Loading Now

कर्नाटक कैबिनेट विस्तार विवाद कांग्रेस में बगावत:

कर्नाटक कैबिनेट विस्तार विवाद

कर्नाटक कैबिनेट विस्तार विवाद कर्नाटक में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल के पहले व्यापक विस्तार के साथ ही सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी में आंतरिक कलह और असंतोष का नया दौर शुरू हो गया है।

छह बार के विधायक और पूर्व राज्य मंत्री दिनेश गुंडू राव को कैबिनेट से बाहर रखे जाने पर उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी गहरी निराशा व्यक्त की है। उनका कहना है कि पार्टी और राज्य के प्रति जीवनभर की वफादारी के बावजूद उन्हें हटाने की कोई ठोस वजह नहीं बताई गई।

सोमवार को लोक भवन में आयोजित एक नाटकीय शपथ ग्रहण समारोह में 19 विधायकों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। हालांकि, कांग्रेस आलाकमान ने 20 नामों को मंजूरी दी थी, लेकिन अंतिम समय में हुए राजनीतिक फेरबदल और अंतर्विरोधों के कारण पूरी प्रक्रिया विवादों से घिर गई।

“मेरी गलती क्या थी?”: दिनेश गुंडू राव ने उठाए तीखे सवाल

मंत्रिमंडल से बाहर किए जाने के बाद वरिष्ठ नेता दिनेश गुंडू राव ने अपनी बात खुलकर मीडिया और सोशल मीडिया के सामने रखी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब उनका ट्रैक रिकॉर्ड बेदाग रहा है, तो उन्हें बिना किसी संवाद के क्यों किनारे कर दिया गया।

राव ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा:

“मैं छह बार से विधायक चुना जा रहा हूँ, जो जनता के अटूट विश्वास का प्रमाण है। यूथ कांग्रेस से लेकर केपीसीसी और एआईसीसी तक, मैंने हमेशा पार्टी की विचारधारा के लिए निष्ठा से काम किया।

दुख इस बात का नहीं कि मैं मंत्री नहीं बना, बल्कि दुख इस बात का है कि बिना किसी कारण या बातचीत के मुझे बाहर कर दिया गया। क्या मेरा प्रदर्शन खराब था? क्या मुझ पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप था? कम से कम पार्टी को एक सही वजह तो बतानी चाहिए थी।”

इसे भी पढ़े :  BMCस्वच्छता अभियान मुंबई कचरा फैलाने वालों पर CCTV से नज़र,

आखिरी वक्त में बदले नाम और गायत्री शांतेगौड़ा का टला शपथ ग्रहण

कैबिनेट विस्तार की प्रक्रिया सुबह से लेकर शाम तक भारी भ्रम और उतार-चढ़ाव से भरी रही।

लिस्ट में फेरबदल: सुबह केंद्रीय नेतृत्व द्वारा जारी 20 नामों की शुरुआती सूची में दोपहर तक बदलाव कर दिया गया। भटकल के विधायक मनकाला वैद्य का नाम हटाकर पूर्व मंत्री एस.एस. मल्लिकार्जुन को शामिल किया गया। सूत्रों के अनुसार, दावणगेरे से मजबूत राजनीतिक रसूख रखने वाले मल्लिकार्जुन के परिवार ने इस्तीफे तक की दबाव नीति अपनाई थी।

महिला प्रतिनिधित्व का संकट: आलाकमान द्वारा स्वीकृत सूची में एमएलसी गायत्री शांतेगौड़ा एकमात्र महिला चेहरा थीं। हालांकि, जातिगत और क्षेत्रीय संतुलन (विशेषकर कुरुबा समुदाय के समीकरणों) पर मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ नेताओं के बीच हुए मतभेद के चलते अंतिम समय में उनका शपथ ग्रहण टाल दिया गया। इसके चलते नए मंत्रिमंडल में एक भी महिला मंत्री शामिल नहीं हो सकी।

