“मोहन भागवत अमेरिका दौरा” का USCIRF ने किया विरोध,
मोहन भागवत अमेरिका दौरा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक (प्रमुख) डॉ. मोहन भागवत की प्रस्तावित अमेरिका, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम की आधिकारिक यात्रा से ठीक पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है।
‘यू.एस. कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम’ (USCIRF) के कुछ अधिकारियों द्वारा संघ प्रमुख के दौरे का विरोध करने और आरएसएस पर लक्षित प्रतिबंध लगाने की मांग पर अमेरिका स्थित हिंदू एडवोकेसी संगठन ‘HinduPACT’ और भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने कड़ा एतराज जताते हुए करारा जवाब दिया है।
संघ प्रमुख मोहन भागवत अपने संगठन के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में विदेशी स्थानीय निकायों, भारतीय प्रवासियों और सहयोगी संगठनों के विशेष निमंत्रण पर 25 अगस्त 2026 से बहु-देशीय दौरे पर रवाना हो रहे हैं।
इस दौरान 29 अगस्त को उनके न्यूयॉर्क पहुंचने का कार्यक्रम है, जहां वे ‘अमेरिकन हिंदूज़ फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग’ (AHEAD) द्वारा आयोजित “यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन्स” (सार्वभौमिक एकता समारोह) में मुख्य वक्ता के रूप में भाग लेंगे।
USCIRF के रुख पर HinduPACT की तीखी प्रतिक्रिया
अमेरिका में सक्रिय हिंदू वकालत समूह HinduPACT ने 20 अगस्त को एक विस्तृत बयान जारी कर अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) की कड़ी आलोचना की। संगठन ने आयोग के अध्यक्ष डॉ. आसिफ महमूद और कमिश्नर जीन मिल्स पर जानबूझकर हिंदू संस्थाओं और भारत को गलत तरीके से निशाना बनाने का सीधा आरोप लगाया है।
HinduPACT ने अपने बयान में निम्नलिखित प्रमुख बिंदु रखे:
मिशन से भटकाव: USCIRF अपने मूल दायित्व (वैश्विक धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा) से भटक चुका है और राजनीतिक दुर्भावना के तहत कार्य कर रहा है।
समाज सेवा का उल्लेख: संघ को खतरनाक बताने वाले तर्कों को खारिज करते हुए संगठन ने समाज सेवा, शिक्षा, आपदा राहत, स्वास्थ्य और सामुदायिक विकास में आरएसएस द्वारा दिए गए ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित किया।
बिना सबूत प्रतिबंधों की मांग: संघ नेताओं पर यात्रा प्रतिबंध लगाने की मांगों को अनुचित बताते हुए कहा कि ऐसे प्रशासनिक या कानूनी कदमों के लिए ठोस सबूतों और उचित कानूनी प्रक्रियाओं की आवश्यकता होती है।
विरोधी समूहों को जवाब: HinduPACT ने काउंसिल ऑन अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस (CAIR), इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC) और ‘हिंदूज़ फॉर ह्यूमन राइट्स’ जैसे उन तमाम समूहों की भी तीखी आलोचना की, जो लगातार इस यात्रा का विरोध कर रहे हैं।
HinduPACT के संस्थापक और चेयरमैन अजय शाह ने कहा कि यह संपूर्ण विवाद इस बात की ओर इशारा करता है कि किस तरह अमेरिका में काम कर रहे हिंदू संगठनों को पक्षपातपूर्ण तरीके से निशाना बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
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भारत सरकार का करारा जवाब: “USCIRF एक पक्षपाती और विश्वसनीयता-हीन संस्था”
विदेश मंत्रालय की नियमित मीडिया ब्रीफिंग के दौरान भारत सरकार ने भी USCIRF की हालिया टिप्पणियों और सिफारिशों को सिरे से खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सख्त लहजे में कहा कि इस तरह के एजेंडा-संचालित संस्थानों को नजरअंदाज किया जाना चाहिए।
विदेश मंत्रालय के मुख्य बिंदु:
साख का अभाव: रणधीर जायसवाल ने कहा, “हम सभी भली-भांति जानते हैं कि USCIRF एक पक्षपाती संस्थान है। सालों से यह भारत के खिलाफ गलत, तथ्यहीन और भड़काऊ बयानबाजी करता आ रहा है। ऐसे संस्थानों की कोई विश्वसनीयता नहीं है और इनके बयानों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जाना चाहिए।”
सालाना रिपोर्ट का खंडन: मार्च में जारी आयोग की वार्षिक रिपोर्ट में भारत को ‘विशेष चिंता वाले देश‘ (CPC) की सूची में डालने और आरएसएस व रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) से जुड़े निकायों पर लक्षित प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गई थी। भारत ने इस रिपोर्ट को “गलत, चुनिंदा और संदिग्ध स्रोतों पर आधारित” बताकर पूरी तरह खारिज कर दिया था।
अमेरिका में हिंदू विरोधी घटनाओं पर चुप्पी: विदेश मंत्रालय ने उल्टे USCIRF से सवाल किया कि वह अमेरिका में लगातार हिंदू मंदिरों में हो रही तोड़-फोड़, नफरती अपराधों और भारतीय मूल के नागरिकों को डराने-धमकाने की घटनाओं की निष्पक्ष जांच क्यों नहीं करता।
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शताब्दी वर्ष में संघ का वैश्विक संवाद अभियान
आरएसएस के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में जानकारी साझा की कि यह यात्रा आरएसएस के 100वें वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही है।
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अपनी इस यात्रा के दौरान डॉ. मोहन भागवत अमेरिका, कनाडा और यूके में रह रहे भारतीय समुदाय के प्रवासियों, विद्वानों, स्थानीय संघों और सांस्कृतिक प्रतिनिधियों से सीधे बातचीत करेंगे। समर्थकों का मानना है कि संघ प्रमुख का यह वैश्विक दौरा भारतीय मूल्यों, वसुधैव कुटुंबकम की भावना और सामाजिक समरसता के संदेश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से रखेगा, जिसे भारत-विरोधी लॉबी पचा नहीं पा रही है।
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