“दारा सिंह रिहाई ” सुप्रीम कोर्ट की ओडिशा सरकार को सख्त चेतावनी: ‘
1999 के चर्चित ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो मासूम बेटों की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे दारा सिंह (उर्फ रवींद्र कुमार पाल) की समय से पहले रिहाई की अर्जी पर देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा सरकार और स्टेट सेंटेंस रिव्यू बोर्ड (SSRB) को कड़ी फटकार लगाई है।
जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने सुनवाई के दौरान सख्त लहजे में कहा कि यदि राज्य सरकार जल्द ही इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लेती है, तो अदालत खुद इस मामले पर फैसला सुनाएगी।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जब राज्य सरकार के वकील ने बताया कि समीक्षा बोर्ड को अभी जिला जेल से रिपोर्ट का इंतजार है, तो पीठ ने असंतोष जताते हुए कहा:
“हमें इससे कोई मतलब नहीं है कि आप किस अधिकारी से पत्राचार कर रहे हैं। आप फैसला लें, जो भी आप चाहें। वरना, हम अपना फैसला लेंगे। हम लगातार हो रही इस देरी को बर्दाश्त नहीं कर सकते।”
अदालत ने ओडिशा सेंटेंस रिव्यू बोर्ड को अर्जी पर विचार करने के लिए यह आखिरी मौका दिया है।
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दारा सिंह ने दी पेरारिवलन केस की नजीर
उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के मूल निवासी दारा सिंह (61 वर्ष) ने अपनी याचिका में तर्क दिया है कि वे पिछले 24 साल और 11 महीने (बिना पैरोल के 26 साल से अधिक) से लगातार ओडिशा की क्योंझर जिला जेल में बंद हैं।
19 अप्रैल 2022 की रेमिशन पॉलिसी: दारा सिंह के वकील विष्णु जैन ने अदालत में दलील दी कि राज्य की नीति के तहत 14 साल से अधिक की जेल काट चुके उम्रकैद के दोषियों को रिहाई पर विचार का अधिकार है।
राजीव गांधी हत्याकांड का हवाला: याचिका में राजीव गांधी हत्याकांड के दोषी ए.जी. पेरारिवलन की सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई रिहाई (2022) के फैसले का हवाला देते हुए वैसी ही राहत की मांग की गई है।
सुधारवादी न्याय का सिद्धांत: याचिका में जस्टिस वी.आर. कृष्णा अय्यर के प्रसिद्ध वाक्य—“हर संत का एक अतीत होता है और हर पापी का एक भविष्य”—का संदर्भ देते हुए कहा गया कि दोषी को अपने अतीत के कृत्य पर गहरा पछतावा है और वह अब समाज सेवा करना चाहता है।
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1999 का ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड: एक नजर
22 जनवरी 1999 की रात ओडिशा के क्योंझर जिले के मनोहरपुर गांव में ऑस्ट्रेलियाई ईसाई मिशनरी ग्राहम स्टुअर्ट स्टेन्स और उनके दो मासूम बेटों (फिलिप और टिमोथी) को गाड़ी में सोते समय जिंदा जला दिया गया था।
निचली अदालत: सीबीआई की विशेष अदालत ने दारा सिंह को मौत की सजा सुनाई थी।
हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट: ओडिशा उच्च न्यायालय ने मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया, जिसे जनवरी 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था।
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अदालत के इस कड़े रुख के बाद अब ओडिशा सेंटेंस रिव्यू बोर्ड को अगली सुनवाई से पहले दारा सिंह की समय से पहले रिहाई याचिका पर अपना रुख स्पष्ट करना होगा, अन्यथा सुप्रीम कोर्ट खुद अपने विशेषाधिकारों का इस्तेमाल कर अंतिम निर्णय सुनाएगा।
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