सोनम वांगचुक अनशन विवाद भूख हड़ताल के 21वें दिन बड़ा बवाल;
सोनम वांगचुक अनशन विवाद देश की चिकित्सा प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ (NEET-UG) में हुई कथित धांधली और पेपर लीक के खिलाफ पिछले 20 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन उपवास पर बैठे प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता व पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक के आंदोलन ने शनिवार, 18 जुलाई 2026 को एक बेहद नाटकीय और तनावपूर्ण मोड़ ले लिया।
दिल्ली पुलिस ने उच्च न्यायालय के आदेश और गिरती सेहत का हवाला देते हुए शनिवार तड़के वांगचुक को धरना स्थल से जबरन हटाकर नई दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया।
इस पुलिसिया कार्रवाई के बाद जंतर-मंतर से लेकर दक्षिण भारत के थूथुकुडी तक सामाजिक और राजनीतिक आक्रोश फूट पड़ा है।
एक तरफ जहां कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने वांगचुक के समर्थन में खुद अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है, वहीं दूसरी तरफ वांगचुक के परिवार और उनके निजी डॉक्टरों ने सफदरजंग अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट की पारदर्शिता पर गंभीर संदेह व्यक्त करते हुए सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए हैं।
अस्पताल की रिपोर्ट पर शक: “24 घंटे में कैसे गिरा पोटेशियम?”
सफदरजंग अस्पताल में भर्ती 59 वर्षीय सोनम वांगचुक इस समय बेहद कड़ी मेडिकल निगरानी में हैं। सूत्रों के अनुसार, लंबे समय तक ठोस आहार न लेने के कारण उनके शरीर में गंभीर डिहाइड्रेशन (पानी की कमी), मेटाबोलिक असंतुलन और कीटोन का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ा हुआ पाया गया है, जिससे उनकी किडनी और अन्य आंतरिक अंगों के काम करने की क्षमता पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।
हालांकि, गंभीर स्थिति के बावजूद वांगचुक ने किसी भी प्रकार की दवा, ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ORS) या नस के जरिए दिए जाने वाले तरल पदार्थ (IV Fluid) को लेने से साफ इनकार कर दिया है।
इस बीच, सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने अस्पताल प्रशासन पर पारदर्शिता की कमी और रिपोर्ट में हेरफेर करने का सीधा आरोप लगाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना दर्द साझा करते हुए लिखा:
“सफदरजंग अस्पताल की रिपोर्ट दिखा रही है कि उनके शरीर में पोटेशियम का स्तर अचानक गिरकर 2.9 हो गया है, जबकि महज कल तक यह 4.3 था। प्रशासन न तो हमें किसी दूसरी लैब से जांच कराने के लिए सैंपल दे रहा है और न ही मेरी मौजूदगी में दोबारा ब्लड सैंपल लिया जा रहा है।
3 घंटे से अधिक समय तक इंतजार कराने के बाद भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। पारदर्शिता की इस भारी कमी से हमें गहरा संदेह हो रहा है। हम तुरंत उनके डिस्चार्ज की मांग कर रहे हैं ताकि उन्हें किसी ऐसे चिकित्सालय में ले जाया जा सके जहां हम सुरक्षित महसूस कर सकें।”
वांगचुक के निजी चिकित्सक डॉ. नितिन दिघे ने भी इस पूरी अस्पताल स्थानांतरण प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है और कहा है कि मेडिकल बुलेटिन को पूरी तरह गुप्त रखा जा रहा है, जो लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।
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जंतर-मंतर पर आधी रात को ड्रामा; दिपके पर फेंकी गई स्याही
सोनम वांगचुक को जबरन हटाए जाने के बाद जंतर-मंतर छावनी में तब्दील हो गया है। सीजेपी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दिपके ने दिल्ली पुलिस पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट करने और युवाओं की आवाज दबाने का आरोप लगाया। दिपके ने घोषणा की कि वे वांगचुक के संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए तत्काल प्रभाव से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ रहे हैं।
