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बांकीपुर उपचुनाव परिणाम 2026 BJP के गढ़ में प्रशांत किशोर ने बनाई बढ़त,

बांकीपुर उपचुनाव परिणाम 2026

बांकीपुर उपचुनाव परिणाम 2026 बिहार की सबसे चर्चित और हाई-प्रोफाइल सीटों में से एक बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव 2026 की मतगणना के शुरुआती रुझानों ने राज्य के राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है।

सोमवार (3 अगस्त 2026) को शुरू हुई वोटों की गिनती के पहले चरण में जन सुराज पार्टी के संस्थापक और चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा पर शुरुआती बढ़त हासिल कर ली है।

यह उपचुनाव प्रशांत किशोर का पहला प्रत्यक्ष चुनावी मुकाबला है, जहाँ वे दशकों पुराने भाजपा के इस पारंपरिक गढ़ को ढहाने के लिए पूरी ताकत झोंक चुके हैं। बांकीपुर सीट अप्रैल 2026 में तब रिक्त हुई थी जब पूर्व विधायक और भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नबीन का निर्वाचन राज्यसभा के लिए हुआ था। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और पारदर्शी व्यवस्था के बीच मतगणना कुल 31 राउंड में संपन्न होगी।

शुरुआती रुझानों में जन सुराज आगे: जानिए आंकड़ों का गणित

सुबह 8:00 बजे शुरू हुई मतगणना के पहले राउंड के बाद, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा जारी शुरुआती रुझानों के अनुसार प्रशांत किशोर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा से 862 वोटों से आगे चल रहे थे।

इस सीट पर कुल 26 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला त्रिकोणीय माना जा रहा है:

प्रशांत किशोर (जन सुराज पार्टी): पहली बार खुद प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे हैं और ‘बदलाव’ के मुद्दे पर चुनाव लड़ रहे हैं।

नीरज कुमार सिन्हा (BJP): भाजपा के तीन दशक पुराने इस गढ़ को बचाने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

रेखा गुप्ता (RJD): राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं, जिन्हें पिछले आम चुनाव में नितिन नबीन के खिलाफ 50,000 से अधिक वोट मिले थे।

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34.24% कम मतदान: क्या ये बदलाव के संकेत हैं?

30 जुलाई 2026 को बांकीपुर सीट पर हुए मतदान में 34.24 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई थी। यह आंकड़ा पिछले साल (नवंबर 2025) हुए बिहार विधानसभा चुनाव के 41.45% मतदान की तुलना में 7.21% कम है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शहरी इलाकों में कम मतदान अक्सर दो मुख्य बातों का संकेत होता है—या तो सत्ताधारी दल के पारंपरिक मतदाताओं में उदासीनता, या फिर कैडर आधारित पार्टियों का साइलेंट वोट ट्रांसफर।

भाजपा के लिए यह सीट 1995 (जब इसे ‘पटना वेस्ट’ के नाम से जाना जाता था) से अजेय रही है। ऐसे में कम मतदान के बीच प्रशांत किशोर की शुरुआती बढ़त भाजपा रणनीतिकारों के लिए चिंता का सबब बन सकती है।

प्रशांत किशोर का ECI में शिकायती मोर्चा और पुलिस पर आरोप

मतगणना के दिन से ठीक पहले, रविवार (2 अगस्त) को पटना के पाटलिपुत्र स्थित पार्टी मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने राज्य प्रशासन और पटना पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए।

प्रशांत किशोर ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) में औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि मतदान से ठीक 48 घंटे पहले (साइलेंस पीरियड के दौरान) पटना पुलिस ने भाजपा के इशारे पर जन सुराज पार्टी के 54 कार्यकर्ताओं और स्थानीय समर्थकों को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया।

उन्होंने पटना एसएसपी के इस दावे को खारिज किया कि हिरासत में लिए गए लोग ‘बाहरी’ थे। किशोर ने कहा, “हमारे पास स्पष्ट साक्ष्य हैं कि हिरासत में लिए गए लोग स्थानीय नागरिक थे और उन्होंने किसी कानून या दंड प्रक्रिया संहिता का उल्लंघन नहीं किया था।”

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आरजद की प्रतिक्रिया और भाजपा का दावा

दूसरी ओर, RJD उम्मीदवार रेखा गुप्ता ने जीत का भरोसा जताते हुए कहा कि बांकीपुर की जनता इस बार वास्तविक बदलाव के लिए वोट दे चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदान के दिन भाजपा समर्थित बूथ एजेंटों ने मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास किया। साथ ही उन्होंने प्रशांत किशोर को “केवल सोशल मीडिया का घटनाक्रम” करार देते हुए खारिज किया।

हालाँकि, भाजपा के स्थानीय नेतृत्व का दावा है कि जैसे-जैसे ईवीएम (EVM) राउंड आगे बढ़ेंगे और शहरी बूथों की गिनती शुरू होगी, पार्टी अपनी पुरानी बढ़त हासिल कर लेगी।

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संपादकीय दृष्टिकोण:

बांकीपुर का यह उपचुनाव केवल एक सीट का फैसला नहीं है, बल्कि यह बिहार की भावी राजनीति की दिशा तय करने वाला लिटमस टेस्ट है।

यदि प्रशांत किशोर भाजपा के इस 30 साल पुराने किले में सेंध लगाने में सफल होते हैं, तो यह बिहार में पारंपरिक राष्ट्रीय व क्षेत्रीय दलों (BJP, JDU, RJD) के विकल्प के रूप में ‘तीसरे मोर्चे’ की स्वीकार्यता पर मुहर लगा देगा। मतगणना के अगले राउंड इस कड़े मुकाबले का रुख स्पष्ट करेंगे। बीजेपी, आरजेडी और जन सुराज के बीच कांटे की टक्कर के बाद बांकीपुर उपचुनाव परिणाम 2026 का विश्लेषण

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