यौन उत्पीड़न मामले में बृजभूषण शरण सिंह बरी:
भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को दिल्ली की एक विशेष अदालत ने महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न और आपराधिक धमकी के आरोपों से बरी (Acquit) कर दिया है।
सोमवार (3 अगस्त 2026) को दिल्ली स्थित राउज़ एवेन्यू कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) अश्वनी पंवार ने बंद कमरे (In-Camera Proceedings) में हुई सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।
अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह के साथ-साथ मामले के सह-आरोपी और WFI के पूर्व सह-सचिव विनोद तोमर को भी सभी धाराओं से बरी कर दिया।
यह मामला जून 2023 में दिल्ली पुलिस द्वारा दायर 1,500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट पर आधारित था, जिसमें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 (महिला की लज्जा भंग करना), 354A (यौन उत्पीड़न), 354D (पीछा करना), 506(1) (आपराधिक धमकी) और 109 के तहत आरोप लगाए गए थे।
बृजभूषण का बयान: “अगर आरोप साबित होते तो फांसी लगा लेता”
अदालत से राहत मिलने के बाद दिल्ली स्थित अपने आवास पहुँचे बृजभूषण शरण सिंह का समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों और फूलों की पंखुड़ियों से स्वागत किया।
मीडिया से बातचीत करते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, “जब मुझ पर ये झूठे आरोप लगाए गए थे, तब भी मैंने कहा था कि यदि मेरे खिलाफ एक भी आरोप अदालत में साबित हो जाता है, तो मैं खुशी-खुशी फांसी पर लटक जाऊँगा। आज अदालत के फैसले ने सत्य को उजागर कर दिया है। मैं न्यायपालिका और अपने वकीलों की टीम का आभारी हूँ।”
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पहलवानों का पलटवार: “लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई, हाईकोर्ट में देंगे चुनौती”
अदालत के इस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताते हुए प्रदर्शन का चेहरा रहीं प्रमुख रेसलर विनेश फोगाट और ओलंपिक पदक विजेता बजरंग पूनिया ने सोशल मीडिया (X) पर एक संयुक्त बयान जारी कर निराशा व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला पहलवान इस फैसले को स्वीकार नहीं करेंगी और इसे ऊपरी अदालत (हाईकोर्ट) में चुनौती दी जाएगी।
पहलवानों के बयान के मुख्य बिंदु:
सिस्टम और बाहुबल के खिलाफ संघर्ष: पहलवानों ने लिखा, “एक बेहद ताकतवर और राजनीतिक रूप से रसूखदार नेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और सड़कों पर उतरने के लिए हमें बहुत हिम्मत जुटानी पड़ी थी। शुरुआत से ही पूरा प्रशासन, सरकार और तंत्र आरोपी को बचाने का प्रयास कर रहा था।”
अपील की तैयारी: विनेश फोगाट ने कहा, “हमें गहरा दुख है कि निचली अदालत ने महिला पहलवानों द्वारा दिए गए साक्ष्यों के बावजूद आरोपी को दोषी नहीं माना। लेकिन हमने उम्मीद नहीं खोई है। महिला पहलवानों ने अपने कानूनी सलाहकारों से बात की है और जल्द से जल्द इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दाखिल की जाएगी।”
जंतर-मंतर आंदोलन से लेकर अदालती फैसले तक का सफर
यह विवाद वर्ष 2023 की शुरुआत में तब सुर्खियों में आया था जब साक्षी मलिक, बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट जैसे अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर महीनों लंबा धरना दिया था।
संसद मार्च और प्रदर्शन: मई 2023 में नए संसद भवन की ओर मार्च करने के दौरान पुलिस द्वारा पहलवानों को हिरासत में लिए जाने और सड़कों पर घसीटे जाने की तस्वीरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया था।
राजनीतिक प्रभाव: राजनीतिक दबाव और विवाद के चलते भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनावों में बृजभूषण शरण सिंह को उत्तर प्रदेश की कैसरगंज सीट से टिकट नहीं दिया था, हालांकि इस सीट से उनके पुत्र चुनाव मैदान में उतरे थे और विजयी हुए थे।
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कानूनी पहलू और आगे की राह
विधिक विशेषज्ञों का मानना है कि राउज़ एवेन्यू कोर्ट द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद अब विस्तृत निर्णय (Reasoned Judgment) की प्रति अपलोड की जाएगी। इसके बाद शिकायतकर्ता महिला पहलवानों और दिल्ली पुलिस के पास उच्च न्यायालय (Delhi High Court) में अपील (Criminal Appeal) दाखिल करने का वैधानिक अधिकार है।
अदालत में यह देखा जाएगा कि क्या अभियोजन पक्ष (Prosecution) संदेह से परे (Beyond Reasonable Doubt) आरोप साबित करने में विफल रहा या साक्ष्यों के मूल्यांकन में कोई कानूनी त्रुटि हुई है।
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संपादकीय दृष्टिकोण:
देश के शीर्ष एथलीटों और कुश्ती महासंघ के पूर्व प्रमुख के बीच का यह मामला केवल एक आपराधिक मुकदमा नहीं है, बल्कि यह खेल संस्थानों में महिला एथलीटों की सुरक्षा, आंतरिक शिकायत समितियों की प्रभावशीलता और शक्ति-संतुलन का बड़ा प्रशासनिक प्रश्न है।
राउज़ एवेन्यू कोर्ट का बरी करने का फैसला इस कानूनी लड़ाई का पहला पड़ाव है; अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट में दाखिल होने वाली संभावित अपील और उस पर होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।
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