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 “सुप्रीम कोर्ट 142 NEET” के तहत छात्र प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी FIR रद्द

सुप्रीम कोर्ट 142 NEET

सुप्रीम कोर्ट 142 NEET सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET-UG) 2026 पेपर लीक मामले में प्रदर्शन करने वाले हजारों छात्रों को बड़ी राहत दी है। मंगलवार को सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान छात्रों के खिलाफ दर्ज की गई सभी प्राथमिकियों (FIR) को रद्द करने का ऐतिहासिक आदेश दिया।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन आपराधिक मामलों का छात्रों के भविष्य या करियर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त और छात्र-हितैषी रुख के बाद, छात्र संगठन ने 5 सितंबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रस्तावित अपना विशाल मार्च रद्द करने की घोषणा की है।

संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर दिया ‘पूर्ण न्याय’

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार के अनुरोध को स्वीकार करते हुए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का प्रयोग किया।

युवाओं का भविष्य प्राथमिकता: शीर्ष अदालत ने कहा कि युवा प्रदर्शनकारियों के भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल किया जा रहा है।

स्वतः बंद माने जाएंगे मामले: पीठ ने आदेश दिया कि 20 से 25 जुलाई के दौरान देश के किसी भी राज्य या केंद्र-शासित प्रदेश में इन प्रदर्शनों के संबंध में दर्ज की गई सभी FIR को तुरंत बंद माना जाए और उन पर कोई आगे की दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।

अपराधिक रिकॉर्ड वालों पर छूट: हालांकि, अदालत ने केंद्र के अनुरोध को मानते हुए दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान मौजूद गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2,873 संदिग्ध व्यक्तियों के खिलाफ नई प्राथमिक दर्ज करने की छूट दी है।

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NEET-UG पीड़ितों के परिवारों के लिए 3 महीने में मुआवजे का आदेश

अदालत ने केवल छात्रों पर से मुकदमे हटाने तक ही अपना फैसला सीमित नहीं रखा, बल्कि NEET-UG 2026 पेपर लीक की विफलता के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों के प्रति भी गहरी संवेदना व्यक्त की।

समय-सीमा तय: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सख्त निर्देश दिया है कि पेपर लीक के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को तीन महीने (90 दिन) के भीतर उचित आर्थिक मुआवजा प्रदान किया जाए।

CJP की मांग: इंडिया टुडे के साथ एक बातचीत में CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने कहा कि पीड़ित परिवारों को कम से कम 1 करोड़ रुपये की सहायता राशि मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी सरकार सिस्टम की नाकामी की भरपाई के लिए इतनी मदद तो कर ही सकती है।

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    सरकार की प्रतिक्रिया और CJP का रुख

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि देश के युवाओं का कल्याण और उनकी प्रगति वर्तमान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल किसी भी निर्दोष छात्र के खिलाफ दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा।

    दूसरी ओर, CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस फैसले को “पूर्ण न्याय की जीत” करार दिया। उन्होंने कहा कि संगठन की मुख्य मांगे—छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेना, पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद और प्रशासनिक जवाबदेही तय करना—पूरी हो गई हैं।

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    रांका ने आगे बताया कि उनका संगठन अब देशभर के सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अपना अभियान जारी रखेगा।

    NEET-UG 2026 विवाद में सुप्रीम कोर्ट का यह हस्तक्षेप प्रशासनिक विफलता और छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच एक महत्वपूर्ण संतुलन स्थापित करता है। अनुच्छेद 142 के तहत सभी मामलों को खत्म करके जहां न्यायपालिका ने हजारों छात्रों का भविष्य सुरक्षित किया है, वहीं मुआवजे का आदेश देकर पीड़ित परिवारों को राहत पहुंचाने का प्रयास किया है।

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