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 “मायावती हिजाब विवाद” इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ा सियासी

मायावती हिजाब विवाद

मायावती हिजाब विवाद प्रयागराज के एक निजी स्कूल में नाबालिग छात्रा द्वारा यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की मांग वाली याचिका को इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने के बाद राज्य में राजनीतिक और सामाजिक बयानबाजी तेज हो गई है।

इस संवेदनशील मुद्दे पर बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। जहाँ एक तरफ मायावती ने मामले को स्थानीय स्तर पर सुलझाने की अपील की है, वहीं ओवैसी ने इस फैसले को धर्म और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर चोट करार दिया है।

मायावती की अपील: ‘संकीर्ण राजनीति’ से बचें, स्थानीय स्तर पर हल करें मुद्दा

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीम प्रमुख मायावती ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से शांति और समझदारी बनाए रखने का आग्रह किया।

मायावती ने कहा कि स्कूल यूनिफॉर्म और हिजाब से जुड़े मामलों को अदालत तक घसीटने के बजाय स्थानीय स्तर पर ही आपसी बातचीत से हल किया जाना चाहिए। उनके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

प्रशासन और स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी: मायावती ने जोर देकर कहा कि स्कूल प्रशासन, स्थानीय सरकार और जिला अधिकारियों को सूझबूझ का परिचय देना चाहिए। ऐसे मामलों को बेवजह तूल देकर कानूनी और सामाजिक विवाद नहीं बनने देना चाहिए।

राजनीतिक स्वार्थ का विरोध: बसपा प्रमुख ने सचेत किया कि धार्मिक या शैक्षणिक मामलों की आड़ में किसी को भी “संकीर्ण राजनीति” करने का अवसर नहीं मिलना चाहिए।

संविधान और अंबेडकरवादी विचारधारा: उन्होंने रेखांकित किया कि बसपा एक अंबेडकरवादी पार्टी है जो देश के संविधान में पूर्ण विश्वास रखती है। डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा रचित भारतीय संविधान देश के प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म, रीति-रिवाज और मान्यताओं का पालन करते हुए शांतिपूर्ण जीवन जीने का अधिकार देता है।

संवेदनशील मुद्दों पर संयम: उन्होंने आम जनता और नेताओं से किसी भी धर्म, पवित्र ग्रंथों या परंपराओं से जुड़े संवेदनशील विषयों पर भड़काऊ टिप्पणी न करने की अपील की।

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इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का रुख

यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रयागराज की एक छात्रा की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने स्कूल यूनिफॉर्म कोड के साथ हिजाब पहनने की अनुमति मांगी थी।

अदालत का अवलोकन: हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को अनुशासन और समानता बनाए रखने के लिए एक निष्पक्ष तथा गैर-भेदभावपूर्ण यूनिफॉर्म कोड लागू करने का पूरा अधिकार है।

AIMPLB का भावी कदम: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने इस न्यायिक आदेश से असहमति जताई है। बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने स्पष्ट किया कि हिजाब इस्लाम की एक आवश्यक और अभिन्न प्रथा है। उन्होंने संकेत दिया कि बोर्ड इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है।

बदायूं की घटना पर भी मायावती ने जताया ऐतराज

मायावती ने अपने बयान में केवल हिजाब विवाद ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने को लेकर पैदा हुए तनाव का भी उल्लेख किया।

हाल ही में बदायूं में सरकारी जमीन पर प्रतिमा लगाने के मुद्दे को लेकर विवाद बढ़ गया था, जिसके बाद पथराव की घटना सामने आई। इस हिंसा में सात पुलिसकर्मियों समेत कई लोग घायल हो गए थे और अनेक वाहनों को नुकसान पहुंचा था। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है। मायावती ने राज्य सरकार से इस विवाद का जल्द से जल्द न्यायसंगत और शांतिपूर्ण समाधान निकालने की मांग की।

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ओवैसी का तीखा हमला: ‘यूनिफॉर्मिटी कभी समानता नहीं हो सकती’

दूसरी ओर, एआईएमआईएम (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के निर्णय पर कड़ा ऐतराज जताया है। ओवैसी ने इस फैसले को “इस्लाम पर हमला” करार दिया।

अदालत के अधिकार क्षेत्र पर सवाल: ओवैसी ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट में धार्मिक प्रथाओं से जुड़े कई पहलू विचाराधीन हैं, ऐसे में यह तय करना अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर है कि कौन सी प्रथा इस्लाम के लिए जरूरी है और कौन सी नहीं।

मौलिक अधिकारों का हनन: उन्होंने तर्क दिया कि यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार) का सीधा उल्लंघन करता है।

छात्राओं की शिक्षा पर असर: ओवैसी ने आशंका जताई कि इस तरह के कड़े रुख से मुस्लिम लड़कियों की पढ़ाई-लिखाई पर नकारात्मक असर पड़ेगा और वे शिक्षा के मुख्यधारा से दूर हो सकती हैं।

मानसिकता पर कड़ा बयान: अपने बयान को स्पष्ट करते हुए ओवैसी ने कहा, “एक छात्रा हिजाब अपने सिर पर पहनती है, अपने दिमाग पर नहीं। समाज को यह समझना होगा कि एक जैसा दिखना (Uniformity) कभी भी वास्तविक बराबरी (Equality) नहीं हो सकता।”

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हिजाब और स्कूल यूनिफॉर्म को लेकर जारी यह बहस अब केवल शैक्षणिक नियमों तक सीमित न रहकर एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक मोड़ पर पहुंच चुकी है। जहाँ एक तरफ न्यायिक संस्थाएं संस्थानों में अनुशासन को प्राथमिकता दे रही हैं, वहीं राजनीतिक दल इसे व्यक्तिगत अधिकारों और धार्मिक मान्यताओं के चश्मे से देख रहे हैं।

ऐसे समय में समाज में शांति बनाए रखने के लिए मायावती द्वारा सुझाई गई ‘स्थानीय स्तर पर समाधान’ की रणनीति काफी अहम मानी जा रही है। सोशल मीडिया पर जारी बहस, बीएसपी (BSP) के रुख और विपक्षी प्रतिक्रियाओं के बीच जानें मायावती हिजाब विवाद की पूरी इनसाइड स्टोरी

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