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महालक्ष्मी स्काईवॉक ट्रैवलैटर प्रोजेक्ट तैयार: मेट्रो, मोनोरेल से 20 मिनट बचेगा

महालक्ष्मी स्काईवॉक ट्रैवलैटर प्रोजेक्ट

महालक्ष्मी स्काईवॉक ट्रैवलैटर प्रोजेक्ट देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों के बीच ‘लास्ट-माइल कनेक्टिविटी’ और सहज बदलाव (Interchange) को नई दिशा देने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर हासिल कर लिया गया है।

मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (MMRDA) ने दक्षिण मुंबई के महालक्ष्मी क्षेत्र में बन रहे महालक्ष्मी मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट का लगभग 90 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया है।

₹60 करोड़ की लागत से बन रहा यह प्रोजेक्ट भारत का पहला ऐसा स्काईवॉक होगा जिसमें हवाई अड्डों की तर्ज पर ‘ट्रैवलैटर्स’ (चलने वाले वॉकवे) लगाए गए हैं। यह 283 मीटर लंबा ऊंचा पैदल यात्री कॉरिडोर मुंबई मेट्रो लाइन 3 (एक्वा लाइन), पश्चिम रेलवे के महालक्ष्मी सबअर्बन रेलवे स्टेशन और संत गाडगे महाराज चौक मोनोरेल स्टेशन को एक सूत्र में पिरोएगा।

सफर में 20 मिनट की बचत, बदल जाएगी मुंबई की रफ्तार

वर्तमान में महालक्ष्मी क्षेत्र में लोकल ट्रेन से उतरकर मेट्रो या मोनोरेल पकड़ने के लिए यात्रियों को व्यस्त सड़कों, भारी ट्रैफिक और कई सीढ़ियाँ चढ़ने-उतरने की चुनौतियों से जूझना पड़ता है।

MMRDA के अनुसार, इस एकीकृत स्काईवॉक के पूरी तरह चालू होने के बाद तीनों परिवहन प्रणालियों के बीच आने-जाने (ट्रान्सफर) में लगने वाला समय लगभग 20 मिनट कम हो जाएगा।

प्रोजेक्ट की प्रमुख विशेषताएं (एक नज़र में):

कुल लागत: ₹60 करोड़

कुल लंबाई व चौड़ाई: 283 मीटर लंबा और 11 मीटर चौड़ा स्ट्रक्चर

ट्रैवलैटर्स की संख्या: 6 स्वचालित मूविंग वॉकवे (कुल लंबाई: 176 मीटर)

लिफ्ट सुविधा: बुज़ुर्गों, दिव्यांगों और भारी सामान वाले यात्रियों के लिए 2 पैसेंजर लिफ्ट

यात्री क्षमता: प्रति घंटा लगभग 4,500 यात्री

निर्माण अवधि: मध्य 2023 से शुरू, अंतिम चरण में जारी

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क्या है ट्रैवलैटर और क्यों है यह खास?

ट्रैवलैटर एक स्वचालित क्षैतिज कन्वेयर बेल्ट (मूविंग वॉकवे) होता है, जो आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के बड़े टर्मिनलों पर देखने को मिलता है। 11 मीटर चौड़े इस स्काईवॉक में 176 मीटर की दूरी तय करने के लिए 6 ट्रैवलैटर्स लगाए गए हैं। इससे यात्रियों को पूरी दूरी पैदल नहीं चलनी पड़ेगी, जिससे बुजुर्गों और दैनिक यात्रियों को भारी सहूलियत होगी।

भूमिगत पाइपलाइनों और ट्रैफिक के बीच जटिल इंजीनियरिंग

महालक्ष्मी का साने गुरुजी मार्ग मुंबई के सबसे व्यस्त और घनी उपयोगिताओं (Utilities Corridor) वाले इलाकों में से एक है। MMRDA अधिकारियों के अनुसार, स्काईवॉक की नींव (Foundation) का काम शुरू करने से पहले जमीन के नीचे दबी 1,800 मिमी व्यास वाली स्टॉर्म वॉटर ड्रेन (तूफानी जल निकासी नाली) को स्थानांतरित (Shift) करना पड़ा।

इलाके में पेयजल आपूर्ति और सीवर पाइपलाइनों को प्रभावित किए बिना, मुंबई ट्रैफिक पुलिस के साथ समन्वय बनाकर साने गुरुजी मार्ग पर यातायात और गणेश विसर्जन जुलूसों को सुचारू रखते हुए यह जटिल निर्माण कार्य पूरा किया गया।

मोनोरेल नेटवर्क का अपग्रेडेशन जारी

यद्यपि यह स्काईवॉक संत गाडगे महाराज चौक मोनोरेल स्टेशन को सीधे मेट्रो और लोकल से जोड़ेगा, लेकिन सितंबर 2025 से तकनीकी कारणों से निलंबित पड़ी मोनोरेल सेवाओं को बहाल करने के लिए भी काम जारी है।

प्राधिकरण मोनोरेल में नया ‘कम्युनिकेशन-बेस्ड ट्रेन कंट्रोल’ (CBTC) सिग्नलिंग सिस्टम और नई रेक शामिल कर रहा है, ताकि स्काईवॉक चालू होते ही दक्षिण मुंबई और वर्ली के यात्रियों को निर्बाध कनेक्टिविटी मिल सके।

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यात्रियों और परिवहन विशेषज्ञों की राय

स्थानीय नियमित यात्रियों और शहरी परिवहन योजनाकारों ने इस पहल का स्वागत किया है। यात्रियों का मानना है कि सात रास्ता, वर्ली और महालक्ष्मी के बीच का यह ट्रैवलैटर लिंक ट्रैफिक जाम में फंसे बिना समय पर गंतव्य तक पहुँचने में मदद करेगा।

परिवहन विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक विभिन्न सार्वजनिक साधनों को एक एकीकृत नेटवर्क से नहीं जोड़ा जाता, तब तक लोग निजी वाहनों का त्याग नहीं करेंगे; महालक्ष्मी का यह प्रोजेक्ट उसी दिशा में एक ठोस कदम है।

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संपादकीय दृष्टिकोण:

मुंबई में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार के साथ-साथ ‘लास्ट-माइल कनेक्टिविटी’ सबसे बड़ी चुनौती रही है। एमएमआरडीए का महालक्ष्मी मल्टीमॉडल स्काईवॉक केवल एक पैदल मार्ग नहीं, बल्कि भारतीय शहरी बुनियादी ढांचे के लिए एक नया मॉडल है।

यदि आगामी कुछ महीनों में इसका शेष 10 प्रतिशत काम और मोनोरेल का सिग्नलिंग अपग्रेड समय पर पूरा हो जाता है, तो यह दक्षिण मुंबई में दैनिक यातायात की तस्वीर पूरी तरह बदल देगा। महालक्ष्मी स्काईवॉक ट्रैवलैटर प्रोजेक्ट: यात्रियों का सफर होगा आसान, तेजी से शुरू हुआ

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