फाल्टा रीपोल रिजल्ट: देबांग्शु पांडा बीजेपी जीत 1 लाख से अधिक वोटों से
देबांग्शु पांडा बीजेपी जीत पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस महीने की शुरुआत में आई ‘भगवा लहर’ और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के बाद, भाजपा ने सत्तारूढ़ रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) को उसके सबसे मजबूत किले में एक और करारी शिकस्त दी है।
दक्षिण 24 परगना जिले के अंतर्गत आने वाली अत्यंत संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल फाल्टा (Falta) विधानसभा सीट पर हुए ऐतिहासिक पुनर्मतदान के नतीजों में भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने एकतरफा मुकाबले में 1 लाख से अधिक मतों के भारी अंतर से अभूतपूर्व जीत दर्ज की है।
रविवार, 24 मई 2026 को कड़ी सुरक्षा के बीच हुई मतगणना के बाद चुनाव आयोग (ECI) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भाजपा के देबांग्शु पांडा को कुल 1,49,666 वोट मिले। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) के शंभू नाथ कुर्मी को 1,09,021 वोटों के विशाल अंतर से पराजित किया।
इस चुनाव में सीपीएम के शंभू नाथ को 40,645 मत मिले, जबकि कांग्रेस के अब्दुर रज्जाक मोल्ला 10,084 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। सबसे चौंकाने वाला हश्र टीएमसी का हुआ, जिसके उम्मीदवार जहांगीर खान महज 7,783 वोट पाकर चौथे स्थान पर खिसक गए और अपनी जमानत तक नहीं बचा सके।
EVM से छेड़छाड़ के आरोपों के बाद हुआ था ऐतिहासिक 100% रीपोल
गौरतलब है कि इससे पहले 29 अप्रैल 2026 को विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के दौरान फाल्टा सीट पर मतदान हुआ था। उस दौरान बड़े पैमाने पर बूथ कैप्चरिंग, ईवीएम (EVM) में तकनीकी हेराफेरी और गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। भाजपा और विपक्ष की पुरजोर मांग के बाद, भारत निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए 29 अप्रैल के मतदान को पूरी तरह रद्द कर दिया था।
इसके बाद, 21 मई को निर्वाचन क्षेत्र के सभी 285 मतदान केंद्रों (Booths) पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (केंद्रीय बलों) की अभूतपूर्व तैनाती के बीच दोबारा मतदान (Repoll) कराया गया। पुनर्मतदान के दौरान स्थानीय मतदाताओं में भारी उत्साह देखा गया और लगभग 88% वोटरों ने बिना किसी डर के अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
मतगणना के पहले दौर से ही भाजपा के देबांग्शु पांडा ने जो बढ़त बनाई, वह 22वें दौर (Round) की समाप्ति तक लगातार बढ़ती चली गई।
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अभिषेक बनर्जी के गंभीर आरोप: “दोपहर 3:30 बजे तक गिनती कैसे खत्म हुई?”
इस करारी हार से तिलमिलाई टीएमसी के अखिल भारतीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी ने इस चुनावी नतीजे को स्वीकार करने से इनकार करते हुए मतगणना प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर चुनाव आयोग और भाजपा के बीच ‘क्रोनॉलोजी’ और मिलीभगत का आरोप लगाया।
अभिषेक बनर्जी ने सवाल उठाया कि 4 मई को जब मुख्य चुनाव के नतीजे आ रहे थे, तब दोपहर 3:30 बजे तक महज 2 से 4 राउंड की गिनती ही पूरी हो सकी थी, लेकिन 24 मई को फाल्टा में इसी समय तक 22 राउंड की पूरी मतगणना कैसे समाप्त हो गई? बनर्जी ने आरोप लगाया, “देश की जनता चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण की हकदार है।
आदर्श आचार संहिता लागू होने के बावजूद पिछले 10 दिनों में फाल्टा के 1,000 से अधिक टीएमसी कार्यकर्ताओं और मजदूरों को डरा-धमकाकर घर छोड़ने पर मजबूर किया गया। पार्टी दफ्तरों में सरेआम तोड़फोड़ की गई और आयोग मूकदर्शक बना रहा।” उन्होंने चुनाव प्रक्रिया के तुरंत बाद राज्य के पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) मनोज अग्रवाल को मुख्य सचिव के पद पर प्रमोट किए जाने को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।
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टीएमसी के अंदरूनी कलह का विस्फोट: “जब ‘पुष्पा झुकेगा नहीं’ तो जहांगीर क्यों झुका?”
