“जादवपुर यूनिवर्सिटी हिंसा” और ऐतिहासिक प्रतीक तोड़ने पर शिकायत दर्ज,
जादवपुर यूनिवर्सिटी हिंसा देश के प्रतिष्ठित उच्च शैक्षणिक संस्थानों में शुमार जादवपुर यूनिवर्सिटी (JU) एक बार फिर हिंसक झड़पों और राजनीतिक घमासान का केंद्र बन गई है। कैंपस में हुए उपद्रव, मुख्य द्वार को क्षति पहुँचाने और विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक धातु प्रतीक (Emblem) को तोड़े जाने के मामले में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कोलकाता पुलिस में दो अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई हैं।
दूसरी ओर, घटना के 24 घंटे के भीतर ही प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए मरम्मत के बाद उस ऐतिहासिक प्रतीक को गेट नंबर 4 पर पुनः स्थापित कर दिया है।
नंदलाल बोस द्वारा डिज़ाइन किए गए ऐतिहासिक प्रतीक पर संग्राम
विवाद की मुख्य वजह जादवपुर यूनिवर्सिटी के गेट नंबर 4 पर लगा वह ऐतिहासिक धातु का प्रतीक चिह्न है, जिसे देश के महान कलाकार नंदलाल बोस ने डिज़ाइन किया था।
गुरुवार दोपहर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) द्वारा जादवपुर थाने से यूनिवर्सिटी गेट तक विरोध मार्च निकाला गया था। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड्स तोड़कर बंद गेट पर चढ़ने की कोशिश की। इसी दौरान गेट पर लगा यह ऐतिहासिक प्रतीक नीचे गिर गया और क्षतिग्रस्त हो गया।
यूनिवर्सिटी के शिक्षकों और आम छात्रों ने इस घटना की तीखी आलोचना की। शुक्रवार को यूनिवर्सिटी के कर्मचारियों की मदद से क्षतिग्रस्त प्रतीक की मरम्मत कराई गई और उसकी मूल स्थिति बहाल करते हुए उसे दोबारा गेट पर लगा दिया गया।
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यूनिवर्सिटी प्रशासन ने दर्ज कराईं दो पुलिस शिकायतें
कैंपस की विरासत को पहुँचाए गए नुकसान और उपद्रव को लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार को पुलिस के पास दो शिकायतें दी गईं:
पहली शिकायत (कैंपस में घुसपैठ और तोड़फोड़): यह शिकायत बुधवार देर रात कैंपस में अनधिकृत भीड़ के प्रवेश, मुख्य द्वार को नुकसान पहुँचाने के प्रयास, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के झंडों को जलाने, फेस्टून नष्ट करने और छात्रों को एक भवन के अंदर बंद करने के आरोपों से संबंधित है।
दूसरी शिकायत (ऐतिहासिक प्रतीक को नुकसान): यह शिकायत गुरुवार को गेट नंबर 4 पर जबरन चढ़ने, नंदलाल बोस के ऐतिहासिक प्रतीक को उखाड़कर फेंकने और कैंपस के अंदर पत्थर व कांच की बोतलें फेंकने की घटनाओं पर आधारित है।
यूनिवर्सिटी अधिकारियों ने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच करने और भविष्य में कैंपस में ऐसी हिंसक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की है।
वामपंथी छात्र संगठनों और ABVP के बीच आरोप-प्रत्यारोप
घटना के बाद से ही वामपंथी झुकाव वाले छात्र संगठनों और ABVP के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है:
SFI और DSO का दावा: वामपंथी छात्र संगठनों का आरोप है कि ABVP कार्यकर्ताओं ने उग्र प्रदर्शन के दौरान जबरन बंद गेट पर चढ़कर यूनिवर्सिटी के सम्मान और प्रतीक को जानबूझकर नुकसान पहुँचाया।
ABVP का इनकार: ABVP ने प्रतीक चिह्न को नुकसान पहुँचाने के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। संगठन का दावा है कि इस तोड़फोड़ में “अल्ट्रा-लेफ्ट और नक्सलवादी” तत्वों का हाथ था। ABVP ने आरोप लगाया कि वामपंथी संगठनों और फैकल्टी के एक वर्ग द्वारा साजिश के तहत उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
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BJP का रुख: ‘ABVP से हमारा सीधा संबंध नहीं’
कैंपस हिंसा पर राजनीतिक मोड़ तब आया जब बीजेपी की जादवपुर से विधायक सर्बरी मुखर्जी पर प्रदर्शनकारियों को उकसाने के आरोप लगे।
सर्बरी मुखर्जी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, “मैं उस वक्त कैंपस के अंदर मौजूद ही नहीं थी। मैं बुधवार रात केवल शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस स्टेशन के बाहर कुछ कार्यकर्ताओं के साथ थी और फिर वहां से चली गई। CCTV फुटेज से यह साफ हो जाएगा कि मेरी कोई भूमिका नहीं थी।”
वहीं, पश्चिम बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने भी पार्टी और ABVP के बीच संगठनात्मक दूरी को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि एबीवीपी (ABVP) भारतीय जनता पार्टी का छात्र विंग नहीं है, बल्कि यह एक स्वतंत्र और राष्ट्रवादी छात्र संगठन है जो अपने फैसले खुद लेता है।
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तनाव के बीच सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
जादवपुर यूनिवर्सिटी में हिंसा की शुरुआत बुधवार रात इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी फैकल्टी (FETSU) की आम सभा (GBM) के दौरान हुई थी, जो गुरुवार को सड़कों पर हिंसक झड़प में बदल गई। इस पूरी घटना के बाद कैंपस और आसपास के इलाकों में भारी तनाव का माहौल है।
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी है, वहीं पुलिस दर्ज शिकायतों के आधार पर वीडियो फुटेज खंगालकर उपद्रवियों की पहचान करने में जुटी है। विश्वविद्यालय प्रशासन की रिपोर्ट, प्रशासनिक कार्रवाई और बैठकों के बीच जानें जादवपुर यूनिवर्सिटी हिंसा की पूरी सच्चाई
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