“सार्वजनिक परीक्षा संशोधन 2026” पर तीखी बहस:
सार्वजनिक परीक्षा संशोधन 2026 संसद के मॉनसून सत्र के नौवें दिन (गुरुवार, 30 जुलाई 2026) संसद के दोनों सदनों में देश के युवाओं और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयकों पर गहन चर्चा और विधायी कार्यवाही देखने को मिली।
जहाँ एक ओर लोकसभा ने संक्षिप्त बहस के बाद राष्ट्रगान व वंदे मातरम के अपमान को रोकने से जुड़ा ‘द प्रिवेंशन ऑफ़ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर (अमेंडमेंट) बिल, 2026’ पारित कर दिया, वहीं दूसरी ओर राज्यसभा में ‘द पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स (प्रिवेंशन ऑफ़ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026’ को विचार और पारित करने के लिए पेश किया गया।
कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लंच के बाद उच्च सदन में इस विधेयक को पेश किया। यह विधेयक एक दिन पहले ही लोकसभा से ध्वनि मत द्वारा पारित हो चुका है।
पेपर लीक पर ‘ज़ीरो टॉलरेंस’: विधेयक के कड़े कानूनी प्रावधान
विधेयक पेश करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार प्रतियोगी व सार्वजनिक परीक्षाओं में ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। यह नया कानून वर्ष 2024 के मूल एंटी-पेपर लीक कानून में मिली व्यावहारिक चुनौतियों और अनुभवों के आधार पर तैयार किया गया है।
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संशोधित कानून के मुख्य बिंदु:
व्यक्तिगत परीक्षार्थियों/उपद्रवियों हेतु सज़ा: अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर सज़ा को 3-5 साल से बढ़ाकर 5 से 10 साल की जेल और अधिकतम जुर्माना ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख कर दिया गया है।
सर्विस प्रोवाइडर्स (सेवा प्रदाता) पर शिकंजा: गड़बड़ी में शामिल परीक्षा एजेंसियों के लिए जुर्माना ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ किया गया है। साथ ही सरकारी परीक्षाएं आयोजित करने पर प्रतिबंध (Debarment) की अवधि 4 साल से बढ़ाकर 8 साल कर दी गई है।
संगठित अपराध (Organised Crime): पेपर लीक सिंडिकेट और संगठित गिरोहों के लिए सज़ा 7 से 10 साल की जेल और अधिकतम ₹10 करोड़ तक का जुर्माना तय किया गया है। दोषी संस्थाओं की संपत्ति ज़ब्त करने का भी प्रावधान है।
टाइम-बाउंड जांच व फास्ट-ट्रैक कोर्ट: प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने के 2 महीने के भीतर जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल करना अनिवार्य होगा। मामले की दैनिक सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट-ट्रैक अदालतें गठित होंगी, जिन्हें चार्जशीट के 3 महीने के भीतर ट्रायल पूरा करना होगा।
केंद्रीय मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि 2024 के मूल कानून के लागू होने के बाद से अब तक 52 प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं और कड़े कदमों के कारण पेपर लीक से जुड़ी अवसाद व आत्महत्या की घटनाओं में गिरावट आई है।
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विपक्ष का हमला: “केबल दिखावटी बदलाव, कड़े क्रियान्वयन का अभाव”
विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हालांकि कांग्रेस पार्टी प्रतियोगी परीक्षाओं को पारदर्शी बनाने वाले किसी भी कानून का समर्थन करती है, लेकिन सरकार का यह कदम केवल दिखावटी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि शैक्षणिक संस्थानों में स्वायत्तता समाप्त की जा रही है और आरएसएस (RSS) समर्थित व्यक्तियों को शीर्ष पदों पर बैठाया जा रहा है। खड़गे ने गृह मंत्री और शिक्षा मंत्रालय की जवाबदेही पर भी सवाल उठाए।
विभिन्न दलों का रुख:
डीएमके व सपा: डीएमके के तिरुचि शिवा और समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव ने नीट (NEET-UG) परीक्षा को पूरी तरह समाप्त करने और मेडिकल प्रवेश परीक्षा कराने का अधिकार पुनः राज्यों को सौंपने की मांग की।
तृणमूल कांग्रेस व आप: टीएमसी की सागरिका घोष और आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने देश भर की फास्ट-ट्रैक अदालतों में लंबित मुकदमों के बोझ और बुनियादी ढांचे की कमी का मुद्दा उठाया।
सत्ता पक्ष व सहयोगी दल: जेडी(यू) के संजय कुमार झा और एनसीपी के प्रफुल्ल पटेल ने बिल का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी सिंडिकेट को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
लोकसभा में ‘वंदे मातरम’ के सम्मान वाला विधेयक पारित
इससे पूर्व लोकसभा में ‘द प्रिवेंशन ऑफ़ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर (अमेंडमेंट) बिल, 2026′ पर सांकेतिक बहस हुई, जिसमें बीजेपी के संबित पात्रा और डीएमके की कनिमोझी ने अपने विचार व्यक्त किए। ध्वनि मत से बिल पारित होने के बाद निचले सदन की कार्यवाही शुक्रवार (31 जुलाई 2026) सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
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संपादकीय दृष्टिकोण:
देश भर के करोड़ों परीक्षार्थियों और युवाओं के लिए सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता अत्यंत संवेदनशील मुद्दा है। राज्यसभा में चल रही यह बहस इस बात का प्रमाण है कि केवल कड़े कानून बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जांच प्रक्रियाओं को समयबद्ध बनाना और स्पेशल प्रॉसिक्यूटर की नियुक्ति से ही ‘पेपर लीक माफिया’ पर लगाम कसी जा सकेगी।
2 महीने में जांच और 3 महीने में न्यायिक ट्रायल का वैधानिक प्रावधान यदि सख्ती से लागू होता है, तो यह भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली के लिए एक बड़ा सुधार साबित होगा। सार्वजनिक परीक्षा संशोधन 2026: भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिए लागू हुआ सार्वजनिक परीक्षा संशोधन 2026
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