट, बेड़े में कमी के बाद मुंबई बेस्ट बस संकट पर बड़ा फैसला
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