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 “कांग्रेस बीजेपी दलित राजनीति”रामलीला मैदान में ‘शुद्धिकरण’ पर घमासान

कांग्रेस बीजेपी दलित राजनीति

कांग्रेस बीजेपी दलित राजनीति उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े राष्ट्रीय और राजनीतिक रूप में तब्दील हो चुका है। रैली के बाद मैदान के कथित ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान को लेकर कांग्रेस ने राज्य भर में उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

हरिद्वार में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और 15 अन्य लोगों के खिलाफ अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करने के लिए पुलिस में लिखित शिकायत सौंपी है।

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए उस पर राजनीतिक फायदे के लिए दलित समुदाय का हथियार के रूप में इस्तेमाल करने और समाज को बांटने का आरोप लगाया है।

क्या है पूरा मामला? रामलीला मैदान में ‘हवन और गंगाजल’ से शुरू हुआ विवाद

8 अगस्त को हल्द्वानी के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की एक विशाल जनसभा आयोजित की गई थी। इसके दो दिन बाद, दक्षिणपंथी संगठन ‘श्री राम सेना’ के सदस्यों ने कथित तौर पर उस मंच और मैदान में गंगाजल छिड़का और हवन किया, जिसे उन्होंने ‘शुद्धिकरण’ की प्रक्रिया बताया।

कांग्रेस का आरोप: कांग्रेस ने इस घटना की तीखी निंदा की और इसे “छुआछूत” तथा “दलित-विरोधी मनुवादी मानसिकता” का स्पष्ट प्रतीक बताया।

संसद में गूंजा मुद्दा: पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने संसद में इस मुद्दे को उठाते हुए अपना दर्द व्यक्त किया और दोषियों पर छुआछूत निवारण कानून के तहत सख्त कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस घटना को एक दलित नेता का अपमान करार दिया।

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हरिद्वार में कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन, SC/ST एक्ट में केस दर्ज करने की मांग

सोमवार को हरिद्वार जिला कांग्रेस कमेटी ने महानगर अध्यक्ष अमन गर्ग के नेतृत्व में हरिद्वार कोतवाली पुलिस स्टेशन पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं ने अधिकारियों को एक लिखित शिकायत सौंपी जिसमें बीजेपी उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और 15 अन्य के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई।

दोहरे चरित्र का आरोप: अमन गर्ग ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “एक तरफ बीजेपी संत रविदास की जयंती पर कार्यक्रम आयोजित करती है, वहीं दूसरी तरफ उनका दोहरा चरित्र सामने आता है। राष्ट्रीय अध्यक्ष खड़गे जी की रैली के बाद मैदान को ‘शुद्ध’ करने के लिए हवन करना सीधे तौर पर छुआछूत की श्रेणी में आता है। इस कृत्य को सही ठहराकर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने SC/ST एक्ट का उल्लंघन किया है।”

राज्य संरक्षण में छुआछूत: कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के संरक्षण में जातिवादी मानसिकता को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बीजेपी का पलटवार: “कांग्रेस का रहा है दलितों का अपमान करने का इतिहास”

विपक्ष के हमलावर रुख के बीच बीजेपी ने नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस पर जोरदार पलटवार किया। बीजेपी ने कांग्रेस पर राजनीतिक लाभ के लिए हिंदू समाज को बांटने और दलित समुदाय को मोहरा बनाने का आरोप लगाया।

डॉ. गुरु प्रकाश पासवान का बयान: बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. गुरु प्रकाश पासवान ने कहा कि कांग्रेस का दलित समाज का अपमान करने का लंबा इतिहास रहा है। इसके विपरीत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर से जुड़े पांच प्रमुख स्थलों को ‘पंचतीर्थ’ का दर्जा देकर उनकी विरासत को असल सम्मान दिया है।

डॉ. सुधांशु त्रिवेदी का आरोप: बीजेपी प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने अनुच्छेद 370 का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस द्वारा लागू किए गए प्रावधानों के कारण जम्मू-कश्मीर में दशकों तक वाल्मीकि समुदाय के लोगों को उनके मूल अधिकारों और निवास संबंधी सुविधाओं से वंचित रखा गया था।

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आयोजकों की सफाई और बीजेपी का स्पष्टीकरण

विवाद बढ़ता देख केंद्र सरकार और बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने इस घटनाक्रम पर अपनी स्थिति साफ की है।

जेपी नड्डा का संसद में वक्तव्य: केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने संसद में स्पष्ट किया कि बीजेपी का ‘श्री राम सेना’ या इस आयोजन के आयोजकों से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने घटना की निंदा करते हुए निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया।

आयोजकों का तर्क: आयोजकों और स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना था कि हवन का खड़गे जी की जाति से कोई संबंध नहीं था। उनका दावा था कि रैली के दौरान रामलीला मैदान की धार्मिक मर्यादा और स्वच्छता प्रभावित हुई थी, इसलिए सामान्य धार्मिक प्रक्रिया के तहत परिसर की सफाई की गई थी।

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हल्द्वानी का यह विवाद अब केवल स्थानीय राजनीति तक सीमित न रहकर राष्ट्रीय स्तर पर जातिगत और सामाजिक न्याय की राजनीति का केंद्र बन गया है। एक तरफ जहां कांग्रेस इसे दलित अस्मिता और संवैधानिक अधिकारों पर हमला बताकर बीजेपी को घेर रही है, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी इसे कांग्रेस का तुष्टिकरण और समाज को विभाजित करने का प्रयास करार दे रही है।

पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत के बाद अब देखना होगा कि प्रशासन इस संवेदनशील मामले में क्या कानूनी कदम उठाता है। नेताओं की बयानबाजी, रैलियों में आरक्षण के वादों और सामाजिक मुद्दों के बीच जानें कांग्रेस बीजेपी दलित राजनीति की पूरी इनसाइड स्टोरी

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