“NLSIU दीक्षांत समारोह रद्द” बेंगलुरु ने रद्द किया 34वां सालाना दीक्षांत समारोह
भारत के प्रमुख विधि संस्थानों में शुमार नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU), बेंगलुरु ने अपना 34वां वार्षिक दीक्षांत समारोह (Convocation Ceremony) रद्द कर दिया है। यह कार्यक्रम 12 सितंबर 2026 को आयोजित होना तय हुआ था।
हालांकि, प्रशासन ने सर्कुलर जारी कर इसका कारण “अनिवार्य परिस्थितियां” (Unavoidable Circumstances) बताया है, लेकिन यह कदम भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा की संभावित उपस्थिति के खिलाफ छात्रों और पूर्व छात्रों के बढ़ते विरोध के बाद उठाया गया है।
कोविड-19 महामारी के दौर के बाद यह पहला मौका है जब देश के इस शीर्ष लॉ स्कूल ने अपना पारंपरिक दीक्षांत समारोह रद्द करने का फैसला लिया है।
प्रशासन का सर्कुलर और ‘इन एब्सेंशिया’ डिग्रियां
गुरुवार सुबह NLSIU प्रशासन की ओर से 2026 बैच के उत्तीर्ण छात्रों को एक आधिकारिक सर्कुलर भेजा गया।
प्रशासन का पक्ष: सर्कुलर में कहा गया कि 3 अगस्त 2026 को दीक्षांत समारोह की तिथि घोषित की गई थी, लेकिन तमाम सामूहिक प्रयासों के बावजूद अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण 34वें वार्षिक समारोह का आयोजन संभव नहीं हो पा रहा है।
डिग्री वितरण प्रक्रिया: यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया है कि गवर्निंग बॉडीज़ की मंजूरी मिलने के बाद 2026 बैच के स्नातकों को ‘इन एब्सेंशिया’ (अनुपस्थिति में) डिग्रियां प्रदान की जाएंगी। छात्रों को उनकी मार्कशीट और डिग्री सर्टिफिकेट कूरियर के माध्यम से मंगाने या कैंपस से सीधे प्राप्त करने का विकल्प दिया जाएगा।
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विवाद की जड़: NALSAR घटनाक्रम और BCI का रुख
इस विरोध की शुरुआत दरअसल हैदराबाद स्थित ‘नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च’ (NALSAR) में हुए एक विवाद से जुड़ी हुई है।
NALSAR में विरोध: NALSAR के छात्रों और फैकल्टी ने अपने दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत की मौजूदगी का विरोध किया था।
BCI की सख्त कार्रवाई और वापसी: इस विरोध के जवाब में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने NALSAR के पास-आउट छात्रों के बतौर वकील पंजीकरण (Enrolment) को रोकने का अभूतपूर्व निर्णय लिया था। हालांकि, कानूनी बिरादरी और शिक्षाविदों की ओर से भारी आलोचना के बाद BCI को कुछ ही घंटों में अपना यह आदेश वापस लेना पड़ा।
NLSIU का खुला पत्र: BCI के इस कदम से नाराज़ NLSIU समुदाय के 700 से अधिक सदस्यों—जिनमें 165 स्नातक छात्र, 409 वर्तमान छात्र और 128 पूर्व छात्र (Alumni) शामिल हैं—ने 15 अगस्त को प्रशासन को एक खुला पत्र लिखा। इस पत्र में NALSAR के छात्रों के साथ एकजुटता जताई गई और BCI से बिना शर्त माफी की मांग की गई।
CJI सूर्यकांत और छात्रों के बीच हुई थी 90 मिनट की बातचीत
विवाद को सुलझाने के प्रयास में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने NLSIU के छात्रों से सीधे बातचीत भी की थी। यह संवाद लगभग 90 मिनट तक चला, जिसमें छात्रों ने अपनी चिंताओं, न्यायिक स्वायत्तता और BCI के हस्तक्षेप से जुड़े मुद्दों को रेखांकित किया था। हालांकि, इस संवाद के बाद भी छात्रों के रुख में कोई खास नरमी नहीं आई और अंततः प्रशासन को समारोह रद्द करने का निर्णय लेना पड़ा।
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कानूनी शिक्षा जगत पर असर और संस्थान की स्वायत्तता पर बहस
NLSIU जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में पारंपरिक ग्रेजुएशन सेरेमनी का रद्द होना भारतीय कानूनी शिक्षा के क्षेत्र में एक असाधारण घटना माना जा रहा है।
स्वायत्तता का सवाल: यह पूरा घटनाक्रम कानून के शीर्ष शिक्षण संस्थानों की अकादमिक स्वायत्तता (Academic Autonomy), छात्रों के अभिव्यक्ति के अधिकार और बार काउंसिल जैसी नियामक संस्थाओं (Regulatory Bodies) के बीच संतुलन पर बड़े सवाल खड़े करता है।
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परंपरा पर विराम: 2026 बैच के छात्रों के लिए बिना किसी औपचारिक दीक्षांत समारोह के डिग्री प्राप्त करना एक अलग अनुभव रहेगा, जो भारतीय न्यायपालिका और प्रीमियर लॉ स्कूलों के बीच तनाव की एक नई मिसाल पेश करता है।
बेंगलुरु के NLSIU द्वारा 34वें दीक्षांत समारोह को रद्द करने का फैसला यह दर्शाता है कि NALSAR से शुरू हुआ विवाद अब व्यापक रूप ले चुका है। जहाँ यूनिवर्सिटी प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए ‘इन एब्सेंशिया’ डिग्री बांटने का रास्ता चुना है, वहीं यह मामला भारतीय कानूनी बिरादरी में वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों की उपस्थिति, छात्र विरोध और संस्थागत स्वतंत्रता के विषयों पर एक लंबी बहस को जन्म दे चुका है।
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