इस बीच, माहौल तब और गरमा गया जब जंतर-मंतर पर एक जनसभा को संबोधित करने के दौरान एक अज्ञात महिला ने अभिजीत दिपके के ऊपर स्याही फेंक दी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए स्याही फेंकने वाली महिला को हिरासत में ले लिया है, हालांकि इस हरकत के पीछे के मुख्य कारणों का अभी पता नहीं चल सका है।
दिपके ने इस घटना को शांतिपूर्ण आंदोलन को भटकाने और बाधित करने की एक सुनियोजित साजिश करार दिया है। इसके बावजूद, उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी 20 जुलाई को प्रस्तावित छात्रों का “चलो संसद मार्च” किसी भी कीमत पर रुकने वाला नहीं है।
राहुल गांधी और अन्ना हजारे ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया
वांगचुक के खिलाफ हुई इस प्रशासनिक कार्रवाई पर देश के बड़े राजनेताओं और विचारकों ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस कदम की तीव्र भर्त्सना करते हुए ट्वीट किया कि सरकार देश के युवाओं के भविष्य की रक्षा की मांग कर रहे एक सच्चे और शांतिपूर्ण देशभक्त की आवाज को लाठियों और पुलिस के दम पर दबाने का प्रयास कर रही है, जिसे देश कभी स्वीकार नहीं करेगा।
वहीं, महाराष्ट्र के रालेगण सिद्धि से वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने भी इस विवाद में कूदते हुए केंद्र सरकार को नसीहत दी है। अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से अपील की है कि वे हठधर्मिता छोड़कर तुरंत सोनम वांगचुक और आंदोलनकारी छात्रों के साथ सीधे संवाद की प्रक्रिया शुरू करें, क्योंकि एक पारदर्शी परीक्षा प्रणाली देश के युवाओं का संवैधानिक अधिकार है।
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थूथुकुडी तक पहुंची आंदोलन की आंच
दिल्ली की इस प्रशासनिक हलचल का असर अब देश के अन्य हिस्सों में भी साफ तौर पर देखा जा रहा है। शनिवार शाम तमिलनाडु के थूथुकुडी (चिदंबरम नगर बस-स्टॉप) पर विभिन्न सामाजिक संगठनों और कार्यकर्ताओं के एक बड़े समूह ने सोनम वांगचुक के समर्थन में एक विशाल सामूहिक धरने का आयोजन किया।
हाथों में तख्तियां लिए कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मांग की कि नीट परीक्षा में सुधार करने तथा इस परीक्षा के मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या करने वाले मासूम छात्रों को न्याय दिलाने के लिए सरकार को तुरंत वांगचुक की सभी मांगें मान लेनी चाहिए।
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संपादकीय दृष्टिकोण:
एक लोकतांत्रिक राष्ट्र में जब किसी परीक्षा की शुचिता पर सवाल उठते हैं, तो सरकार का पहला कर्तव्य छात्रों में विश्वास पैदा करना होता है। लेकिन सोनम वांगचुक जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित कार्यकर्ता को आधी रात को धरना स्थल से उठाकर अस्पताल में एकांतवास में डाल देना और उनकी मेडिकल रिपोर्ट को लेकर परिवार में अविश्वास पैदा करना किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र के लक्षण नहीं हैं।
परीक्षा में सुधार और पारदर्शिता की मांग को पुलिसिया लाठियों और दमन चक्र से नहीं दबाया जा सकता। तमिलनाडु से लेकर दिल्ली तक फैली यह असंतोष की आग यह साबित करती है कि नीट का मुद्दा अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक बड़ा राष्ट्रीय आंदोलन बन चुका है। सरकार को 20 जुलाई के संसद मार्च से पहले संवेदनशीलता दिखाते हुए इस गतिरोध को बातचीत के जरिए सुलझाना चाहिए। सरकार के साथ बैठक के बीच जानें क्या है सोनम वांगचुक अनशन विवाद की वर्तमान स्थिति सोनम वांगचुक अनशन विवाद,
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