“मोहन भागवत जेन जी समर्थन” विरोध राष्ट्र-विरोधी नहीं, बातचीत का माध्यम’;
मोहन भागवत जेन जी समर्थन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने युवाओं और वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं दूरगामी संदेश दिया है।
मुंबई के नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर (NMACC) में ‘इंडियाज़ इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस’ (IIMUN) के 15वें वार्षिक सम्मेलन के दौरान देश के 100 से अधिक शहरों से आए 15 से 19 वर्ष की आयु के लगभग 2,000 छात्रों को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि विरोध प्रदर्शन करने वाले युवाओं को “राष्ट्र-विरोधी” कहना पूरी तरह गलत है।
IIMUN के संस्थापक ऋषभ शाह द्वारा संचालित इस विशेष संवाद सत्र में संघ प्रमुख ने Gen Z और Gen Alpha की प्राथमिकताओं, छात्र असंतोष, शिक्षा नीति, आरक्षण, LGBTQIA+ अधिकारों और वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बिना किसी झिझक के विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए।
छात्र आंदोलन पर रुख: “Gen Z राष्ट्र-विरोधी नहीं, उनकी शिकायतें जायज”
हाल ही में नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में बोलते हुए मोहन भागवत ने युवाओं की राष्ट्रीय निष्ठा पर उठ रहे सवालों को खारिज किया।
बातचीत का माध्यम है विरोध: संघ प्रमुख ने कहा, “Gen Z हमारे ही बच्चे हैं। यदि वे किसी नीति या व्यवस्था से असंतुष्ट होकर विरोध व्यक्त करते हैं, तो उन्हें राष्ट्र-विरोधी कैसे ठहराया जा सकता है? लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन भी संवाद स्थापित करने का ही एक स्वरूप है। असहमति व्यक्त करने में कुछ भी अनुचित नहीं है, बशर्ते इसका प्रयोग समाज में विभाजन पैदा करने के लिए न किया जाए।”
नई पीढ़ी पर भरोसा: उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें देश की नई पीढ़ी (Gen Z और Gen Alpha) पर पूरा भरोसा है, क्योंकि यह एक ईमानदार और प्रयोगधर्मी पीढ़ी है जो बदलाव चाहती है।
तथ्यों की समीक्षा जरूरी: दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए कथित पुलिस बल प्रयोग और पैलेट गन के दावों पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि बिना संपूर्ण तथ्यों और परिस्थितियों की प्रामाणिक जानकारी के किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई पर अंतिम टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
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शिक्षा प्रणाली में आमूलचूल बदलाव और 6% बजट आवंटन का समर्थन
देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा करते हुए भागवत ने स्वीकार किया कि इसमें व्यापक सुधारों और नीतियों के पुनरीक्षण की तत्काल आवश्यकता है।
व्यापारीकरण पर रोक: उन्होंने कहा कि शिक्षा को विशुद्ध रूप से मुनाफा कमाने का व्यापार नहीं बनने दिया जाना चाहिए। गुणवत्तापूर्ण और सस्ती शिक्षा पाना देश के प्रत्येक बच्चे का बुनियादी अधिकार है।
जीडीपी का 6% बजट: संघ प्रमुख ने शिक्षा क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय बजट का 6 प्रतिशत हिस्सा आवंटित करने की लंबे समय से चली आ रही मांग का प्रत्यक्ष समर्थन किया। उन्होंने विश्वास जताया कि बिना किसी हिंसक आंदोलन के, केवल निरंतर और सकारात्मक संवाद के माध्यम से इस लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
शिक्षक प्रशिक्षण व शुल्क संरचना: उन्होंने स्कूलों में फीस के अनियंत्रित ढांचे पर पुनर्विचार करने, शिक्षकों के प्रशिक्षण स्तर को ऊंचा उठाने और शैक्षणिक संस्थानों के प्रबंधन में स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।
सामाजिक समानता: आरक्षण और सहजीवन (Companionate Rights) पर दृष्टिकोण
सामाजिक समरसता और समावेशिता से जुड़े संवेदनशील प्रश्नों का उत्तर देते हुए भागवत ने सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप नीतिगत दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
आरक्षण का औचित्य: आरक्षण नीति पर उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक समाज में आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक असमानता विद्यमान रहेगी, तब तक कोटा प्रणाली अनिवार्य बनी रहनी चाहिए।