वरिष्ठों की उपेक्षा से बगावत: विधायक का इस्तीफा

सिद्धारमैया सरकार के कार्यकाल में मंत्री रहे एच.सी. महादेवप्पा, एच.के. पाटिल, के. वेंकटेश, एम.सी. सुधाकर और लक्ष्मी हेब्बालकर जैसे कई कद्दावर नेताओं को इस नए मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है।

इस अनदेखी का नतीजा यह हुआ कि इंडी विधानसभा सीट से वरिष्ठ कांग्रेस विधायक यशवंतरायगौड़ा वी. पाटिल ने निराशा में अपनी विधायकी से इस्तीफा दे दिया। वहीं, कई अन्य दावेदारों के समर्थकों ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी के कई विधायकों का मानना है कि संगठन में युवा चेहरों को तरजीह देने के नाम पर अनुभवी नेताओं को अपमानित किया जा रहा है।

इसे भी पढ़े :  यौन उत्पीड़न मामले में बृजभूषण शरण सिंह बरी:

कैबिनेट के नए चेहरे और सामाजिक-जातिगत संतुलन

विरोध और असंतोष के बीच कांग्रेस आलाकमान ने कैबिनेट में सामाजिक न्याय और जातिगत संतुलन का हवाला देकर अपने फैसले का बचाव किया है। नए शामिल किए गए 19 मंत्रियों में 12 नए चेहरे हैं, जिनमें पी.एम. नरेंद्रस्वामी, शिवराज तंगदागी, रुद्रप्पा लमानी, बी. नागेंद्र, संतोष लाड, मधु बंगारप्पा और लक्ष्मण सावदी मुख्य रूप से शामिल हैं।

कैबिनेट का नया जातिगत और सांगठनिक ढांचा:

मंत्रिमंडल का आकार: कुल 34 पद (33 भरे गए, 1 पद फिलहाल रिक्त)।

जातिगत प्रतिनिधित्व: 33 मंत्रियों में से 7 लिंगायत, 7 अनुसूचित जाति (SC), 7 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), 5 वोक्कालिगा, 3 अनुसूचित जनजाति (ST) और 3 मुस्लिम समुदाय से हैं।

संसदीय पद: जी.एस. पाटिल को विधानसभा अध्यक्ष, ए.एस. पोन्नान्ना को उपाध्यक्ष, सलीम अहमद को विधान परिषद सभापति और उमाश्री को उप-सभापति नियुक्त करने की मंजूरी दी गई।

ब्राह्मण समुदाय की अनुपस्थिति: कर्नाटक के राजनीतिक इतिहास में यह दुर्लभ मौका है जब राज्य मंत्रिमंडल में ब्राह्मण समुदाय से एक भी प्रतिनिधि शामिल नहीं है, जिससे राजनीतिक गलियारों में एक नई चर्चा छिड़ गई है।

इसे भी पढ़े :  पीएम मोदी वीडियो मेटा विवाद संसदीय समिति: Meta ने मांगी माफी

संपादकीय विश्लेषण:

डी.के. शिवकुमार और कांग्रेस आलाकमान ने 2028 के विधानसभा चुनावों और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए 60% पद SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक वर्गों को दिए हैं।

हालांकि, जिस तरह से वरिष्ठ नेताओं को विश्वास में लिए बिना बाहर किया गया और अंतिम समय में सूचियाँ बदली गईं, उससे पार्टी के भीतर सांगठनिक असंतोष गहरा गया है। यदि समय रहते रुठे हुए वरिष्ठ नेताओं और क्षेत्रीय क्षत्रपों को बोर्डों व निगमों के माध्यम से संतुष्ट नहीं किया गया, तो यह गुटबाजी सरकार के कामकाज को प्रभावित कर सकती है। मंत्री पद के दावेदारों में मची होड़, फिर तेज हुआ कर्नाटक कैबिनेट विस्तार विवाद

इसे भी पढ़े :  बांकीपुर उपचुनाव परिणाम 2026 BJP के गढ़ में प्रशांत किशोर ने बनाई बढ़त,

Spread the love

Post Comment

You May Have Missed