फाल्टा का यह नतीजा केवल भाजपा की जीत नहीं, बल्कि टीएमसी के भीतर नेतृत्व और रणनीति को लेकर चल रही अंदरूनी जंग का भी नतीजा है। दरअसल, पुनर्मतदान से ठीक कुछ दिन पहले टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने “व्यक्तिगत कारणों” का हवाला देते हुए अचानक चुनाव प्रचार से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया था।
हालांकि तकनीकी रूप से उनका नाम ईवीएम पर मौजूद था, लेकिन उनके मैदान छोड़ने से टीएमसी का पूरा संगठन बिखर गया।
फाल्टा सीट अभिषेक बनर्जी के संसदीय क्षेत्र डायमंड हार्बर के तहत आती है, जहां से उन्होंने खुद 7 लाख से अधिक वोटों से लोकसभा चुनाव जीता था। ऐसे में उनके गढ़ में उम्मीदवार के इस तरह आत्मसमर्पण करने पर टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी की अध्यक्षता में हुई बंद कमरे की बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने अभिषेक बनर्जी के रणनीतिक प्रबंधन पर तीखे सवाल उठाए।
पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता कुणाल घोष, ऋतब्रत बंद्योपाध्याय और संदीपान साहा ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि ऐन वक्त पर पीठ दिखाने वाले जहांगीर खान के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। कुणाल घोष ने तीखा तंज कसते हुए पत्रकारों से कहा, “जहांगीर खान मंचों से चिल्लाकर कहते थे कि ‘पुष्पा झुकेगा नहीं’, तो फिर वह ऐन वक्त पर भाजपा के सामने क्यों झुक गए? डायमंड हार्बर में ऐसी शर्मनाक हार पार्टी के भविष्य के लिए बेहद खतरनाक संकेत है।”
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संपादकीय दृष्टिकोण:
फाल्टा पुनर्मतदान का यह नतीजा पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीतिक तासीर का स्पष्ट पैगाम है। टीएमसी का यह तर्क कि मतगणना बहुत तेजी से हुई, हार की खीझ से ज्यादा कुछ नहीं लगता, क्योंकि महज 285 बूथों की गिनती में ज्यादा समय की आवश्यकता नहीं होती।
असली मुद्दा यह है कि केंद्रीय बलों की मुस्तैदी ने उस ‘चुनावी प्रबंधन’ को पंगु बना दिया जिसके दम पर दक्षिण 24 परगना में एकतरफा जीत के दावे किए जाते थे।
उम्मीदवार जहांगीर खान का रहस्यमयी ढंग से मैदान से हट जाना और टीएमसी का चौथे नंबर पर जाना यह साबित करता है कि राज्य की कमान शुभेंदु अधिकारी के हाथों में जाने के बाद अब तृणमूल कांग्रेस के जमीनी कैडर का हौसला पूरी तरह टूट चुका है।
अभिषेक बनर्जी के लिए यह हार एक गंभीर आत्ममंथन का विषय है, क्योंकि उनके अपने गढ़ में भाजपा की यह पैठ आने वाले समय में उनकी राजनीतिक प्रासंगिकता पर बड़ा संकट खड़ी कर सकती है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी देबांग्शु पांडा बीजेपी जीत कार्यकर्ताओं के जश्न के बीच देबांग्शु पांडा बीजेपी जीत के मायने
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