सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का 18वां दिन: जंतर-मंतर पर बढ़ी हलचल
सोनम वांगचुक भूख हड़ताल देश की सबसे बड़ी चिकित्सा प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ (NEET-UG) में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर अब बड़े वैचारिक और सामाजिक आंदोलन का केंद्र बन चुका है।
प्रख्यात शिक्षाविद और क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल आज अपने 18वें दिन में प्रवेश कर चुकी है। इस संवेदनशील मोड़ पर, फिल्म जगत के बेबाक निर्देशक अनुराग कश्यप ने वांगचुक के समर्थन में आकर व्यवस्था पर बेहद तीखा और कड़ा हमला बोला है।
अनुराग कश्यप ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर गहरे दुख और गुस्से का इजहार करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अब इस पूरे मामले और छात्रों के भविष्य से हो रहे खिलवाड़ पर चुप रहने में उन्हें खुद से शर्म आने लगी है।
कश्यप के अलावा बॉलीवुड और राजनीतिक गलियारों की तमाम बड़ी हस्तियां इस आंदोलन के समर्थन में खड़ी दिखाई दे रही हैं, जबकि दूसरी तरफ वांगचुक की तेजी से गिरती सेहत ने डॉक्टरों और समर्थकों की चिंताएं बहुत बढ़ा दी हैं।
अनुराग कश्यप का तीखा हमला: “बहरे भी इतने बहरे नहीं होते”
सोनम वांगचुक के आंदोलन को अपना खुला समर्थन देते हुए फिल्ममेकर अनुराग कश्यप ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक बेहद गंभीर नोट साझा किया। कश्यप ने लिखा:
“एक समय था जब भूख हड़ताल का कुछ वजूद और मतलब होता था। लोग ऐसे ही अपनी जान दांव पर लगाकर भूख हड़ताल पर नहीं बैठ जाते। यह सचमुच बेहद परेशान करने वाला है जब पूरी व्यवस्था और सिस्टम आम लोगों की जिंदगी के प्रति इस कदर बेपरवाह और असंवेदनशील हो जाता है।
केवल एक बेहद हमदर्द और सच व न्याय में अटूट विश्वास रखने वाला इंसान ही ऐसा कदम उठाने का हौसला रख सकता है। मुझमें वह हिम्मत और बहादुरी नहीं है जो सोनम वांगचुक दिखा रहे हैं।”
एक अन्य पोस्ट में अनुराग कश्यप का गुस्सा सीधे व्यवस्था पर फूटा। उन्होंने लिखा, “अब पानी सिर से ऊपर जा रहा है। बहरे भी इतने बहरे नहीं होते और अंधे भी इतने अंधे नहीं होते। जानवरों और राक्षसों के दिल भी इतने पत्थर नहीं होते, ये तो उनसे भी बदतर आदमखोर हैं। अब चुप रहने में भी शर्म महसूस होने लगी है।”
अनुराग का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इसे युवा पीढ़ी व सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा व्यवस्था के खिलाफ एक बड़ी आवाज के रूप में साझा किया जा रहा है।
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18वें दिन वज़न में भारी गिरावट; डॉक्टरों की चौबीसों घंटे निगरानी
जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा में सुधारों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का विरोध प्रदर्शन बुधवार को 26वें दिन में पहुंच गया। इस आंदोलन को नई ताकत तब मिली जब 28 जून को सोनम वांगचुक भी छात्रों के हक की लड़ाई में खुद अनशन पर बैठ गए।
आंदोलनकारियों द्वारा जारी ताजा मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, 18 दिनों के लगातार उपवास के कारण सोनम वांगचुक का शरीर अत्यधिक कमजोर हो चुका है। उनका वजन अब घटकर 57.15 किलोग्राम रह गया है, जिसमें पिछले 24 घंटों के भीतर ही 400 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई है। अनशन शुरू होने के बाद से वे अब तक कुल 8.9 किलोग्राम वजन गंवा चुके हैं।
मेडिकल टीम के अनुसार:
ब्लड प्रेशर (BP): 105/76 mmHgब्लड शुगर: 80 mg/dLऑक्सीजन सैचुरेशन: 97%शारीरिक स्थिति: वे पूरी तरह होश में हैं और मानसिक रूप से बेहद सतर्क हैं, लेकिन शरीर में कमजोरी के कारण उन्हें डॉक्टरों की निरंतर और चौबीसों घंटे निगरानी में रखा गया है।
प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल; 16 जुलाई को सामूहिक उपवास का आह्वान
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सीजेपी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने केंद्र सरकार की “उदासीनता और खामोशी” पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। दिपके ने एक्स (X) पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से जवाबदेही की मांग की। उन्होंने लिखा, “सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का 18वां दिन है।
जो व्यक्ति आत्महत्या करने को मजबूर होने वाले निर्दोष छात्रों को न्याय दिलाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहा है, उसे सरकार से केवल खामोशी मिल रही है। यह उदासीनता क्रूरता की पराकाष्ठा है।”
सीजेपी ने वांगचुक और आंदोलनकारी छात्रों के समर्थन में कल, 16 जुलाई को जंतर-मंतर पर एक दिवसीय सामूहिक भूख हड़ताल (Mass Hunger Strike) का आह्वान किया है। इसके साथ ही, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और शिक्षा मंत्री को पद से हटाने की मांग को लेकर आगामी 20 जुलाई को “चलो संसद” मार्च की घोषणा की गई है, जिसके मिस्ड-कॉल अभियान को अब तक 1.3 लाख से अधिक लोगों का समर्थन मिल चुका है।
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विपक्षी नेताओं और मशहूर हस्तियों की भावुक अपील
वांगचुक की लगातार बिगड़ती सेहत को देखते हुए देश के कई शीर्ष राजनेताओं और मशहूर हस्तियों ने चिंता व्यक्त की है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने उनसे अपना उपवास तोड़ने की भावुक अपील की है ताकि उनकी जान सुरक्षित रहे
इन नेताओं ने सरकार से तुरंत प्रदर्शनकारियों के साथ मेज पर बैठकर बातचीत शुरू करने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, दिग्गज अभिनेत्री जीनत अमान, स्वरा भास्कर, गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला और वामपंथी छात्र संगठन आईसा (AISA) के नेताओं ने भी मंच पर पहुंचकर आंदोलन से अपनी एकजुटता प्रकट की है।
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संपादकीय दृष्टिकोण:
एक लोकतांत्रिक देश में जब शिक्षा व्यवस्था की कमियों को उजागर करने और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए देश के सबसे सम्मानित नागरिकों और पर्यावरणविदों में से एक को 18 दिनों तक भूखा बैठना पड़े, तो यह हमारी प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सोनम वांगचुक केवल लद्दाख के अधिकारों की ही नहीं, बल्कि देश के लाखों युवाओं के सपनों की रक्षा के लिए दिल्ली की तपती गर्मी में संघर्ष कर रहे हैं। अनुराग कश्यप जैसे प्रभावशाली फिल्मकारों का यह कहना कि ‘अब चुप रहने में शर्म आती है’, देश के बौद्धिक वर्ग के भीतर सुलगते असंतोष को दिखाता है।
सरकार को हठधर्मिता और राजनीतिक नफा-नुकसान से ऊपर उठकर तुरंत आंदोलनकारियों से संवाद स्थापित करना चाहिए, क्योंकि किसी भी संवेदनशील राष्ट्र में छात्रों की चीखें और मनीषियों की भूख अनसुनी नहीं रहनी चाहिए।
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