यूसुफ पठान अमित शाह ज्ञापन बंगाल लाउडस्पीकर विवाद:
यूसुफ पठान अमित शाह ज्ञापन पश्चिम बंगाल में नवगठित भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार द्वारा धार्मिक स्थलों पर ध्वनि प्रदूषण नियमों को सख्ती से लागू करने के फैसले के बाद राज्य भर में बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा हो गया है।
मुर्शिदाबाद और आसपास के जिलों में स्थानीय पुलिस द्वारा मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के निर्देशों के विरोध में बहरामपुर से सांसद और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान, मुर्शिदाबाद से सांसद अबू ताहिर खान और जंगीपुर से सांसद खलीदुर रहमान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर त्वरित हस्तक्षेप की मांग की है।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर नेशनल पीपुल्स कांग्रेस ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हुए इन तीनों बागी सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंपे अपने ज्ञापन में आरोप लगाया कि नियमों को लागू करने की आड़ में एक समुदाय विशेष की धार्मिक भावनाओं को आहत किया जा रहा है।
बागी सांसदों का गृह मंत्रालय को ज्ञापन: “नियम लागू हों, पर संवेदनशीलता के साथ”
गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय को सौंपे गए ज्ञापन में सांसदों ने स्पष्ट किया कि वे ध्वनि प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह सम्मान करते हैं।
पक्षपात का आरोप: सांसदों ने तर्क दिया कि कानून का अनुपालन निष्पक्ष, एक समान और संवेदनशील तरीके से होना चाहिए। पुलिस प्रशासन द्वारा मौखिक निर्देशों के आधार पर मस्जिदों की छतों से लाउडस्पीकर उतरवाने से स्थानीय निवासियों में भारी असंतोष फैल रहा है।
EPIC ट्रिब्यूनल और वोटर लिस्ट का मुद्दा: ज्ञापन में 2026 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग द्वारा किए गए ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (SIR) का मुद्दा भी पुरजोर ढंग से उठाया गया।
सांसदों ने कहा कि अकेले मुर्शिदाबाद जिले में 4.55 लाख वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। इलेक्टोरल फोटो आइडेंटिटी कार्ड (EPIC) ट्रिब्यूनल में मामलों के लंबित रहने से आम लोगों को पासपोर्ट सत्यापन, भूमि पंजीकरण और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पाने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
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मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का बचाव: “5,299 लाउडस्पीकर हटाए गए, मंदिरों पर भी लागू नियम”
बढ़ते सियासी विवाद पर अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्रवाई का पुरजोर बचाव किया।
अदालती आदेशों का हवाला: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पहली कैबिनेट बैठक में सरकार ने रिहायशी इलाकों के लिए निर्धारित डेसिबल सीमाओं (दिन में 55 डेसिबल और रात में 45 डेसिबल) को बिना किसी भेदभाव के लागू करने का संकल्प लिया था।
आंकड़े प्रस्तुत किए: मुख्यमंत्री अधिकारी ने बताया कि पुलिस की समझाइश और प्रशासनिक तालमेल से अब तक राज्य भर के धार्मिक स्थलों से कुल 5,299 लाउडस्पीकर हटाए गए हैं। इनमें से 4,203 लाउडस्पीकर मस्जिदों से और 1,096 मंदिरों से हटाए गए हैं।
बल प्रयोग से इनकार: सरकार ने दावा किया कि किसी भी स्थान पर बल प्रयोग नहीं किया गया है, बल्कि मस्जिद और मंदिर प्रबंधन कमेटियों से अपील की गई थी कि वे परिसर के बाहर जाने वाली तेज़ आवाज़ वाले लाउडस्पीकरों के स्थान पर परिसर के भीतर सीमित रहने वाले ‘साउंड बॉक्स’ का उपयोग करें।
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मुस्लिम संगठनों और विपक्षी दलों की आंदोलन की चेतावनी
राज्य सरकार के इस कदम के खिलाफ मुस्लिम धर्मगुरुओं, सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों ने मोर्चा खोल दिया है।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद की चेतावनी: पूर्व मंत्री और जमीयत उलेमा-ए-हिंद (बंगाल) के प्रमुख सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने पुलिसिया कार्रवाई को अनुचित बताते हुए चेतावनी दी कि यदि बिना लिखित आदेशों के दबाव बनाना बंद नहीं किया गया, तो राज्यव्यापी जनांदोलन शुरू किया जाएगा।
ISF की कानूनी कार्रवाई का रुख: इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के विधायक नौशाद सिद्दीकी ने पुलिस महानिदेशक (DGP) को पत्र लिखकर स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या नियमों को लागू करने के लिए कोई आधिकारिक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी किया गया है? उन्होंने इसके खिलाफ हाईकोर्ट जाने के संकेत दिए हैं।
भाजपा का पलटवार: राज्य भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि लोकतंत्र में कानून का पालन सभी के लिए अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति का युग समाप्त हो चुका है और ध्वनि प्रदूषण के नियमों का पालन सभी समुदायों को समान रूप से करना होगा।
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संपादकीय दृष्टिकोण:
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद लाउडस्पीकर और मतदाता सूची पुनरीक्षण जैसे विषय आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक रूप धारण कर सकते हैं।
जहां एक ओर राज्य प्रशासन इसे उच्च न्यायपालिका के निर्देशों और पर्यावरण संबंधी नियमों के सख्त क्रियान्वयन के रूप में पेश कर रहा है, वहीं जनप्रतिनिधियों द्वारा गृह मंत्रालय तक मामला ले जाने से यह स्पष्ट है कि यह मुद्दा स्थानीय प्रशासन से निकलकर अब केंद्र और राज्य के बीच कूटनीतिक संतुलन की परीक्षा बन गया है। क्षेत्र के अहम मुद्दों को लेकर टीएमसी सांसद का बड़ा कदम, सौंपा यूसुफ पठान अमित शाह ज्ञापन
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