प्रशांत भूषण सुप्रीम कोर्ट BCI बार काउंसिल ऑफ इंडिया के खिलाफ याचिका
प्रशांत भूषण सुप्रीम कोर्ट BCI वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं ।
उन्होंने चीफ जस्टिस (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष कहा कि लीगल एजुकेशन को नियंत्रित और रेगुलेट करने वाली संस्था BCI खुद लॉ कॉलेज या यूनिवर्सिटी का संचालन नहीं कर सकती।
प्रशांत भूषण ने अदालत को सूचित किया कि वे जल्द ही BCI द्वारा लॉ कॉलेज चलाने के फैसले के खिलाफ एक औपचारिक याचिका दायर करने जा रहे हैं।
SHANTI एक्ट मामले की सुनवाई के दौरान दिया उदाहरण
प्रशांत भूषण की यह टिप्पणी ‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया’ (SHANTI) एक्ट की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका (E.A.S. सरमा मामला) पर बहस के दौरान आई।
हितों का टकराव (Conflict of Interest): भूषण ने दलील दी कि ‘एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड’ (AERB) के सदस्यों की नियुक्ति उसी पैनल द्वारा होती है जो न्यूक्लियर पावर प्लांट चलाता है। इससे एक स्वतंत्र नियामक संस्था का मूल उद्देश्य खत्म हो जाता है।
BCI का उदाहरण: इस हितों के टकराव को समझाते हुए उन्होंने BCI का उदाहरण दिया और कहा कि जिस नियामक संस्था के पास देशभर के लॉ कॉलेजों को नियंत्रित करने और मान्यता देने का अधिकार है, वही संस्था खुद अपना लॉ कॉलेज चला रही है।
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प्रशांत भूषण का बयान:
“बार काउंसिल लॉ कॉलेज नहीं चला सकती। हम इस संबंध में जल्द ही याचिका दायर कर रहे हैं। वे देश के लॉ कॉलेजों को रेगुलेट करते हैं और खुद भी एक लॉ कॉलेज चला रहे हैं। यह पूरी तरह से हितों के टकराव का मामला है।”
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गोवा के IIULER और प्रस्तावित नेशनल लीगल एकेडमी का संदर्भ
भूषण का यह इशारा गोवा में BCI ट्रस्ट द्वारा संचालित ‘इंडिया इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ लीगल एजुकेशन एंड रिसर्च’ (IIULER) और वहां प्रस्तावित नई नेशनल लीगल एकेडमी की ओर था।
मनन कुमार मिश्रा का ऐलान: हाल ही में BCI चेयरमैन और बीजेपी सांसद मनन कुमार मिश्रा ने घोषणा की थी कि BCI गोवा के IIULER कैंपस में देशभर के वकीलों के लिए 10 से 14 दिनों का अनिवार्य प्रशिक्षण देने के लिए एक एकेडमी बनाएगी।
विवादों में BCI: हाल के दिनों में BCI उस समय भी विवादों में आई थी जब उसने नालसार (NALSAR) यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद के 2026 बैच के छात्रों के एनरोलमेंट पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद वापस लेना पड़ा था।
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सुप्रीम कोर्ट में प्रशांत भूषण के इस बयान के बाद लीगल एजुकेशन के नियमन में पारदर्शिता को लेकर बहस छिड़ गई है। अब सभी की निगाहें BCI के खिलाफ दायर होने वाली आगामी याचिका पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि कोई नियामक संस्था स्वयं शिक्षण संस्थान चला सकती है या नहीं।
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