कल्याणकारी हिस्सेदारी का सुझाव: उन्होंने एक महत्वपूर्ण विचार रखते हुए कहा कि जिन समुदायों या परिवारों को आरक्षण का लाभ मिल चुका है और वे सामाजिक मुख्यधारा में आगे बढ़ चुके हैं, उन्हें अपने ही वर्ग के अधिक पिछड़े और वंचित लोगों के उत्थान के लिए स्वेच्छा से अपने अधिकारों का कुछ हिस्सा छोड़ने पर विचार करना चाहिए।
समलैंगिक अधिकार व विवाह संस्था: LGBTQIA+ समुदाय पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वे समाज का अभिन्न अंग हैं और उन्हें समान अधिकार मिलने चाहिए। हालांकि, सेम-सेक्स मैरिज (समलैंगिक विवाह) के संदर्भ में उन्होंने कहा कि विवाह एक ऐसी पवित्र सामाजिक संस्था है जो अगली पीढ़ी के निर्माण से जुड़ी है।
उन्होंने कानूनी विवाह के बजाय समाज द्वारा स्वीकार्य ‘सहजीवन’ (Companionate Living/Rights) के वैधानिक विकल्पों पर विचार करने का सुझाव दिया।
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रोजगार, महिला सहभागिता और वैश्विक नीतियां
आर्थिक और कूटनीतिक मोर्चों पर संघ प्रमुख ने युवाओं को आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय एकजुटता का पाठ पढ़ाया।
स्वरोजगार से बेरोजगारी का हल: भागवत ने कहा कि केवल सरकारी नौकरियां देश की विशाल युवा आबादी को रोजगार नहीं दे सकतीं। इसके लिए पूरे समाज को उद्यमिता (Entrepreneurship), कौशल विकास (Skill Development) और स्थानीय स्तर पर सूक्ष्म उद्योगों को बढ़ावा देना होगा।
महिलाओं की समान भूमिका: उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भागीदारी पुरुषों के बराबर और पूरक है। संघ के मुख्य ढांचे में महिलाओं की अनुपस्थिति के सवाल को “अधूरी जानकारी” बताते हुए उन्होंने कहा कि ‘राष्ट्र सेविका समिति’ स्वतंत्र एजेंडे के साथ महिलाओं के बीच व्यापक कार्य कर रही है।
अंतरराष्ट्रीय सीमा विवाद: चीन और पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक और सैन्य तनाव के समय भागवत ने देश के युवाओं का आह्वान किया कि वे अपने मतभेदों को भुलाकर सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी निर्णयों का मजबूती से समर्थन करें।
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‘संस्कृत श्लोक’ से समझाया सच्चे नेतृत्व का सिद्धांत
कार्यक्रम के अंतिम चरण में संघ प्रमुख ने एक पारंपरिक संस्कृत श्लोक प्रस्तुत करते हुए आधुनिक समय में एक आदर्श नेता के पांच प्रमुख लक्षणों की व्याख्या की:
“पात्रे त्यागी, गुणे रागी, भागी परिजनैः सह, शास्त्रे बोद्धा, रणे योद्धा।”
पात्रे त्यागी (उदारता): योग्य और पात्र लोगों की सहायता के लिए तत्पर रहना।
गुणे रागी (गुणों का सम्मान): दूसरों की प्रतिभा, क्षमताओं और अच्छे विचारों का खुलकर सम्मान करना।
भागी परिजनैः सह (साझा सफलता): सफलता, श्रेय, प्रसिद्धि और संसाधनों का अपनी पूरी टीम के साथ समान बंटवारा करना।
शास्त्रे बोद्धा (गहरा ज्ञान): अपने विषय, नीति और सिद्धान्तों की गहन सैद्धांतिक और व्यावहारिक समझ रखना।
रणे योद्धा (साहस): संकट या प्रतिकूल परिस्थितियों के समय एक योद्धा की भांति अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर मुकाबला करना।
उन्होंने कहा कि सच्चा नेतृत्व वही है जो स्वयं पीछे रहकर अपनी टीम को आगे बढ़ाए, नए नेताओं का निर्माण करे और लोगों को केवल भौतिक ही नहीं बल्कि वैचारिक और आध्यात्मिक रोशनी की ओर ले जाए।
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संपादकीय दृष्टिकोण:
IIMUN के मंच से मोहन भागवत का यह संबोधन संघ के वैचारिक दृष्टिकोण में समय के साथ आ रहे लचीलेपन और आधुनिकता का परिचायक है। देश के Gen Z युवाओं के विरोध प्रदर्शनों को लोकतांत्रिक संवाद का हिस्सा मानना और शिक्षा के बाजारीकरण पर खुलकर बोलना यह दर्शाता है कि संघ अब युवाओं से जुड़े समकालीन और प्रगतिशील मुद्दों पर सीधे जुड़ने की रणनीति पर काम कर रहा है। युवाओं को एंटी-नेशनल बताने से इनकार के बाद जानें मोहन भागवत जेन जी समर्थन के क्या हैं मायने मुंबई में छात्रों से संवाद के बाद मोहन भागवत जेन जी समर्थन पर आई बड़ी खबर
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