“दिल्ली चलती बस गैंगरेप” 2012 जैसी दरिंदगी फिर आई सामने:
राजधानी दिल्ली में वर्ष 2012 के भयानक ‘निर्भया कांड’ की खौफनाक यादें एक बार फिर ताजा हो गई हैं। दिल्ली और नोएडा के बीच एक चलती स्लीपर बस के अंदर 11वीं कक्षा की 16-17 वर्षीय नाबालिग छात्रा के साथ कथित तौर पर गैंगरेप का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
आरोपियों ने मासूम को झांसा देकर बस में बिठाया और ग्रेटर नोएडा के परी चौक से दिल्ली के कश्मीरी गेट तक लगभग 43 किलोमीटर की दूरी के दौरान दरिंदगी को अंजाम दिया। वारदात के बाद पीड़िता को कश्मीरी गेट इलाके में सड़क किनारे फेंक कर आरोपी फरार हो गए।
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए शून्य एफआईआर (Zero FIR) और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आरोपी ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ्तार कर लिया है।
मदद के बहाने दिया झांसा, फिर चलती बस में की दरिंदगी
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़िता 11वीं कक्षा की छात्रा है, जो घर में कहासुनी के बाद नोएडा के सेक्टर 63 स्थित अपने कज़िन (रिश्तेदार) के घर जाने के लिए निकली थी।
परी चौक पर हुई मुलाकात: बारिश के दौरान जब लड़की ग्रेटर नोएडा के परी चौक पर उतरी, तो उसे अहसास हुआ कि वह अपनी मंजिल से अभी भी काफी दूर है और वह कोई सवारी ढूंढ रही थी।
झूठा आश्वासन देकर बस में बिठाया: तभी वहां एक गहरे नीले रंग की स्लीपर बस आकर रुकी। बस के कंडक्टर संदीप ने लड़की को आश्वासन दिया कि वे उसे नोएडा सेक्टर 63 के पास उतार देंगे। मासूम ने उन पर भरोसा किया और बस में सवार हो गई।
खाली बस में हैवानियत: पुलिस ने पुष्टि की है कि उस समय बस में कोई अन्य यात्री सवार नहीं था। वर्कशॉप से मरम्मत के बाद बस को पार्किंग बे ले जाया जा रहा था। रास्ते में ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप ने लड़की को जान से मारने की धमकी देकर उसके साथ दरिंदगी की।
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43 किलोमीटर तक बिना रोक-टोक दौड़ती रही बस, सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
इस वारदात ने 2012 के बाद यात्री बसों में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाए गए कड़े नियमों और पुलिस गश्त के दावों की पोल खोलकर रख दी है।
पर्दों के पीछे छिपा जुर्म: स्लीपर बस की खिड़कियों पर भारी पर्दे लगे हुए थे। नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे और दिल्ली-नोएडा सीमा के मुख्य चेकिंग पॉइंट्स से गुजरने के बावजूद 43 किलोमीटर के सफर में किसी भी पुलिस पिकेट ने बस को जांच के लिए नहीं रोका।
कश्मीरी गेट पर फेंक कर भागे: आरोपियों ने पीड़ित छात्रा को कश्मीरी गेट रिंग रोड के पास बाहर फेंक दिया और बस लेकर उत्तरी दिल्ली के तिमारपुर इलाके में पार्किंग बे की ओर चले गए।
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पीड़िता की हिम्मत और दिल्ली पुलिस की त्वरित कार्रवाई
घबराए और लहूलुहान होने के बावजूद पीड़िता ने हिम्मत नहीं हारी। वह किसी तरह एक ऑटो-रिक्शा लेकर कश्मीरी गेट पुलिस स्टेशन पहुंची और अपनी आपबीती सुनाई।
जीरो एफआईआर (Zero FIR) दर्ज: डीसीपी (नॉर्थ) निहारिका भट्ट ने बताया कि घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) की परवाह किए बिना तुरंत मामला दर्ज किया और नाबालिग का मेडिकल परीक्षण कराया।
फॉरेंसिक जांच में मिले सबूत: फॉरेंसिक टीम द्वारा बस की तलाशी के दौरान बस के अंदर से पीड़िता के बाल और अन्य अहम जैविक साक्ष्य बरामद हुए हैं। मेडिकल जांच में भी बलात्कार की पुष्टि हुई है।
सीसीटीवी से आरोपी गिरफ्तार: पुलिस ने कश्मीरी गेट, एक्सप्रेसवे और तिमारपुर इलाके के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर बस की पहचान की। घटना की रिपोर्ट दर्ज होने के कुछ ही घंटों के भीतर पुलिस ने दोनों आरोपियों—ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप को धर दबोचा और वारदात में इस्तेमाल बस को जब्त कर लिया।
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सुरक्षा उपायों पर फिर उठे बड़े सवाल
इस घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक व निजी परिवहन व्यवस्था में सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ने की तरफ इशारा किया है। स्लीपर बसों में भारी पर्दों का इस्तेमाल, बिना यात्रियों के कमर्शियल वाहनों की आवाजाही और एक्सप्रेसवे पर रात्रि गश्त की कमी जैसी कमियां एक बार फिर बहस के केंद्र में आ गई हैं।
17 वर्षीय नाबालिग छात्रा के साथ घटी यह घटना समाज और कानून व्यवस्था दोनों के लिए एक चेतावनी है। जहाँ दिल्ली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पॉक्सो एक्ट में मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है, वहीं अब पीड़िता और उसका परिवार अदालत से त्वरित सुनवाई और दरिंदों के लिए कठोरतम सजा की मांग कर रहा है।
आरोपी की गिरफ्तारी, पीड़िता की मेडिकल स्थिति और सीसीटीवी जांच के बीच जानें दिल्ली चलती बस गैंगरेप की पूरी इनसाइड स्टोरी खौफनाक वारदात, सड़क सुरक्षा पर उठते सवाल और पुलिस की त्वरित कार्रवाई के बीच सुर्खियों में आया दिल्ली चलती बस गैंगरेप
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